इन दिनों पूरे देश में लाउडस्पीकर को लेकर सियासी जंग छिड़ी हुई है। महाराष्ट्र में ये मुद्दा कुछ ज्यादा ही गर्माया हुआ है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) चीफ राज ठाकरे ने तीन मई से पहले मस्जिदों के ऊपर से लाउडस्पीकर हटाने की मांग की है। वह मस्जिदों के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात भी कहते रहे हैं। उधर, निर्दलीय सांसद रवि राणा और उनकी पत्नी नवनीत राणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के चक्कर में हवालात पहुंच चुकी हैं। ऐसे में हनुमान चालीसा को तमाम मौकों पर गा चुके, इसकी रिकॉर्डिंग करवा चुके लोकप्रिय गायक सुरेश वाडेकर ने अजान के विरोध को ठीक नहीं बताया है।
Loud Speaker Controversy: अजान विवाद पर बोले गायक सुरेश वाडेकर, ‘ये उनके धर्म का काम है, उसे वे करते हैं, हमें अपने धर्म पर चलना चाहिए’
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हनुमान चालीसा का समय तय नहीं
गायक सुरेश वाडेकर हनुमान चालीसा का पाठ रिकार्ड कर चुके हैं। उनकी पढ़ी हनुमान चालीसा रेडियो पर भी काफी सुनी जाती है। वह कहते हैं, ‘हनुमान जी महाबली है। रुद्र के अवतार हैं। वह संकटमोचन हैं। हमारी हर तरह से रक्षा करते हैं। हनुमान चालीसा किसी भी वक्त, कहीं भी पढ़ी जा सकती है।’
अशांति क्यों फैलाते हैं लोग?
सुरेश वाडेकर कहते हैं, ‘मैं ईमानदारी से बोलूं तो इन सब चीजों में न तो मुझे कोई दिलचस्पी है और न ही मैं कोई प्रतिक्रिया देना चाहता हूं। क्योंकि, ये मेरा विषय नही है। पता नही लोग बैठे बैठे क्या सोच कर ऐसा करते हैं, जिसकी वजह से थोड़ी बहुत अशांति हो जाती है। इससे किसी को कुछ हासिल तो होता नहीं है।'
‘सिस्टम होता है डिस्टर्ब’
अपने नए म्यूजिक वीडियो ‘मान ले’ की रिलीज के मौके पर मिले सुरेश वाडेकर कहते हैं, ‘इन सब चीजों में आम लोगों की कोई दिलचस्पी नहीं होती है। मैं भी आम इंसान हूं, इसमें मुझे भी कोई दिलचस्पी नहीं है। जो भी हुआ उसकी न कोई जरूरत थी और न ही कोई कारण। हां, इससे सिस्टम जरूर डिस्टर्ब हो जाता है। अभी दो दिन पहले मैं लता जी के अवार्ड कार्यकम में जा रहा था। मैंने सांताक्रूज पुलिस स्टेशन के सामने देखा कि बहुत सारे मीडिया के लोग खड़े थे। मुझे मालूम ही नहीं था कि क्या हुआ? ड्राइवर से पूछा तो उसने बताया कि हनुमान चालीसा के मसले पर किसी सियासी दंपती को पकड़ कर लाए हैं।’
‘अजान उनके धर्म का काम’
लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ने के मसले पर सुरेश वाडेकर कहते हैं, ‘इस पर मैं क्या बोल सकता हूं। हम तो बचपन से ही अजान सुनते आए हैं। उनकी जो टाइमिंग होती है। उसमें वह पढ़ते है। ये उनके धर्म का काम है, उसे वे करते हैं। हमें अपने धर्म पर चलना चाहिए, लेकिन वहां हम भूल जाते हैं। बहुत सारे लोग हैं जो मंदिर की तरफ देखते तक नहीं हैं।’