अखबार आम लोगों से लेकर फिल्मी सितारों तक ही ज़िंदगी का अहम हिस्सा रहा है। मुंबई में इन दिनों भले कोरोना के चलते घरों तक अखबार न पहुंच पा रहा हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सितारे ऐसे हैं जो अपने जीवन का टर्निंग प्वाइंट इन अखबारों में छपी खबरों को ही मानते हैं। अमर उजाला ने बात की ऐसे ही कुछ सितारों से और जानने की कोशिश की कि कैसे एक अखबार ने उनके जीवन को प्रभावित किया।
अखबार की एक कटिंग ने बदली किसी की ज़िंदगी तो किसी को नहीं भूला पहला आलेख, पढ़िए सितारों की यादें
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कटिंग पर बनी ‘कागज’
हिंदी सिनेमा में कैलेंडर नाम से मशहूर रहे अभिनेता सतीश कौशिक रेडियो पर फिल्मी कैलेंडर शो भी करते हैं। उनकी एक फिल्म जो रिलीज की कतार में हैं, उसका नाम है कागज़। फिल्म के प्रोड्यूसर सलमान खान हैं। सतीश बताते हैं, “फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' की शूटिंग के दौरान मैंने एक अजीब खबर पढ़ी जिसमें एक आदमी लाल बिहारी को जीवित रहते हुए भी उसके चाचा ने मरा हुआ घोषित करवा दिया। 19 साल तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर लाल बिहारी ने खुद को जिंदा साबित किया।” इसी खबर पर बनी है सतीश कौशिक की फिल्म कागज जिसे वह लॉक डाउन उठने के बाद रिलीज करने की तैयारी में हैं।
नहीं भूलता पूरे पेज का लेख
अभिनेता शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन हाल ही में अभिनेत्री हिना खान के साथ वेब सीरीज 'डैमेज्ड 2' में नजर आए थे। उनका करियर बहुत बेहतर तो नहीं चला, लेकिन अखबार ने उन्हें खुशियां बहुत दी हैं। उन्होंने बताया, 'आज से 10 पहले जब अखबार में मेरे ऊपर पूरा एक पेज लिखा गया था, तो उसमें खुद को देखकर बहुत खुशी हुई थी। मैं उस पेपर को पढ़कर खुद मन ही मन खुश हो रहा था। उस जैसी फीलिंग आजतक फिर से नहीं आई। बेशक, अखबार ने मेरा बहुत साथ दिया है। पेपर के जैसा कुछ और है ही नहीं।'
अखबारों ने दिया पहला सहारा
वहीं फिल्म 'जय मम्मी दी' में सनी सिंह के साथ नजर आईं सोनाली सहगल की तो शुरुआत ही अखबार से हुई है। उन्होंने बताया, 'मैं जब अपने करियर की शुरुआत कर रही थी तो मेरी लोगों से जान पहचान तो थी नहीं। इसलिए मैं अक्सर चीजों को अखबार में ही ढूंढा करती थी। मैंने कई ऑडिशन तो अखबार से पते निकालकर ही दिए हैं। लेकिन अब मैं अखबार से थोड़ी दूर हूं, क्योंकि आजकल देश में ऐसी चीजें ज्यादा होती हैं, जो मुझे अंदर से आहत करती हैं। और मैं इन सब चीजों के बारे में सोचना नहीं चाहती।'
अखबार ने बदल दी किस्मत
रंग मंच के शानदार कलाकार नीरज काबी को भी अखबार ने ही बड़ी पहचान दिलाई। पुराने दिनों का एक वाकया बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं जब रंगमंच का कलाकार था, तब एक अखबार में मेरे लिए एक आलेख छपा। जिस नाटक में मैंने काम किया था, उस नाटक की कम और मेरे किरदार की तारीफें ज्यादा लिखी गईं थी। उससे मुझे बड़ा फायदा हुआ। उसको पढ़कर लोगों ने वह नाटक देखना शुरू किया। पहले जहां उस नाटक को 50-60 लोग ही देखने आ रहे थे, अब वह शो हाऊसफुल चल रहा था। मुझे अब भी याद है कि वह नाटक पृथ्वी थिएटर में चल रहा था। मेरा चेहरा मास्क से ढका हुआ था, फिर भी एक अखबार ने मुझे पहचानने योग्य बना दिया था।'