हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी से प्यार जरूर होता है। ऐसा कोई नहीं है जो इस एहसास से होकर न गुजरा हो। दुनियाभर में प्यार की खूबसूरती और मधुरता की मिसालें दी जाती हैं। कहा जाता है कि एक सच्चा दिल सबके पास होता है, बस उसे पहचानने वाले का इंतजार रहता है। और जब ये इंतजार खत्म होता है तो इंसान प्यार के समंदर में गोते लगाने लगता है, वो इसमें डूब जाना चाहता है। प्यार वो है जिसे सबको नहीं दिया जा सकता है, जो हमारे लिए बेहद खास होता है। सिर्फ और सिर्फ उसका ही इसपर हक होता है, जिसे हम अपनी जिंदगी मान बैठते हैं। दुनिया में काफी ऐसे लोग हैं जो पहली नजर में ही जान जाते हैं कि उनका जीवनसाथी उनके सामने है, बस देर है उससे कहने मात्र की। इन्हीं लोगों में शामिल हैं साउथ सिनेमा में भगवान की तरह पूजे जाने वाले एक्टर रजनीकांत। पूरी दुनिया में थलाइवा के नाम से मशहूर रजनीकांत भी पहली नजर में ही जान गए थे कि उनकी लाइफ पार्टनर उनके सामने बैठा है और उन्होंने बेझिझक अपने प्यार का इजहार किया। उन्होंने अपने दिल की बात बोलने में एक पल की भी देरी नहीं की। उन्हें पता था कि ये पल और ये एहसास वापिस नहीं आने वाला, वह जान गए थे कि एक पल की भी देरी उनके प्यार में मुश्किल पैदा कर सकती है।
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रजनीकांत के लिए मंदिर बनाने से लेकर उनके पोस्टरों पर दूध डालने तक, अपने चाहते स्टार की फिल्मों का पहला शो देखने के लिए सुबह चार बजे कतार में लगने तक ऐसे कई किस्से हैं जो रजनीकांत की पॉपुलैरिटी को साबित करते हैं। लेकिन आज हम उनकी प्रेम कहानी के अनछुए पहलुओं पर बात करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं...
रजनीकांत और रंगाचारी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से कम नहीं
साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मी जिंदगी से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं पता। रजनीकांत की प्रेम कहानी के बारे में उनके चाहने वाले जानने की इच्छा रखते हैं। उनके फैन जानना चाहते हैं कि आखिर रजनीकांत और उनकी पत्नी लता रंगाचारी की लव स्टोरी शादी तक कैसे पहुंची? दोनों की पहली मुलाकात कब और कहां हुई और कैसे उनका प्यार मुकम्मल हुआ? ये ऐसे कुछ सवाल हैं जिनके बारे में बहुत की कम लोग जानते हैं। लेकिन आज हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देंगे। रजनीकांत और रंगाचारी की प्रेम कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है।
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पहली मुलाकात में लता को शादी के लिए प्रपोज कर बैठे रजनीकांत
साल 1979 में रजनीकांत और लता रंगाचारी की पहली मुलाकात हुई थी। दरअसल, जब रजनीकांत बॉलीवुड फिल्म गोलमाल की तमिल रीमेक थिल्लू मल्लू की शूटिंग कर रहे थे तो रंगाचारी उनके पास इंटरव्यू लेने के लिए आई थीं। पहली मुलाकात में ही रजनीकांत उन्हें दिल दे बैठते हैं। लता उस समय इतिराज कॉलेज की स्टूडेंट थीं। वह अपने कॉलेज की मैगजीन के लिए इंटरव्यू लेने आई थीं। बातों ही बातों में दोनों का बेंगलुरु कनेक्शन सामने आया, जिस वजह से इंटरव्यू के दौरान दोनों काफी कंफर्टेबल फील कर रहे थे। इंटरव्यू लेने पहुंची लता को पहली बार देखते ही रजनीकांत को उनसे प्यार हो गया था। इतना ही नहीं इंटरव्यू खत्म होते ही रजनीकांत ने लता को अपनी दिल की बात बोल दी। उन्होंने उनसे कहा कि क्या आप मुझसे शादी करेंगी? जिसे सुनते ही लता अचंभित हो गईं और कहा कि इसके लिए उन्हें उनके माता-पिता से बात करनी होगी।
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प्रपोज करने के बाद नर्वस थे रजनीकांत
बेंगलुरु कनेक्शन की वजह से इंटरव्यू के दौरान दोनों एक दूसरे से अच्छे से कनेक्ट हो पा रहे थे। दरअसल, रजनीकांत फिल्मों में आने से पहले बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी की थी जबकि लता का बेंगलुरु में घर था एक तरफ जहां हिम्मत जुटाकर रजनीकांत ने अपने दिल की बात लता को बोल तो दी लेकिन दूसरी तरफ रजनीकांत यह सोचकर काफी नर्वस थे कि लता के माता-पिता शादी के लिए राजी होंगे या नहीं। उनके मन में कई तरह के सवाल घर कर बैठे थे। उन्हें इस बात का भी डर था कि लता को वह पसंद आए या नहीं। हालांकि, दोनों के माता-पिता शादी के लिए राजी हो गए। इसके बाद रजनीकांत और लता 26 फरवरी 1981 को शादी के बंधन में बंध गए।
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