किस्सा: खेसारी लाल ने किया खुलासा, फिल्मों में आने से पहले अपनी भैंसों के लिए करते थे 'चोरी'
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खेसारी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि जब वह भैंस चराते और उनका दूध बेचते थे। अक्सर दूध में पानी मिला दिया करतें, ताकी 10-20 रुपये ज्यादा मिल सके। इतना ही नहीं वह दूसरों के खेत से सरसों और मकई चुराया करते थे। ताकि अपनी भैंसो का पेट भर सकें। उनका ज्यादा से ज्यादा समय अपनी भैंसो की देख रेख में जाता था। इतना ही नहीं उन्होंने घास काटने तक का काम किया है।
गरीबी के दिनों में हुई शादी
खेसारी लाल की शादी गरीबी के दिनों में ही गई थी। घर का खर्च चलाने के लिए खेसारी पत्नी के साथ दिल्ली आ गए थे। इस दौरान खेसारी ने लिट्टी-चोखे की दुकान खोली, जहां उनकी पत्नी उनकी हेल्प किया करती थीं। पत्नी लिट्टी में सत्तू भरती थी और वो उसे सेंकते थे। गरीबी का आलम ये था कि उनकी पत्नी चंदा ने एक ही साड़ी में कई महीने गुजार दिए थे।
खेसारी लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे थे। उनका चयन बीएसएफ में हो गया। लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं लगा और वह काम छोड़कर दिल्ली वापस आ गए। यहां आकर उन्होंने अपनी भोजपुरी एलबम निकाली। खेसारी को उनकी पहली सफलता अपने भोजपुरी एल्बम 'माल भेटाई मेला' से मिली।
साल 2012 में आयी खेसारी लाल यादव की पहली भोजपुरी फिल्म 'साजन चले ससुराल' ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया। इसके बाद खेसारी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए।

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