बीते दिनों फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा और विवेक अग्निहोत्री के बीच ट्विटर पर नोंकझोंक होती देखी गई। दरअसल, यह मामला शुरू हुआ था 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी', 'चमेली', 'ये साली जिंदगी' जैसी सामाजिक फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सुधीर मिश्रा के एक ट्वीट से। इस ट्वीट में उन्होंने 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर शिकायतें करने वाले उदारवादियों पर तंज कसा था और कहा था कि विवेक अग्निहोत्री का दर्शक वर्ग उनकी फिल्म देखने थिएटर जाता है, लेकिन जब हम फिल्म बनाते हैं तो हमारा दर्शक वर्ग थिएटर आने की बजाय घर पर बैठा रहता है। इस पर विवेक अग्निहोत्री ने भी जवाबी ट्वीट किया था और साथ ही एक पॉडकॉस्ट के लिए भी कहा था। अब अचानक सुधीर मिश्रा के सुर बदल गए हैं और वह विवेक अग्निहोत्री के पक्ष में आते नजर आ रहे हैं।
Vivek Agnihotri: विवेक अग्निहोत्री के प्रति अचानक बदले सुधीर मिश्रा के सुर? अब कही यह बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुधीर मिश्रा के ट्वीट के बाद दोनों फिल्म मेकर्स ने एक बातचीत का फैसला किया कि आखिर उदारवादी समान विचारधारा के बाद भी फिल्म देखने थिएटर तक क्यों नहीं जाते हैं? इस बातचीत के दौरान सुधीर मिश्रा ने सिनेमा की दुनिया में हर तरह की फिल्में बनाए जाने और उन्हें देखे जाने की वकालत की।
निर्देशक सुधीर मिश्रा ने खुलासा किया कि 'द कश्मीर फाइल्स' से उनकी असहमति है, जिस तरह इसका इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आगे कहा, 'विवेक अग्निहोत्री एक अलग कलात्मकता वाले फिल्ममेकर हैं, लेकिन अगर कोई यह कहेगा कि उन्हें 'द कश्मीर फाइल्स' नहीं बनानी चाहिए तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे।' सुधीर मिश्रा का मानना है कि हर तरह की फिल्म बनाई जानी चाहिए।
Chirbhog: एनएचआरसी प्रतियोगिता में मराठी फिल्म चिरभोग ने मारी बाजी, यहां देखें पूरी विनर लिस्ट
सुधीर मिश्रा के अनुसार, विवेक एक ऐसे फिल्म निर्माता हैं, जिनका एक अलग सौंदर्य है, लेकिन अगर कोई कहता है कि विवेक को 'द कश्मीर फाइल्स' बनाने की अनुमति नहीं है, तो वह निर्देशक के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि हमें यह देखना चाहिए कि फिल्म में क्या चीज दर्शकों को जोड़ती है।
Ayushmann Khurrana: छोटे भाई अपारशक्ति की राह चले आयुष्मान, करने जा रहे ‘स्त्री’ के जॉनर वाली ये फिल्म
सुधीर मिश्रा ने यह भी कहा कि कुछ भी न जानने की बजाय यह जानना ज्यादा बेहतर है कि समाज में आखिर क्या चल रहा है? फिल्मकार ने कहा कि इंसान की कुछ भावनाएं शिथिल पड़ी रहती हैं, लेकिन जब वे 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्म देखने जाते हैं, तो उन भावनाओं को व्यक्त करते हैं। ऐसे में उन लोगों को खारिज नहीं किया जा सकता है। आपको उन्हें सुनना ही होगा। आपको ऐसा माहौला बनाना होगा, जहां अलग विचारधारा की फिल्में बनें और लोग उन्हें देखने जाएं। जरूरी नहीं कि सभी उन्हें पसंद करें, लेकिन अलग-अलग तरीकों पर बात कर सकें।
Sheezan Khan: शीजान खान को खतरों के खिलाड़ी 13 के लिए वापस मिला पासपोर्ट, तुनिशा की मां ने जताई शो पर नाराजगी