अपनी पौराणिक व काल्पनिक ऐतिहासिक कथाओं व उपन्यासों के लिए चर्चित लेखक आनंद नीलकंठन ने 1 जनवरी से प्रसारित होने जा रहे धारावाहिक ‘श्रीमद् रामायण’ की भी कथा लिखी है। दावा यही है कि निर्माता सिद्धार्थ कुमार तिवारी ने इस धारावाहिक का निर्माण नए दौर के दर्शकों के हिसाब से किया है। आनंद नीलकंठन भी मानते हैं कि रामचरित मानस की कथा में बहुत ज्यादा बदलाव मुमकिन ही नहीं है, इसे बस नए नजरिये से प्रस्तुत किया जा सकता है। आनंद से एक बातचीत।
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रामचरित मानस सबसे लोकप्रिय रामकथा
पूरी दुनिया में राम कथा पर करीब 300 रामायणें लिखी जा चुकी हैं। इन रामकथाओं से निकली करीब एक लाख कथाएं (क्षेपक) भी लोकअंचलों में प्रचलित रहे हैं। इनमें से श्रीरामचरित मानस सबसे ज्यादा प्रचलित और सबसे ज्यादा लोकप्रिय भक्तिकथा है, इसीलिए हमने अपना धारावाहिक इस कथा पर केंद्रित रखा है।
ध्यान दर्शकों के भक्तिभाव पर
रामकथा पर कोई भी धारावाहिक या फिल्म बनाने में सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि इसे आप अगली बार किस नए तरीके से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं। ध्यान इस बात का रखना ज्यादा जरूरी होता है कि ये कथा दर्शकों का भक्तिभाव और उनकी भावनाएं किस प्रकार कहानी से जोड़ पाती है।
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तुलसी जानते थे तमिल
वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में मूल अंतर ड्रामा का है। तुलसीदास ने अपनी रामकथा दक्षिण के रचयिता कंबन की रामायण से प्रेरित होकर लिखी है। इसीलिए उनकी रामकथा में भावों की प्रबलता है। तुलसीदास ने रामचरित मानस लिखने से पहले काफी भारत भ्रमण किया और उन्हें तमिल का भी ज्ञान था।
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कथा के विस्तार का सार
‘श्रीमद् रामायण’ में राम के सामने बार बार आने वाले धर्मसंकट की बात की गई है। चाहे वह फिर कैकेयी से उनका संवाद हो, ताड़का का वध हो, ऐसी हर परिस्थिति का एक कारण रहा होगा, जिसका हमने इस धारावाहिक में विस्तार करने की कोशिश की है।
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