सिनेमा पर लिखना दो तरह से होता है। एक जिसमें लेखक अपने शब्दों का भंडार उड़ेलकर खुद के साहित्यकार होने का दावा अपने पाठकों के समक्ष करना चाहता है, दूसरा होता है लिखना उस आम बोलचाल में जिसे फिल्में देखने वाला अपनी बोली समझता है। प्रेमचंद जैसा रस ऐसे लेखन में आना चाहिए। सिनेमा पर साहित्य बहुत गढ़ा गया है लेकिन वह आम दर्शक को रस इसीलिए नहीं दे पाता है क्योंकि उसमें दर्शक की रूचि का ध्यान रखने की बजाय लिखने वाले की अपनी काबिलियत का प्रदर्शन ज्यादा होता है। बाइस्कोप में मैंने क्लिष्ट हिंदी से बचने की कोशिश की है। आलंकारिक भाषा से भी परहेज किया है। इस संडे आपके लिए इस गुलदस्ते में छह फिल्में, दीवाना मुझ सा नहीं, क्रिमिनल, क्रांतिवीर, रेशमा और शेरा, कलयुग और राम तेरी गंगा मैली। तो पढ़िए इनके रोचक किस्से। सोमवार के बाइस्कोप में हम बात करेंगे अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी की शादी के तुरंत बाद रिलीज हुई दोनों की फिल्म ‘अभिमान’ की।
Sunday Bioscope: छह फिल्में, छत्तीस किस्से और बातें नाना पाटेकर से लेकर दाऊद की दोस्त मंदाकिनी तक की
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आमिर की ‘बदतमीजी’ की इंतेहा
आमिर की बतौर हीरो पहली फिल्म कयामत से कयामत तक सुपरहिट रही। फिल्म ने तब 1988 में बॉक्स ऑफिस पर करीब पांच करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसके बाद रिलीज हुई फिल्म राख का प्रदर्शन बहुत खराब रहा। फिल्म लव लव लव सिर्फ पौने तीन करोड़ रुपये कमा पाई और फिल्म तुम मेरे हो ने साल 1990 में कमाए करीब पौने चार करो रुपये। आमिर खान के करियर में दहाई के करोड़ अंकों वाली कमाई करने वाली पहली फिल्म रही दिल, जिसने साल 1990 में 10 करोड़ रुपये का कारोबार बॉक्स ऑफिस पर किया था। इसके बाद आमिर ने भी लाइन से तो नहीं लेकिन रंगीला रिलीज होने के पहले तक 10 फ्लॉप फिल्मे दे डाली थीं। दिल के बाद आमिर के करियर में राम गोपाल वर्मा निर्देशित रंगीला ही ऐसी दूसरी फिल्म बनी जिसकी कमाई बॉक्स ऑफिस पर दहाई के करोड़ अंको वाली रही।
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महेश भट्ट की एक और हॉलीवुड कॉपी फिल्म
अगर आपने हैरीसन फोर्ड और टॉमी ली जोन्स की फिल्म फ्यूजिटव देखी है तो आप समझ सकते हैं कि महेश भट्ट की फिल्म क्रिमिनल निर्देशक एंड्र्यू डेविस की फिल्म द फ्यूजीटिव से कितना मेल खाती है। महेश भट्ट को एक समय में हॉलीवुड फिल्मों की कहानियां मारने में उस्ताद माना जाता था और उन्होंने कभी इसे गलत भी नहीं माना। अनौपचारिक बातचीत में वह कहते थे, हमारा दिमाग चीजों को बस रिसाइकिल करता रहता है। जो भी ये समझता है कि वह कुछ ओरीजनल लिख या बना रहा है, वह सच से भाग रहा है। महेश भट्ट की फिल्म दिल है कि मानता नहीं को इट हैपन्ड वन नाइट, राज को व्हाट लाइज बिनीथ, सड़क को टैक्सी ड्राइवर और गुमराह को बैंकॉक हिल्टन की अनऑफीशियल रीमेक माना जा सकता है। इनमें से ओरीजनल और इसकी हिंदी कॉपी की तुलना करें तो दोनों फिल्मों के तमाम सीन भी एक जैसे मिलते हैं।
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मेहुल कुमार का मास्टर स्ट्रोक
क्रांतिवीर अपने समय के लिहाज से एक बेहद बेधड़क फिल्म मानी जाती है। ये वह समय था जब देश में हर रोज किसी न किसी भ्रष्टाचार की खबर अखबारों में आ ही जाती थी। बाबरी मस्जिद का मसला भी सुर्खियों में चल ही रहा था। मेहुल ने एक बार बातचीत में बताया था कि कैसे उन्होंने बाबरी मस्जिद के बाद देश में बने तनाव के माहौल में कॉरपोरेट, नेता और अपराधियों का मायाजाल जोड़कर क्रांतिवीर का विचार तैयार किया था। फिल्म में रोमांस का एक ट्रैक वह शुरू से रखना ही चाहते थे। क्रांतिवीर जिस साल रिलीज हुई उसी साल सलमान खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म हम आपके हैं कौन ने कमाई का नया रिकॉर्ड बनाते हुए सौ करोड़ी क्लब की शुरुआत की थी, दूसरे नंबर पर उस साल कमाई के मामले में रही थी अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन व पूनम झावर की फिल्म मोहरा।
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जब अमिताभ बच्चन को पड़ा असली चांटा
अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म रेशमा और शेरा में विनोद खन्ना भी हैं, अमरीश पुरी भी हैं और राखी भी। सब तब हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत कर रहे थे और अपने प्रोडक्शन हाउस अजंता आर्ट्स में सुनील दत्त ने सबको उगने और लहराने की जगह भी दी और खाद पानी भी दिया। फिल्म की हीरोइन धी सुनील दत्त की फेवरिट अदाकारा वहीदा रहमान। वहीदा रहमान का फिल्म मुझे जीने दो का किस्सा तो आपको पता होगा कि कैसे एक सीन में वहीदा रहमान ने सुनील दत्त को दे दनादन तमाम चांटे असली वाले मारे थे। हुआ ये था कि सीन में पहला चांटा खाने के बाद सीन तो ओके हो गया लेकिन सुनील दत्त को लगा कि चांटा खाते समय उनकी आंखों का मिच जाना उनके किरदार को हल्का करता था। तो परफेक्शन के लिए वह तब तक चांटे खाते रहे जब तक कि गाल पर पड़े चांटे के वक्त उनकी दोनों आंखें खुली नहीं रहीं। ऐसा ही एक वाकया फिल्म रेशमा और शेरा का भी है, यहां चांटा खाने का नंबर लगा था अमिताभ बच्चन का।
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