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'पद्मावत' से पाबंदी हटाते वक्त क्या बोला सुप्रीम कोर्ट, आखिर क्यों हुआ ‘बैंडिट क्वीन’ का जिक्र

Fri, 19 Jan 2018 04:55 PM IST
इंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
इंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 19 Jan 2018 04:55 PM IST
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Supreme court CJI on Padmavat, if Bandit queen released why not This movie
संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ 25 जनवरी को पूरे देश में रिलीज होगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म दिखाए जाने पर कुछ राज्यों की पाबंदी खत्म कर दी है। इस संबंध में राजस्थान और गुजरात सरकारों की ओर से जारी आदेश और अधिसूचना पर भी रोक लगा दी गई है।
Supreme court CJI on Padmavat, if Bandit queen released why not This movie
- फोटो : self
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ रिलीज हो सकती है तो पद्मावत क्यों नहीं। 'सृजनात्मक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मारा नहीं जा सकता। कलात्मक आजादी का संरक्षण होना चाहिए। किसी फिल्म के खिलाफ इस तरीके से हो रहे प्रदर्शन को लेकर मैं आहत हूं। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम हो जाए और लोग उसे देखने न जाएं, लेकिन राज्य फिल्म के प्रदर्शन पर रोक नहीं लगा सकती। फिल्म से जुड़े कलाकारों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।'
Supreme court CJI on Padmavat, if Bandit queen released why not This movie
भाजपा शासित चार राज्यों ने राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले वायकॉम 18 और अन्य निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की ओर से रिलीज करने का सर्टिफिकेट मिल चुका है। ऐसे में राज्यों को इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने के लिए अधिसूचना जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसा होता है तो संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा।
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Supreme court CJI on Padmavat, if Bandit queen released why not This movie
राजस्थान, गुजरात और हरियाणा की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। इस फिल्म के रिलीज होने से कानून व्यवस्था की समस्या होगी। उन्होंने यह भी दलील दी कि सर्टिफिकेट देते समय सेंसर बोर्ड राज्यों की कानून व्यवस्था का ख्याल नहीं रखता। मेहता ने पीठ से गुहार की कि सुनवाई शुक्रवार या सोमवार तक के लिए टाल दी जाए, जिससे कि वह याचिकाकर्ता केदस्तावेजों को पढ़ सके और अदालत की मदद कर सके।
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राज्यों की ओर से तुषार मेहता ने दलील दी कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इतिहास से छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर किसी फिल्म में महात्मा गांधी को व्हिस्की पीते दिखाया जाता है तो कैसे बर्दाश्त किया जाएगा। इस पर साल्वे ने अदालत के सामने कोर्ट का डिस्क्लेमर पढ़कर सुनाया और कहा, ‘मैं तो चाहूंगा कि कलाकारों को इतिहास से भी छेड़छाड़ का अधिकार मिल जाए। वैसे गांधीजी को ऐसा करते दिखाना इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी।’ इस पर अदालत में मौजूद लोग हंस पड़े।
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