वर्ष 1948 में आई फिल्म 'प्यार की जीत' से दर्शकों का दिल जीतने वाली सुरैया को दरअसल प्यार में जीत नहीं मिली थी। इसी साल देवानंद के साथ रिलीज हुई उनकी फिल्म 'विद्या' के सेट पर देव साहब के साथ उनकी नजदीकी बढ़ीं, लेकिन वह कामयाब न हो सकी। देवानंद और सुरैया की 1949 में आई फिल्म 'जीत' में दोनों के प्यार को पूरा होने में केवल मुश्किलें आईं थीं, लेकिन हकीकत में यह प्रेम कहानी पूरी ही न हो पाई। सुपरस्टार देवानंद और पहली सिंगिंग सुपरस्टार रहीं सुरैया जमाल शेख एक-दूसरे के प्यार पागल थे। लेकिन, दोनों के प्यार के बीच धर्म की एक बड़ी सी दीवार खड़ी थी, जिसे तोड़ पाने में वे नाकाम रहे और अधूरे प्यार के साथ दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़े। आज भी जब सुरैया का जिक्र होता है तो देवानंद के साथ उनके प्यार के किस्से याद किए जाते हैं। आज सुरैया का जन्मदिन है। आइए जानते हैं उनके प्यार और जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से...
Suraiya Jamal: जब सुरैया ने समंदर में फेंक दी देवानंद की अंगूठी, बस इतनी-सी बात से खत्म हो गया दोनों का रिश्ता
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चार साल की मोहब्बत रह गई अधूरी
अभिनेत्री सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ था। उस समय वह एक साल की थीं, जब उनका परिवार मुंबई आ बसा। सुरैया मरीन ड्राइव स्थित कृष्ण महल में रहने लगी। बड़ी हुईं तो फिल्मी दुनिया में कदम रखा। अभिनय की इसी दुनिया में उनकी मुलाकात देवानंद से हुई। वही देवानंद, जिनके बारे में कहा जाता है कि लड़कियां उनके लुक की दीवानीं थीं और इस कदर दीवानी थीं कि उनके ऊपर काले रंग के कपड़े पहनने तक पर प्रतिबंध लग गया था। मगर, देवानंद तो दीवाने थे सुरैया के। दोनों 1948-51 तक चार साल एक-दूसरे के प्यार में रहे।
इस तरह शुरू हुआ प्यार का सिलसिला
देवानंद और सुरैया ने पहली बार साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म 'विद्या' में साथ काम किया था। उस समय वह जानी मानी अभिनेत्रीं थीं, जबकि देवानंद पैदल सेट पर जाते थे। मगर देवानंद में गजब का आत्मविश्वास था, इसी बात पर सुरैया उन्हें दिल दे बैठी थीं। देवानंद सुरैया के साथ फ्लर्ट करते थे और ऐसे ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया। एक बार सुरैया ने देवानंद से पूछा कि तुम क्या देख रहे हो? इस पर देव ने कहा- 'तुम में कुछ। तुम्हारी नाक खूबसूरत तो है, लेकिन थोड़ी लंबी है।' इस पर सुरैया ने अपनी नाक को छूते हुए कहा 'आप सही कहते हैं'। इसके बाद देवानंद ने उनका नाम 'नोजी' रखा। तो वहीं सुरैया ने उनका नाम स्टीव रखा। सुरैया ने अपने एक मनपसंद नॉवेल के हीरो के नाम पर देवानंद का नाम स्टीव रखा था। बताया जाता है कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सुरैया की नांव पलट गई थी और देवानंद ने उनकी जान बचाई थी।
समुद्र में फेंक दी थी देवानंद की अंगूठी
सुरैया और देवानंद एक-दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे। मगर, जैसे ही सुरैया की नानी को इसकी भनक लगी तो विरोध शुरू हो गया। सुरैया की नानी को मजहब के चलते उनका और देवानंद के साथ यह रिश्ता पसंद नहीं आया। नानी सुरैया पर नजर रखने के लिए हमेशा उनके साथ रहती थीं। एक बार नानी को कुछ काम के लिए घर जाना पड़ा तो देव मौका देखकर उनके मेकअप रूम में चले गए। इस दौरान देवानंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज करते हुए उन्हें एक अंगूठी दे दी। लेकिन जब सुरैया की नानी को यह बात पता चली तो वह बहुत नाराज हुईं और गुस्से में उन्होंने देवानंद की दी हुई अंगूठी को समंदर में फिकवा दिया। इसके बाद दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। यहां तक कि दोनों का पर्दे पर साथ दिखना भी उन्हें पसंद नहीं था। देवानंद की ऑटोबायोग्राफी 'रोमांसिंग विथ लाइफ' में लिखा है कि उस जमाने में देव साहब ने सुरैया को तीन हजार रुपये की हीरे की अंगूठी दी थी, जिसे सुरैया ने समुद्र में फेंक दिया था।
नरगिस-मुधबाला के सामने फीकी पड़ गई थी प्रसिद्धि
सुरैया जमाल शेख अपने जमाने में एक बड़ा नाम था। उन्होंने कम उम्र में ही एक्टिंग शुरू कर दी थी। साल 1936 में उनकी फिल्म 'मैडम फैशन' रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने बाल कलाकार के रूप में काम किया। इसके बाद साल 1941 में उन्होंने फिल्म 'ताज महल' में काम किया और मुमताज महल का रोल प्ले किया। 1936 से 1963 तक वह हिंदी सिनेमा में सक्रिय रहीं। 1940 के दशक में वह इंडस्ट्री की सबसे चर्चित अदाकाराओं में शुमार थीं। मगर, हर सितारे की प्रसिद्धि में ढलान का दौर आता है। ऐसा ही सुरैया के साथ हुआ। मधुबाला और नरगिस ने सुरैया की शोहरत को प्रभावित किया। फिल्मों की बात करें तो 1936 से 1963 तक सुरैया ने करीब 67 फिल्मों में काम किया था और करीब 338 गाने गाए थे।