स्वरा भास्कर अच्छी अभिनेत्री ही नहीं, बेहद मुखर ढंग से अपनी बात कहने वाली महिला भी हैं। उनके विरोधियों को लगता है कि वह लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए विवादों का हिस्सा बनती हैं परंतु स्वरा मानती हैं कि आज तर्क खत्म हो रहा है, गुस्सा और नफरत उसकी जगह ले रहे हैं। पिछले दिनों 'वीरे दी वेडिंग' में स्वरा की भूमिका पर सवाल उठे। सफलताए सिनेमा और समाज पर स्वरा भास्कर से रवि बुले की विशेष बातचीत...
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स्वरा भास्कर ने 'इज्जत' और 'पैसे' को लेकर किया खुलासा, कहा- अब फिल्मों को लेकर रखूंगी खास ख्याल
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 15 Jun 2018 08:10 PM IST
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Swara Bhaskar
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स्वरा भास्कर
-बीते दो-एक वर्षों की सफलता के बाद आप खूब व्यस्त हैं। पिछले दिनों भाग-भाग कर अलग-अलग शहरों में तीन-तीन शिफ्टों में शूटिंग करती रहीं। मेहनत रंग ला रही है?
-हां मैं ज्यादा काम कर रही हूं। मुझे लगता है कि 'निल बटे सन्नाटा' ने मेरी जिंदगी बदल दी। करियर में भी इससे मदद मिली। किसी भी आर्टिस्ट को हमेशा चिंता रहती है कि क्या काम ठीक चल रहा है पहचान मिल रही है या नहीं यह चिंता 'निल बटे सन्नाटा' और 'अनारकली ऑफ आरा' ने मेरे लिए खत्म कर दी। दोनों के किरदार बहुत खास थे और मुझे ऐक्टिंग की अलग-अलग विस्तृत रेंज में काम करने का मौका मिला। इन्होंने इंडस्ट्री में मेरी पहचान बनाई।
-माना जाए कि इन फिल्मों ने आपके लिए पहचान का संकट खत्म कर दिया?
-बिल्कुल। ऐसे रोल ऐसी फिल्में एक अस्तित्व देती हैं कि आप दूसरे सफल ऐक्टरों के साथ खड़े हो सकें। हम बड़े स्टार्स से मिल सकते हैं कि चलिए आपने बड़ा काम किया मगर हमने भी कुछ खास चीजें कीं। मैंने छोटे-छोटे साइड रोल करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। मुझे लगता है कि मेरे समय में नवाजुद्दीन सिद्दिकी भी ऐसे ही ऐक्टर हैं।
-हां मैं ज्यादा काम कर रही हूं। मुझे लगता है कि 'निल बटे सन्नाटा' ने मेरी जिंदगी बदल दी। करियर में भी इससे मदद मिली। किसी भी आर्टिस्ट को हमेशा चिंता रहती है कि क्या काम ठीक चल रहा है पहचान मिल रही है या नहीं यह चिंता 'निल बटे सन्नाटा' और 'अनारकली ऑफ आरा' ने मेरे लिए खत्म कर दी। दोनों के किरदार बहुत खास थे और मुझे ऐक्टिंग की अलग-अलग विस्तृत रेंज में काम करने का मौका मिला। इन्होंने इंडस्ट्री में मेरी पहचान बनाई।
-माना जाए कि इन फिल्मों ने आपके लिए पहचान का संकट खत्म कर दिया?
-बिल्कुल। ऐसे रोल ऐसी फिल्में एक अस्तित्व देती हैं कि आप दूसरे सफल ऐक्टरों के साथ खड़े हो सकें। हम बड़े स्टार्स से मिल सकते हैं कि चलिए आपने बड़ा काम किया मगर हमने भी कुछ खास चीजें कीं। मैंने छोटे-छोटे साइड रोल करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। मुझे लगता है कि मेरे समय में नवाजुद्दीन सिद्दिकी भी ऐसे ही ऐक्टर हैं।
SWARA BHASKAR
-'निल बटे सन्नाटा' और 'अनारकली ऑफ आरा' के बाद क्या वैसी ही फिल्मों की स्क्रिप्ट्स आ रही हैं या कुछ बदला है?
-मुझे तो उल्टा लग रहा है। फिलहाल इन फिल्मों के बाद जो स्क्रिप्ट पढ़ रही हूं उसमें मुझे कमियां महसूस हो रही हैं क्योंकि मैं उन फिल्मों से तुलना कर रही हूं। सच कहूं तो अभी तक मैंने 'वीरे दी वेडिंग' के बाद कोई फिल्म साइन नहीं की। लेकिन हां वेब सीरीज के माध्यम में कुछ बहुत रोचक काम कर रही हूं। इसने नया स्पेस खोला है। यहां ऐसी फिल्में बनाई जा रही हैं जो बड़े पर्दे पर संभव नहीं है। यहां सेंसर का दबाव नहीं है। बॉक्स ऑफिस का दबाव नहीं है। मैं दो-तीन वेब प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रही हूं जहां केंद्रीय भूमिका में हूं।
-तो फिल्मों का क्या होगा?
-अब बहुत ध्यान से फिल्में करूंगी क्योंकि जो पहचान मिली है दर्शकों का विश्वास मिला है कि स्वरा है तो फिल्म के कुछ मायने होंगे वह मैं खोना नहीं चाहती। पैसे और शोहरत तो हम कमाते रहते हैं इज्जत मुश्किल से मिलती है। अगर वो मिली है तो संभाल कर रखनी चाहिए ऐसा मेरा मानना है।
-मुझे तो उल्टा लग रहा है। फिलहाल इन फिल्मों के बाद जो स्क्रिप्ट पढ़ रही हूं उसमें मुझे कमियां महसूस हो रही हैं क्योंकि मैं उन फिल्मों से तुलना कर रही हूं। सच कहूं तो अभी तक मैंने 'वीरे दी वेडिंग' के बाद कोई फिल्म साइन नहीं की। लेकिन हां वेब सीरीज के माध्यम में कुछ बहुत रोचक काम कर रही हूं। इसने नया स्पेस खोला है। यहां ऐसी फिल्में बनाई जा रही हैं जो बड़े पर्दे पर संभव नहीं है। यहां सेंसर का दबाव नहीं है। बॉक्स ऑफिस का दबाव नहीं है। मैं दो-तीन वेब प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रही हूं जहां केंद्रीय भूमिका में हूं।
-तो फिल्मों का क्या होगा?
-अब बहुत ध्यान से फिल्में करूंगी क्योंकि जो पहचान मिली है दर्शकों का विश्वास मिला है कि स्वरा है तो फिल्म के कुछ मायने होंगे वह मैं खोना नहीं चाहती। पैसे और शोहरत तो हम कमाते रहते हैं इज्जत मुश्किल से मिलती है। अगर वो मिली है तो संभाल कर रखनी चाहिए ऐसा मेरा मानना है।
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स्वरा भास्कर
- फोटो : ani
-आप इज्जत की बात कर रही हैं लेकिन 'वीरे दी वेडिंग' में जिन गालियां और अश्लील संदर्भों की आलोचना हुई उनका कैसे बचाव करेंगी?
-मुझे लगता है कि समाज में बहुत चीजें गलत हो रही हैं जिन्हें देखे-सुधारे जाने की ज्यादा जरूरत है। जिनका बहुत गलत असर पड़ रहा है। बच्चियों के रेप धर्म से जुड़ रहे हैं फिर हमारे विधायक रेपिस्टों का बचाव कर रहे हैं। धर्म के नाम पर दंगे-फसाद हो रहे हैं। लोगों को जिंदा जलाया जा रहा है। समाज में अब ऐसे लोग हैं जो नाथूराम गोडसे के नाम में जी लगाते हैं और गांधी जी की हत्या को जायज ठहराते हैं। समाज पर इन बातों का ज्यादा गलत असर पड़ता है बनिस्बत इसके कि एक फिल्म में कुछ लड़कियां सेक्स की बातें कर रही हैं या थोड़ी बहुत गालियां दे रही हैं।
-मगर इससे संदेश यही जाता है कि सिनेमा समाज के सामने गलत उदाहरण पेश कर रहा है?
-किसी को ऐसा लगता है तो यह उसकी सोच की कमी है। पिछले दिनों 'पद्मावत' देख कर संजय लीला भंसाली को मैंने जो खुला पत्र लिखा तो उससे पैदा हुई प्रतिक्रियाओं से मुझे पता चला कि आज 2018 में कई लोग हैं जो सती प्रथा और जौहर को अच्छा मानते हैं। जबकि सन 1836 से 1860 तक कई लोगों ने इसके खिलाफ आंदोलन करके इसे प्रतिबंधित और गैर-कानूनी घोषित कराया था।
-मुझे लगता है कि समाज में बहुत चीजें गलत हो रही हैं जिन्हें देखे-सुधारे जाने की ज्यादा जरूरत है। जिनका बहुत गलत असर पड़ रहा है। बच्चियों के रेप धर्म से जुड़ रहे हैं फिर हमारे विधायक रेपिस्टों का बचाव कर रहे हैं। धर्म के नाम पर दंगे-फसाद हो रहे हैं। लोगों को जिंदा जलाया जा रहा है। समाज में अब ऐसे लोग हैं जो नाथूराम गोडसे के नाम में जी लगाते हैं और गांधी जी की हत्या को जायज ठहराते हैं। समाज पर इन बातों का ज्यादा गलत असर पड़ता है बनिस्बत इसके कि एक फिल्म में कुछ लड़कियां सेक्स की बातें कर रही हैं या थोड़ी बहुत गालियां दे रही हैं।
-मगर इससे संदेश यही जाता है कि सिनेमा समाज के सामने गलत उदाहरण पेश कर रहा है?
-किसी को ऐसा लगता है तो यह उसकी सोच की कमी है। पिछले दिनों 'पद्मावत' देख कर संजय लीला भंसाली को मैंने जो खुला पत्र लिखा तो उससे पैदा हुई प्रतिक्रियाओं से मुझे पता चला कि आज 2018 में कई लोग हैं जो सती प्रथा और जौहर को अच्छा मानते हैं। जबकि सन 1836 से 1860 तक कई लोगों ने इसके खिलाफ आंदोलन करके इसे प्रतिबंधित और गैर-कानूनी घोषित कराया था।
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swara bhaskar
-क्या सिनेमा आसान टारगेट है
-इंग्लिश में जिसे सिटिंग डक कहते हैं हमारी फिल्म इंडस्ट्री वही है कि भाई आओ और अपने किसी भी घटिया मुद्दे पर हमारे सामने अपना रौब झाड़ो। हमें कोई सरकार प्रोटेक्शन नहीं देती जबकि हम कितना टैक्स भरते हैं। हर राह चलते ऐरे-गैरे के प्रति हमारी जवाबदारी है। उन्हें अपनी फिल्में दिखानी होंगी। यह दादागिरी है। फिल्म इंडस्ट्री के साथ बहुत ज्यादती होती है।
-क्या आप पॉलिटिक्स में आएंगी
-अभी तो नहीं।
-जिन बातों के खिलाफ हम हैं तो उन्हें बदलने के लिए मुख्यधारा की राजनीति में आने की जरूरत है। सिर्फ बातों से क्या यह संभव है?
-मैं पूर तरह सहमत हूं इस बात से। मुझे लगता है कि घर पर रह कर शिकायतें करने से बढ़कर है कि सड़क पर उतरो। निश्चित ही मैं पब्लिक लाइफ में बड़ा रोल निभाना चाहती हूं। शायद अभी सही समय नहीं है मेरे लिए और मेरी उम्र भी कम है। मुझे लगता कि अभी मुझे समाज को लेकर अपनी सोच बढ़ाने की जरूरत है।
-उम्र का क्या है देश में कई युवा नेता हैं
-मैं इस बारे में धीरे-धीरे सोच रही हूं। जैसे मैं बोरिया-बिस्तर लेकर मुंबई आ गई थी और यहां मुझे कोई नहीं जानता था इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता था। शायद एक दिन मैं वैसे ही दिल्ली भी जाऊंगी।
-इंग्लिश में जिसे सिटिंग डक कहते हैं हमारी फिल्म इंडस्ट्री वही है कि भाई आओ और अपने किसी भी घटिया मुद्दे पर हमारे सामने अपना रौब झाड़ो। हमें कोई सरकार प्रोटेक्शन नहीं देती जबकि हम कितना टैक्स भरते हैं। हर राह चलते ऐरे-गैरे के प्रति हमारी जवाबदारी है। उन्हें अपनी फिल्में दिखानी होंगी। यह दादागिरी है। फिल्म इंडस्ट्री के साथ बहुत ज्यादती होती है।
-क्या आप पॉलिटिक्स में आएंगी
-अभी तो नहीं।
-जिन बातों के खिलाफ हम हैं तो उन्हें बदलने के लिए मुख्यधारा की राजनीति में आने की जरूरत है। सिर्फ बातों से क्या यह संभव है?
-मैं पूर तरह सहमत हूं इस बात से। मुझे लगता है कि घर पर रह कर शिकायतें करने से बढ़कर है कि सड़क पर उतरो। निश्चित ही मैं पब्लिक लाइफ में बड़ा रोल निभाना चाहती हूं। शायद अभी सही समय नहीं है मेरे लिए और मेरी उम्र भी कम है। मुझे लगता कि अभी मुझे समाज को लेकर अपनी सोच बढ़ाने की जरूरत है।
-उम्र का क्या है देश में कई युवा नेता हैं
-मैं इस बारे में धीरे-धीरे सोच रही हूं। जैसे मैं बोरिया-बिस्तर लेकर मुंबई आ गई थी और यहां मुझे कोई नहीं जानता था इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता था। शायद एक दिन मैं वैसे ही दिल्ली भी जाऊंगी।