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चापलूस कहने पर आया स्वरा भास्कर को गुस्सा, कंगना रनौत को इस तरह दिया जवाब

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Tue, 21 Jul 2020 10:25 PM IST
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Swara Bhasker hits back on Kangana Ranaut debate over feminism in the Indian film industry
स्वरा भास्कर - फोटो : Social Media

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत इन दिनों बॉलीवुड की कुछ हस्तियों पर जमकर बरस रही हैं। अपने हालिया इंटरव्यू में उन्होंने तापसी पन्नू, ऋचा चड्ढा और स्वरा भास्कर को निशाने पर लिया था। उन्होंने तापसी और स्वरा को बी ग्रेड अभिनेत्री बताते हुए उन्हें चापलूस कहा था। कंगना के इस बयान पर तापसी पन्नू ने पलटवार किया था। अब स्वरा भास्कर ने भी कंगना को खरी-खोटी सुनाई है।

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स्वरा भास्कर का ट्वीट - फोटो : Social Media

स्वरा भास्कर ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने कंगना पर निशाना साधा। स्वरा ने लिखा, '1955 में ‘पाथेर पांचाली’ के साथ कंगना जी ने समानांतर सिनेमा चलाया, 2013 में क्वीन फिल्म के साथ फेमिनिज्म शुरू किया, पर इन सबसे पहले 1947 में उन्होंने भारत को आजादी दिलवाई थी, कहत एक अज्ञात चापलूस जरूरतमंद, आउटसाइडर, चापलूसी का फल (आम) खाते और उंगलियां चाटते हुए।'

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कंगना रनौत - फोटो : Social Media

स्वरा को जवाब देते हुए कंगना रनौत की टीम ने लिखा, 'आप में से कोई भी भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग में पैदा नहीं हुआ था, गैंगस्टर्स माफियाओं और डांस इंडस्ट्री पर कब्जा कर लिया गया था। नारीवाद और समानांतर सिनेमा का जागरण क्वीन 2014 के साथ हुआ था। अगर हम गलत हैं तो हमें सही करें, बताएं क्या हुआ था?'

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स्वरा भास्कर - फोटो : Twitter

इसके जवाब स्वरा भास्कर ने लिखा, 'कंगना जी और उनकी टीम 1955 में सत्यजीत रे की 'पाथेर पांचाली' को समानांतर सिनेमा का आगाज माना जाता है। उनके साथ मृणाल सेन और ऋत्विक घटक इस सिनमा के अभिभावक माने जाते हैं। 70 के दशक में न्यू वेव सिनमा आया (मणि कौल, कुमार शाहणी, सईद मिर्जा, श्याम बेनेगल, कुंदन शाह अन्य) साथ-साथ मध्य सिनेमा में साई परांजपे जी इत्यादि। फारुक शेख सर, दीप्ति नवल जी, अमोल पालेकर साहब यादगार चेहरे हैं। 2000 के बाद के बदलते बॉलीवुड सिनमा में मैं पीपली लाइव, भेजा फ्राई, खोसला का घोंसला को पैरेलल स्पेस में मानती हूं। क्वीन (2013) मेरे लिए मेन्स्ट्रीम फिल्म थी।'
 

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स्वरा भास्कर

एक और ट्वीट में स्वरा ने लिखा, 'तनु वेड्स मनु के साथ आपने, आनंद राय और हिमांशु शर्मा ने कॉमर्शियल मेनस्ट्रीम बॉलीवुड को एक नया रूप दिया। क्वीन समानांतर सिनेमा नहीं। रही बात फेमिनिस्ट फिल्मों की तो इंग्लिश विंगलिश (2012), क्वीन से पहले आई थी। श्रीदेवीजी और गौरी शिंदे को श्रेय मिलना चाहिए।'
 

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