हम सभी कही ना कही चाहते हैं कि 90 का दशक वापस आ जाये। कितना सही वक्त था ना वो? जब कोई गैजेट्स, मोबाइल फोन, ऑनलाइन क्लासेस नहीं होती थी। पढ़ाई सिर्फ स्कूल में होती थी और हमें किसी ऑनलाइन क्लास को लेकर कोई चिंता नहीं होती थी। आज के समय में सोशल मीडिया का भी क्रेज लोगों के सिर पर चढ़ा हुआ है, उस वक्त सोशल मीडिया क्या होता है किसी को मालूम भी नहीं था। हम बच्चे स्कूल जाते थे और एक लंबी लाइन लगती थी प्रेयर और फिर क्लास टीचर के आने पर हम सब एक साथ चिल्लाते थे 'गुड मॉर्निंग मैम'। 90 के दशक में जो लोग भी थे उन्हें आज भी वही साधारण सा समय ज्यादा आसान लगता होगा। तो आज हम आपकी 90 दशक की कुछ पुरानी यादें ताजा करने जा रहे हैं। अगर आप 90 के दशक वाले बच्चे होंगे तो आप उससे खुद को जुड़ा हुआ जरूर पाएंगे।
90 के दशक की ये यादें हो जाएंगी ताजा: जब साथ देखते थे 'शक्तिमान' और करते थे 'कट्टी'
कट्टी
आज अगर बच्चों में लड़ाई होती है तो वो बस बात करना बंद कर देते हैं। लेकिन उस वक्त जब हम लोग लड़ाई करते थे, तो उसका एक तरीका होता था। हम अपनी छोटी उंगली उठाते थे और कहते थे 'अट्टी-बट्टी सात जनम की कट्टी'। याद आया, कुछ ऐसा ही होता था ना।
रामायण...
वो वक्त याद है जब रामायण के टाइम के लिए घर में सब काम खत्म कर लिये जाते थे और सब एक साथ बैठ जाते थे दूरदर्शन पर आने वाले रामायण को देखने। पूरा परिवार एक साथ दो ही धारावाहिकों को साथ में देखना था एक था रामायण और दूसरा महाभारत। लेकिन ये टाइम पिछले साल लॉकडाउन के दौरान वापिस लौट कर आया था। जब सभी ने एक साथ रामायण देखी थी।
कलरफुल पॉपिन्स
नहीं मुझे रेड वाली चाहिए, नहीं मुझे वो वाली चाहिए। अरे पॉपिन्स पर होने वाली लड़ाई याद है। जो सेम कलर की पॉपिन्स लेने पर हुआ करती थी। जब हमें हमारी पसंद की पॉपिन्स मिल जाया करती थी तो जैसे सारे जहां की खुशियां हमारे पास होती थी। अब हम पॉपिन्स को लोग भूलकर किंडर जॉय पर आ गए।
झूला झूलना
90 के दशक में मेलों का भी काफी चलन था। जिसमें बड़े वाले, नाव वाले और ड्रैगन वाले झूले आते थे। जो झूलने भी होते थे। सभी लोग जिद किया करते थे हमें बड़ा वाला झूला ही झूलना है।
