मिथुन का मतलब क्या होता है, उनसे पूछिए जो 40 साल पहले सिनेमा देखने लायक हो चुके थे। मोहल्लों के शोहदे नानचाकू बेल्ट की जगह फंसाकर घूमते थे। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के बाद किसी हीरो के बालों का स्टाइल लड़कों ने अपनाया तो वह थे मिथुन चक्रवर्ती। उनके जैसी राउंड नेक शर्ट और उनकी ही तरह का बेल बॉटम।
बाइस्कोप: आज ही के दिन रिलीज हुई थी मिथुन की फिल्म 'वारदात', जेम्स बॉन्ड ने की थी गन मास्टर की तारीफ
डिस्को डांसर से पहले की हिट फिल्म
मृगया में अभिनय का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले पांच साल हो चुके थे। अमिताभ बच्चन की फिल्म दो अनजाने में झलक दिख चुकी थी। सुरक्षा, तराना, हम पांच भी रिलीज हो चुकी थीं और मिथुन चक्रवर्ती बन चुके थे गरीब फिल्म निर्माताओं के अमिताभ बच्चन। मिथुन पर उन दिनों किस्मत मेहरबान थी लेकिन दुनियाभर में जिमी जिमी जिमी, आजा आजा आजा, गूंजना अभी बाकी था। राज कपूर की फिल्मों के बाद रूस में डिस्को डांसर का जमाना आना बाकी था। डिस्को डांसर की रिलीज से कोई डेढ़ साल पहले रिलीज हुई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म वारदात।
जासूसी फिल्मों वाले रविकांत
तो आज हमने बाइस्कोप में चुनी है फिल्म 'वारदात'। रविकांत नागाइच की वारदात। एनटी रामाराव की फिल्म श्री सीता राम कल्याणम में सिनेमैटोग्राफर के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले रविकांत ने हिंदी में बतौर निर्देशक फिल्म फर्ज से कदम रखा और जीतेंद्र को इस फिल्म में उन्होंने बनाया जेम्स बॉन्ड स्टाइल का जासूस। रविकांत के रचे एजेंट 116 यानी जासूस गोपाल का रोल धर्मेंद्र ने फिल्म कीमत में किया और इसी एजेंट 116 के रोल में जीतेंद्र फिर लौटे गोपाल कृष्ण पांडे बनकर फिल्म रक्षा में। लेकिन मिथुन को रविकांत नागाइच ने बनाया जासूस गन मास्टर जी 9 जिसका आम जिंदगी में नाम है गोपीनाथ।
24 अप्रैल 1981 को रिलीज हुई इस स्पाई थ्रिलर फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, काजल किरण, शक्ति कपूर, कल्पना अय्यर आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म सुरक्षा की ही रीमेक थी वारदात। जैसे जीतेंद्र के पैर फिल्म फर्ज ने कमर्शियल सिनेमा में जमाए, वैसे ही फिल्म सुरक्षा से मिथुन चक्रवर्ती को कमर्शियल सिनेमा में जगह बनाने में मदद मिली।
कहानी वैज्ञानिकों की साजिश की
फिल्म सुरक्षा की सीक्वल वारदात की कहानी फिल्म की रिलीज के हिसाब से थोड़ा अलग रही। बड़े बड़े टिड्डे फसलों पर हमला करते हैं। सरकार को शक होता है कि यह काम किसी आतंकी ग्रुप का है। मामले का पर्दाफाश करने के लिए गन मास्टर जी 9 को काम पर लगाया जाता है यह छानबीन उसे भारत में दबे-छुपे ऐसे वैज्ञानिकों की ऐसी अंधेरी दुनिया में ले जाती है जो प्रकृति को हानि पहुंचाकर दुनियाभर में अंधेरा करने में सक्षम है। अब गोपीनाथ इन वैज्ञानिकों से या उनकी खोजों से कैसे निपटता है? इसके लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी। वैसे वैज्ञानिकों की करतूतों का हिसाब किताब होता हुआ तो आपने ज्यादातर हॉलीवुड फिल्मों में ही देखा होगा। वारदात हिंदी सिनेमा की उन मुट्ठी भर फिल्मों में से एक है जिसमें वैज्ञानिकों का टेढ़ा मेढ़ा काम दिखाया है।
एक साल में 12 फिल्में
लॉकडाउन के इस दौर में यह फिल्म रासायनिक आक्रमणों से होने वाली क्षति और उनसे बचाव के रास्ते बताने के साथ उनसे लड़ने की हिम्मत भी देने का काम करती है। यह फिल्म जिस साल रिलीज हुई उसी वर्ष मिथुन चक्रवर्ती की 12 फिल्में सिनेमाघरों में आईं। समीरा, घमंडी, मैं और मेरा हाथी, कलंकिनी कनकावती, आंखों के सामने, जीने की आरजू, हमसे बढ़कर कौन, धुआं, लापरवाह, वारदात, साहस और बेशक की इस लिस्ट में तीन फिल्मों लापरवाह, वारदात और साहस को रविकांत नागाइच ने ही निर्देशित किया। ये वो दौर था जब कलाकार दोनों हाथों से फिल्में बटोरते थे और एक एक हीरो एक बार में 20-25 फिल्में साइन कर लेता था। इसी के चलते आगे चलकर फिल्मों की भी सीलिंग लगानी पड़ी और निर्माताओं की संस्थाओं को नियम बनाने पड़े कि कोई हीरो एक बार में 11 फिल्मों से ज्यादा फिल्में नहीं करेगा।
