देश- विदेश में कोरोना वायरस के चलते सिनेमा ठप हो गया है। न तो किसी कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है और न ही किसी फिल्म की शूटिंग , वहीं कोई नई फिल्म भी रिलीज नहीं हो रही है। ऐसे में अमर उजाला अपने दर्शकों को सिनेमा के पुराने किस्सों से रूबरू करवा रहा है। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज आपको बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं की लिस्ट में शुमार पृथ्वीराज कपूर के बारे में बताएंगे।
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किस्से: भारत की पहली बोलती फिल्म में पृथ्वीराज ने किया था कमाल, 'मुगल-ए-आजम' के लिए मिली थी इतनी फीस
Fri, 17 Apr 2020 08:23 AM IST
Avinash Pal
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avinash Pal
Updated Fri, 17 Apr 2020 08:23 AM IST
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पृथ्वीराज कपूर
- फोटो : पृथ्वी थिएटर
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Prithviraj Kapoor
- बॉलीवुड अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर, 1906 को मौजूदा पाकिस्तान के लायलपुर की तहसील समुंद्री में हुआ था। वह तीन साल के थे जब मां का निधन हो गया, आठ साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्कूली नाटक में हिस्सा लिया।
- पढ़ाई के साथ ही साथ उनका नाटकों के लिए भी लगाव बढ़ता गया। पेशावर के एडवर्ड कॉलेज से बैचलर की डिग्री लेने तक पृथ्वीराज का नाटकों से लगाव बढ़ गया था। जिसके चलते वो लाहौर आ गए लेकिन उनके पढ़े लिखे होने की वजह से उन्हें किसी भी नाटक मंडली में काम नहीं मिला।
prithviraj kapoor
- लाहौर में सफलता हाथ नहीं लगने के बाद पृथ्वीराज 1929 के सितंबर में बंबई (मुंबई) आ गए और इंपीरियल फिल्म कंपनी में बिना वेतन के एक्स्ट्रा कलाकार बन गए। इसके बाद पृथ्वीराज ने भारत की पहली बोलती फिल्म आलमआरा में 1931 में 24 साल की उम्र में अलग-अलग आठ दाढ़ियां लगाकर जवानी से बुढ़ापे तक की भूमिका निभाई। इन किरदारों के साथ ही पृथ्वीराज ने अपनी एक्टिंग का लोहा साबित कर दिया।
- 1960 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जिसके बिना हिंदी सिनेमा अधूरा माना जाता है। 'मुगल-ए-आजम' में अकबर के किरदार के साथ पृथ्वीराज ने अभिनय का ऐसा शाहकार रचा जिसकी आज भी मिसाल दी जाती है। पृथ्वीराज ने दिलीप कुमार और मधुबाला से भी ज्यादा वाहवाही लूटी थी।
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Prithviraj Kapoor
- बता दें कि 'मुगल-ए-आजम' बनने में काफी विलंब हो रहा था, कई वजहें थी, जिसकी चर्चा होती रहती थी। जिसमें एक वजह ये भी थी कि फिल्म में स्टारकास्ट में पृथ्वीराज का नाम पहले आने वाला था और ऐसा कहा जाता था कि इसको लेकर दिलीप कुमार और मधुबाला में एक तरह से नाराजगी भी थी।
- जब इस बारे में पृथ्वीराज को पता लगा तो उन्होंने फिल्म के निर्देशक के आसिफ को कहा था, 'क्यों छोटे मोटे झगड़ों में फंसकर फिल्म लटका रहे हो। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, इन दोनों के नाम मुझसे पहले और बड़े अक्षरों में लिख दो।' इस पर आसिफ ने जवाब में कहा था, 'दीवानजी, मैं मुगल-ए-आजम बना रहा हूं, सलीम-अनारकली नहीं। यह बात इन दोनों में से किसी को समझ नहीं आती। मेरी इस फिल्म का केवल एक हीरो है और वो है अकबर द ग्रेट।'
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prithviraj kapoor
- 'मुगल-ए-आजम' में पृथ्वीराज की फीस का भी एक मजेदार किस्सा है। दरअसल के आसिफ पृथ्वीराज को अनुबंध के तौर पर एक कोरा चेक दिया तो पृथ्वीराज ने कहा, '"जहां इतना कुछ लिखा है, वहां रक़म भी लिख देते।' इस पर के आसिफ ने कहा, 'तो यह बताइए इसमे कुल रकम कितनी लिखूं।' इसके बाद पृथ्वीराज ने कहा, 'क्या तुम नहीं जानते।' तो के आसिफ ने कहा, 'जानता तो पूछता नहीं।'
- के आसिफ का जवाब सुनकर पृथ्वीराज कपूर ने कहा, 'अच्छा तो फिर कोई रकम लिख लो, मुझे मंजूर होगा।' जिस पर के आसिफ ने कहा, 'नहीं दीवानजी, ऐसा मत कहिए। सबने अपनी कीमत लगाई। दिलीप कुमार, मधुबाला, दुर्गा खोटे फिर आप क्यों..?' ये सुनकर पृथ्वीराज बोले- 'नहीं मेरी कीमत तुम खुद लगाओगे।मैं भी तो अभी तक अपनी कीमत नहीं लगा पाया।'