सिनेमा समाज का दर्पण होता है। यह बात अक्सर कही-सुनी जाती है। अक्सर समाज में घट रहीं चीजों को पर्दे पर इसलिए भी दिखाया जाता है, ताकि लोग सीधे तौर पर उन्हें समझ सकें। ऐसा ही कुछ नोटबंदी के साथ हुआ। 8 नवंबर 2016 का वह दिन याद होगा, जब रात आठ बजे अचानक नोटबंदी की घोषणा हुई थी। नोटबंदी एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, सरकार के नोटबंदी के फैसले की संवैधानिक वैधता पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया। अदालत ने केंद्र और आरबीआई को 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले पर 9 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। बता दें कि नोटबंदी से आम जन-जीवन काफी प्रभावित हुआ था। बैंक से लेकर एटीएम तक लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी थीं। उस वक्त के ऊपर फिल्में भी बन चुकी हैं। आइए जानते हैं...
Movies on Demonetisation: नोटबंदी के हालात को बयां करती हैं ये फिल्में, देखकर याद आ जाएगा 2016 का वक्त
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'कैश'
नोटबंदी पर बनी यह फिल्म नवंबर 2021 में रिलीज हुई थी। बता दें कि यह एक कॉमेडी फिल्म है। इसमें अमोल पाराशर, काविन दवे, स्वानंद किरकिरे, स्मृति कालरा और गुलशन ग्रोवर लीड रोल में नजर आए। फिल्म में एक ऐसे सपने देखने वाले लड़के की कहानी दिखाई गई, जो अपना खुद का बिजनेस करना चाहता है, लेकिन वह दो बार फेल हो चुका है। ऐसे में नोटबंदी के एलान के बाद उसे मौका मिलता है और वह पुराने नोटों को ठिकाने लगाने का बिजनेस शुरू करता है। इस फिल्म को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देखा जा सकता है।
'चोक्ड: पैसा बोलता है'
फिल्म 'चोक्ड' कहानी नोटबंदी यानी डिमोनेटाइजेशन पर आधारित है। फिल्म निम्न मध्यम परिवार की कहानी दिखाती है। कहानी बैंक में काम करने वाली महिला सरिता पिल्लई की है, जो अपने बेरोजगार पति और बेटे के साथ वन रूम अपार्टमेंट में रहती है। सरिता के चॉक्ड सिंक की पाइप से प्लास्टिक में बंधी नोट की गड्डियां निकलने लगती हैं और कहानी इसी के साथ कई ट्विस्ट लेते हुए आगे बढ़ती है। यह नेटफ्लिक्स पर उपबल्ध है।
'पुतन पनम'
मम्मूटी की फिल्म 'पुतन पनम' 2017 में रिलीज हुई थी। इस मलयालम क्राइम थ्रिलर को रंजीत ने निर्दशित किया है और इसमें बैजू, मामूक्कोया, हरीश पेरूमन्ना लीड रोल में हैं। इस फिल्म की कहानी काले धन और नोटबंदी को लेकर बुनी गई है। इसे आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं।
'शून्योता'
नोटबंदी की पृष्ठभूमि पर आधारित बांगला फिल्म शून्यता में नोटबंदी के दौरान आम लोगों को हुई परेशानी को दिखाया गया है। फिल्म के कई सीन्स पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी थी। फिल्म का निर्देशन शुवेंदु घोष ने किया था।