मशहूर पंजाबी लोक गायिका गुरमीत बावा का रविवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 77 वर्ष की थीं। पारिवारिक मित्र भूपिंदर सिंह संधू से मिली जानकारी के मुताबिक उन्होंने शहर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। संधू ने बताया कि, "सांस लेने में कठिनाई की शिकायत के बाद उन्हें शनिवार शाम अस्पताल ले जाया गया था।" पंजाबी लोक गायक कृपाल बावा की पत्नी गुरमीत बावा लगभग 45 सेकंड के लिए अपने लंबे 'हेक' के लिए जानी जाती थीं। हालांकि, वह तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने दूरदर्शन पर परफॉर्म करना शुरू किया। वह राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल पर प्रदर्शित होने वाली पहली पंजाबी महिला गायिका थीं।
पंजाब के गुरदासपुर जिले के कोठे गांव में साल 1944 में जन्मी गुरमीत बावा पंजाब के लोक गीत जुगनी को गाकर पूरे देश में लोकप्रिय हो गई थीं। अपने करियर के दौरान, गुरमीत बावा को पंजाब सरकार द्वारा राज्य पुरस्कार, पंजाब नाटक अकादमी द्वारा संगीत पुरस्कार, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय देवी अहिल्या पुरस्कार और पंजाबी भाषा विभाग द्वारा शिरोमणि गायिका पुरस्कार सहित कई पुरस्कार से नवाजा गया।
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गुरमीत बावा
- फोटो : सोशल मीडिया
गायक के निधन पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने दुख व्यक्त किया है। चन्नी ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, "गुरमीत बावा जी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध और दुखी हूं। पंजाबी लोक संगीत में उनका योगदान अमिट है। मेरी संवेदना, विचार और प्रार्थना उनके परिवार के साथ है।"
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वहीं, उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और उच्च शिक्षा भाषाविज्ञान मंत्री परगट सिंह ने भी प्रख्यात लोक गायक के निधन पर दुख व्यक्त किया। एक बयान में, रंधावा ने कहा कि गुरमीत बावा ने "अपनी भावपूर्ण और मधुर आवाज से खुद के लिए एक जगह बनाई और आधी सदी से ज्यादा समय तक पंजाबी लोक संगीत की सेवा की।"
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गुरमीत बावा
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शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर ने भी बावा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होने ट्वीट किया, महान पंजाबी गायिका श्रीमती गुरमीत बावा जी के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि। पंजाबी संगीत उद्योग में उनके योगदान और उपलब्धियों को हमेशा याद किया जाएगा। गुरु साहिब दिवंगत आत्मा को शांति और परिवार के सदस्यों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
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गुरमीत बावा
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इसके अलावा हरसिमरत ने कहा, अनुभवी गायक गुरमीत बावा जी के निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। शिरोमणि गायिका पुरस्कार विजेता को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पंजाबी लोक का महिमामंडन करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। महापुरूष कभी नहीं मरते, वे अपने कार्यों में जीते रहते हैं। उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना।