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Tuesdays & Fridays Movie Review: गायब दिखा भंसाली और टी सीरीज का मिडास टच, अपनी रिस्क पर देखें फिल्म

Fri, 19 Feb 2021 03:54 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 19 Feb 2021 03:54 PM IST
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Tuesdays & Fridays Movie Review by Pankaj Shukla Anmol Thakeria Dhillon Jhatleka Taranveer Bhansali
ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

Movie Review: ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज


कलाकार: अनमोल ठाकेरिया ढिल्लो, जटालिका मल्होत्रा, अनुराधा पटेल, निकी वालिया और प्रवीन डब्बास आदि।
निर्देशक: तरनवीर सिंह
निर्माता: संजय लीला भंसाली और भूषण कुमार आदि।
रेटिंग: *1/2


टी सीरीज की साल की दूसरी फिल्म ‘ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज’ उसी सिलसिले को आगे बढ़ाती नजर आ रही है जिसके तहत कंपनी ने ‘जुनूनियत’, ‘सनम रे’ और ‘यारियां’ जैसी फिल्में बनाईं। फिल्म ‘ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज’ के साथ निर्माता के तौर पर संजय लीला भंसाली का नाम भी जुड़ा है। लेकिन, इस फिल्म में ना तो भंसाली जैसा करिश्मा है और ना टी सीरीज की फिल्मों की परंपरा जैसा संगीत। फिल्म से दो नए सितारे अनमोल और जटालिका हिंदी सिनेमा में डेब्यू कर रहे हैं। जटालिका एक अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता की उप विजेता बनने के सात साल बाद परदे पर उतर पा रही हैं, ये तथ्य सौंदर्य प्रतियोगिताओं के गिरते स्तर और उनकी विजेता या उप विजेता युवतियों के लिए सिनेमा में बढ़ती मुश्किलों की तरफ भी इशारा करता है।

Tuesdays & Fridays Movie Review by Pankaj Shukla Anmol Thakeria Dhillon Jhatleka Taranveer Bhansali
ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज’ की कहानी न्यू मिलेनियल्स की सबसे बड़ी ‘चिंता’ पर फोकस करती है। हीरो लेखक है और जिसका उपन्यास बेस्ट सेलर हो चुका है। हीरोइन उभरती वकील है और जिंदगी खुलकर जीने में यकीन करती है। दोनों की निगाहें मिलती हैं। दिल भी जुड़ते हैं लेकिन दोनों को डर यही है कि कहीं इस रिश्ते का आयोडीन तो जल्द ही नहीं उड़ जाएगा। तो दोनों तय करते हैं कि प्रेमी वे सिर्फ मंगलवार और शुक्रवार को ही रहेंगे, हफ्ते के बाकी दिन वह दोस्तों की तरह गुजार देंगे। दोनों का अपना अपना पारिवारिक अतीत भी गढ़ा गया है ताकि बजरंग बली और संतोषी माता के दिनों में बंटे इस प्यार को कुछ आधार दिया जा सके।

Tuesdays & Fridays Movie Review by Pankaj Shukla Anmol Thakeria Dhillon Jhatleka Taranveer Bhansali
ट्यूजडेज एंड फ्राइडेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

निर्देशक तरनवीर कहते रहे हैं कि फिल्म ‘ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज’ उन्होंने कोई 10 साल पहले लिखनी शुरू की थी। अब तक कहानी के 15 ड्राफ्ट बनाने की बातें भी उन्होंने की है लेकिन, तरनवीर को इतना समय कहानी में लगाने के बीच एक दो राउंड देश के उन इलाकों के भी लगा लेने चाहिए थे जहां के युवाओं की बड़ी चिंता अब भी अपना करियर है और जिनके लिए युवावस्था का प्रेम उतनी बड़ी बात रहा नहीं जितना आमतौर पर हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है। फिल्म कहानी की पहली पायदान पर ही औंधे मुंह गिरती है। पटकथा फिल्म की और बेतरतीब है, यूं लगता है जैसे हैदराबादी वेज बिरयानी बनाने चला कोई शेफ तहरी पर आकर अटक गया। फिल्म की रफ्तार भी ऊबड़ खाबड़ है कभी ये रफ्ता रफ्ता चलती है तो कभी फुल स्पीड। बैकग्राउंड की कहानियां अगर कहनी हैं तो फिर उनको पकने का समय तो देना ही चाहिए।

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Tuesdays & Fridays Movie Review by Pankaj Shukla Anmol Thakeria Dhillon Jhatleka Taranveer Bhansali
ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अभिनय के लिहाज से फिल्म के लीड पेयर पर ज्यादा दबाव इस बात का दिखता है कि वह परदे पर ज्यादा से ज्यादा फ्रेश और खूबसूरत लग सकें। इस मामले में दोनों ने अपना काम सौ फीसदी कर भी दिखाया, लेकिन ये फिल्म है, कैटलॉग शूट नहीं। दोनों की कोई खास ट्रेनिंग या वर्कशॉप फिल्म की शूटिंग से पहले हुई हो, फिल्म देखकर तो नहीं लगता। जटालिका को परदे पर आने में वैसे ही काफी देर हो चुकी है और उनके लिए अब ज्यादा समय बचा नहीं है। अनमोल एक फिल्म निर्माता और एक अभिनेत्री के बेटे हैं तो वह अगर अपने अभिनय पर मेहनत कर ले गए तो उनको अभी मौके और भी मिलने हैं। फिल्म में चरित्र भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों ने बेहतर काम किया है। खासतौर से निकी वालिया का काम यहां तारीफ के काबिल है।

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Tuesdays & Fridays Movie Review by Pankaj Shukla Anmol Thakeria Dhillon Jhatleka Taranveer Bhansali
ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म ‘ट्यूजडेज एंड फ्राईडेज’ की सबसे कमजोर कड़ी है इसका संगीत। दो नए चेहरों को लॉन्च करने के लिए बनी एक प्रेम कहानी का संगीत ही फिल्म को हाइप दिलाता है। तरनवीर को कम से कम ये बात ‘मैंने प्यार किया’ की कामयाबी से ही सीख लेनी चाहिए थी। भूषण कुमार और संजय लीला भंसाली जैसे कानसेन और तानसेन के होते हुए भी फिल्म का संगीत इतना कमजोर क्यों है, ये दोनों ही बता सकते हैं। फिल्म तकनीकी रूप से भी औसत ही है और इसको आखिर तक देखने का हौसला बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।

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