अभिनय में तमाम कोशिशों के बाद भी लंबी पारी न खेल पाए उदय चोपड़ा को इस बात का कभी अभिमान नहीं रहा कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस यशराज फिल्म्स के अपने भाई आदित्य चोपड़ा के बराबर के वारिस हैं। वह दिल के राजा हैं। देश में गांजे के सेवन को वैध बनाने के अपने सुझावों को लेकर मुंबई पुलिस के निशाने पर आए उदय की अभिनेत्री नरगिस फाखरी के साथ पांच साल तक चली प्रेम कहानी पर पूरी एक फिल्म बन सकती है। लेकिन, दिल के मामले में उदय जैसे भी हो, दिमाग के मामले में उनका अब भी कोई जोड़ नहीं है। यशराज फिल्म्स में वह शांति से अपना काम करते हैं। और, कम लोग ही जानते हैं कि इस प्रोडक्शन कंपनी का जितना भी तकनीकी विकास बीते एक दशक में हुआ है, उसके पीछे पूरा दिमाग उदय का ही रहा है।
Uday Chopra: नरगिस फाखरी से मोहब्बत, मुंबई पुलिस से पंगा, और जानिए क्या हुआ जब बात बिपाशा को गले लगाने की आई..
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उदय चोपड़ा की शख्सियत को और करीब से समझने के लिए ‘अमर उजाला’ ने फिल्म 'मेरे यार की शादी है', 'धूम' और 'धूम 2' में उदय को निर्देशित कर चुके संजय गढवी से बात की। संजय बताते हैं, ‘उदय चोपड़ा बहुत सज्जन इंसान है। इतना शरीफ, भोला और शांत इंसान मैने अपने पूरे करियर में कभी नहीं देखा। उनका सेट पर ऐसा बर्ताव रहता था कि कभी ऐसा नहीं लगा कि वह यशजी के बेटे और आदित्य चोपड़ा के भाई है। काम के प्रति पूरी तरह समर्पित, किसी तरह का किसी बात कोई गुमान नहीं और जरूरत पड़ जाए तो सेट पर कोई भी काम करने को तैयार रहते हैं उदय।’
उदय चोपड़ा को बतौर अभिनेता आदित्य चोपड़ा ने फिल्म 'मोहब्बतें' में लांच किया। 'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में वह आदित्य के सहायक थे। जुगल हंसराज के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्यार इंपॉसिबल' और 'नील एंड निक्की' में भी उदय ने खुद को एक अभिनेता के तौर पर मांजने की पूर कोशिश की। उनको करीब से जानने वाले बताते हैं कि उदय को स्टार बनने की तमन्ना कभी नहीं रही। वह बस अच्छा अभिनय करना चाहते थे और इसके लिए वह हमेशा सीखने को तैयार रहते थे।
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संजय गढवी ने ‘धूम’ सीरीज के लिए उदय चोपड़ा का जो अली नामक किरदार गढ़ा, उसकी शख्सीयत को रचने का किस्सा भी काफी रोचक है। ये एक मुंबइया टपोरी सरीखा किरदार है, कुछ कुछ वैसा ही जैसा ‘तेजाब’ में अनिल कपूर और ‘रंगीला’ में आमिर खान का किरदार। संजय बताते हैं, ‘उदय की पूरी परवरिश बहुत नफासत के साथ हुई है। टपोरी भाषा और उनके जैसा डील डौल वह अपना पाएंगे, यही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। तो मैंने अपने एक परिचित आसिफ भाई को एक दिन यशराज फिल्म्स के दफ्तर बुलाया। आसिफ भाई बांद्रा के गेयटी, गैलेक्सी थियेटर के आसपास काफी मशहूर हैं। आसिफ को उदय के साथ बिठाकर मैं बहाने से वहां निकल गया। दोनों घंटे भर बातें करते रहे। मैं लौटकर आया तब तक उदय को समझ आ चुका था कि मुझे उनके किरदार के लिए क्या चाहिए।’
लंबे समय तक हॉलीवुड में यशराज फिल्म्स का वितरण का काम देखते रहे उदय चोपड़ा फिर से मुंबई में रहकर ही काम करने लगे हैं। यशराज फिल्म्स के लोग बताते हैं कि उदय को तकनीक की भी बहुत जानकारी है। यशराज फिल्म्स में जितनी भी तकनीकी चीजें हैं सबका सेटअप उन्होंने ही किया। संजय गढवी कहते हैं, ‘यशराज फिल्म्स को कारपोरेट कंपनी बनाने में उदय का बहुत बड़ा हाथ रहा है। दुनिया को ऐसा लगता है कि आदित्य चोपड़ा ही यशराज फिल्म्स के मुखिया है, लेकिन कंपनी का जितना भी तकनीकी विस्तार हुआ है वह सब उदय चोपड़ा ही संभालते हैं।’
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