90 के दशक के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक रहे दीपक तिजोरी की जिंदगी और उनका करियर दोनों ही बहुत उतार और चढ़ाव से गुजरे हैं। एक समय तो ऐसा था जब दीपक फिल्मों का जाना माना चेहरा हुआ करते थे लेकिन बाद में उनसे सभी ने दूरी बना ली। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब अक्षय कुमार, अजय देवगन और सुनील शेट्टी जैसे कलाकार अपनी जगह बनाने में लगे हुए थे उससे पहले दीपक एक कलाकार के रूप में स्थापित हो चुके थे। आइए, आज हम उनके करियर और जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से आपके साथ साझा करते हैं।
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आमिर खान के साथ रंगमंच के साथी
दीपक का फिल्मों में रुझान शुरुआत से नहीं था। दरअसल, उन्होंने जब अपनी पढ़ाई खत्म की तो वह सिनैब्लिट्ज मैगजीन में काम करने लगे। इस मैगजीन में काम करते-करते उनका फिल्मों में काम करने वाले लोगों से मिलना जुलना होता रहा। यहीं से उनकी इच्छा जगी कि क्यों न वह भी अभिनय में हाथ आजमाएं। तब वह एक शौकिया थियेटर ग्रुप का हिस्सा बने। इस ग्रुप के सदस्य पहले से ही आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर, परेश रावल और विपुल शाह जैसे लोग थे। रंगमंच पर अपनी कला दिखाते हुए दीपक टीवी के कुछ धारावाहिकों में भी काम करते रहे।
निर्माताओं के लिए घंटों किया इंतजार
दीपक जिस समय रंगमंच पर अपना जौहर दिखाते हुए टीवी धारावाहिकों में काम कर रहे थे, उसी समय उनके साथ थिएटर करने वाले कलाकार फिल्मों में भी हाथ आजमा रहे थे। तब दीपक ने भी सोचा कि क्यों न वह भी फिल्में करें। उन्होंने फिल्म निर्माताओं के ऑफिस के चक्कर लगाना शुरू कर दिए। एक इंटरव्यू में खुद दीपक ने बताया है कि उन्हें किसी भी फिल्म निर्माता से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता। अगर कुछ दिनों तक धूल फांकने के बाद किसी फिल्म में कोई किरदार मिल भी जाता तो वह बहुत ही बेकार या फिर छोटा होता था। यह प्रक्रिया उन्हें शुरुआत के तीन साल तक करनी पड़ी। संजय दत्त और सनी देओल की फिल्म 'क्रोध' में उन्हें एक किरदार मिला जिसमें उन्हें दिखाया तो कई बार गया लेकिन बोलने के लिए पूरी फिल्म में सिर्फ एक ही संवाद था। दीपक ने पाया तो कुछ नहीं लेकिन यहां से उनकी शुरुआत हो गई थी।
महेश भट्ट ने दिया मौका
दीपक के पास काम तो नहीं था लेकिन धीरे-धीरे दोस्त काफी बना लिए थे उन्होंने। उनके एक दोस्त आफताब गिल ने उन्हें बताया कि जाने-माने फिल्म निर्माता और निर्देशक महेश भट्ट एक फिल्म बना रहे हैं जिसमें उन्हें एक सेकेंड लीड की जरूरत है। दीपक को लगा कि परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन इसके लिए ऑडिशन तो देना ही चाहिए। दीपक ने इस फिल्म के लिए अपना ऑडिशन दिया और महेश भट्ट को दीपक का काम बहुत पसंद आया। यह फिल्म थी 'आशिकी'। इस फिल्म के लिए दीपक को महेश ने चुन लिया। यह फिल्म सुपरहिट रही और दीपक को भी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिल गई। महेश भट्ट दीपक से काफी प्रभावित थे इसलिए उन्होंने दीपक को अपनी अगली फिल्म 'सड़क' में भी काम दिया। इसके अलावा उन्होंने एक छोटा सा किरदार अपनी फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' में भी दीपक को दिया।
अक्षय को हराकर जीता ये रोल
यह किस्सा मंसूर खान की फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' का है। मंसूर खान अपनी इस फिल्म के लिए ऑडिशन ले रहे थे। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के लिए तो आमिर खान का चुनाव हो चुका था। अब उन्हें इसमें एक सेकेंड लीड की जरूरत थी। इस किरदार के लिए भी बहुत से लोगों ने ऑडिशन दिया जिसमें अभिनेता अक्षय कुमार भी शामिल थे। इसके लिए दीपक तिजोरी ने भी अपना ऑडिशन दिया। जब मंसूर ने सबके ऑडिशन देखे तो उन्होंने फैसला किया कि फिल्म में इस भूमिका के लिए दीपक तिजोरी ही फिट हैं, अक्षय कुमार का ऑडिशन उन्हें अच्छा नहीं लगा। यही दीपक तिजोरी बाद में अक्षय कुमार की फिल्म 'खिलाड़ी' में भी सेकेंड लीड करते नजर आए।