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Usha Mangeshkar EXCLUSIVE: दीदी बोलीं ऐसा क्या है ‘जय संतोषी मां’ में, मुझे भी दिखाओ, और फिर घर ही बन गया...

Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Thu, 15 Dec 2022 11:28 AM IST
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Usha Mangeshkar EXCLUSIVE interview with amar Ujala jai santoshi maa mungda aplam chaplam lata mangeshkar
लता मंगेशकर, उषा मंगेशकर, आशा भोसले और उनकी बहन - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

पार्श्वगायिका उषा मंगेशकर के बारे में कम लोग ही ये जानते हैं कि गायन उनका पहला प्रेम कभी रहा ही नहीं, वह तो चित्रकार बनना चाहती थीं। ‘दीदी’ लता मंगेशकर के कहने पर वह गायन क्षेत्र में आईं और उनके गाए भक्ति गीत ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की’ ने हिंदी सिनेमा के गीतों में कालजयी दर्जा हासिल कर लिया। बिना किसी प्रचार प्रसार के रिलीज हुई फिल्म ‘जय संतोषी मां’ इतनी लोकप्रिय हुई कि लता मंगेशकर ने इसे देखने की इच्छा जाहिर की, और उनके लिए घर पर ही इस फिल्म को दिखाने की व्यवस्था की गई। अपने जन्मदिन पर ‘अमर उजाला’ से बातें करते हुए उषा मंगेशकर ने गायन में अपनी शुरुआत, संगीत के मशीनीकरण और फिल्मी गानों से लुप्त होती संगीत आत्मा पर खुलकर अपनी राय रखी है।

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अपने परिवार के साथ उषा मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

'जय संतोषी मां' के गीत 'मैं तो आरती उतारूं रे' आज भी काफी लोकप्रिय है, इस फिल्म को देखने के बाद लोगों ने शुक्रवार का व्रत रखना शुरु कर दिया था, आपके जीवन में इस फिल्म के बाद कोई बदलाव आया क्या?
ऐसा कोई रहन सहन में या फिर मेरी गायकी में तो बदलाव नहीं आया। कमाल की बात यह थी कि पहले कोई संतोषी मां का व्रत नहीं करता था और ना मैंने भी कभी इस बारे में सुना। फिल्म के रिलीज के बाद संतोषी मां में लोगों को अटूट विश्वास हो गया। सब नए लोगों ने मिलकर फिल्म बनाई और सबकी किस्मत पलट गई। फिल्म को ऐसी कामयाबी मिली कि किसी फिल्म को इतना कामयाब होते नहीं देखा।मैं कोई ‘दीदी’ (लता मंगेशकर) य़ा फिर आशा (भोसले) जितनी बडी गायिका नहीं हूं लेकिन अपनी जगह पर ठीक हूं। 
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उषा मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

इसी दिन 'शोले' भी रिलीज हुई थी,एक तरफ दीदी के गाए गीत तो दूसरी तरफ 'जय संतोषी मां' में आप के गीत। इन दोनों फिल्मों को लेकर दीदी से किस तरह की बातें होती थीं ?
दीदी ने मुझसे कहा कि ऐसा क्या है इस फिल्म में जिसकी इतनी चर्चा हो रही है, दिखाओ मुझे फिल्म। हमने घर पर ही फिल्म दिखाने की व्यवस्था कि क्योंकि थिएटर में उन्हें ले नहीं जा सकते थे। थिएटर में वह जातीं तो लोग उनको ही घूम घूमकर देखते। 'जय संतोषी मां' के मेकर ने फिल्म का प्रीमियर भी नही रखा था। फिल्म ऐसे ही रिलीज कर दी और फिल्म चल गई। इस तरह के चमत्कार सिर्फ एक ही बार होते हैं। 

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जय संतोषी मां - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

और ऐसे कौन से गीत हैं जो आप के दिल के बहुत करीब है और जिन्हें आप बार बार सुनती हैं?
मैं अपने कोई भी गाने नहीं सुनती हूं क्योंकि गाने सुनने के बाद मुझे लगता है कि इसे और बेहतर गा सकती थी। ऐसा बहुत सारे लोगों को लगता है। दीदी को भी ऐसा ही लगता था। जब मैं स्टेज शो में परफॉर्म करने जाती हूं तो अपने गाने लिख लेती हूं। 
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अपने परिवार के साथ उषा मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

'अपलम चपलम' जैसे कई गीत आपने लता दीदी के साथ गाए हैं। जब आप लता दीदी के साथ गाती थीं तो गाने को लेकर उनका किस तरह से सुझाव होता रहता था?
'अपलम चपलम' दीदी के साथ मेरा पहला गाना था। यह गाना फिल्म 'आजाद' का है जिसमें दिलीप कुमार, मीना कुमारी और प्राण जैसे बड़े सितारे थे। उस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर सी रामचंद्र थे। उन्होंने जब मुझे गाने का ऑफर दिया तो मैं गाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी। उस समय मैं नहीं गाती थी सिर्फ पेंटिंग करती थी। दीदी के साथ गाना था तो मुझे कोई चिंता ही नहीं थी अगर मैं नहीं गाती तो दीदी गा लेती। गाने को लेकर दीदी का यह सुझाव होता था कि जैसा गाती हो उसी तरह से गाओ। गाने की जो लाइंस मेरी समझ में नहीं आती थी उसे दीदी गा देती थीं। मैं घर में सबसे छोटी थी तो सब मुझे बहुत लाड प्यार करते थे। कभी कभी मैं बोलती थी सिर्फ एक ही लाइन गाऊंगी तो दीदी कहती थीं, ‘ठीक है एक ही लाइन गा दे, बाकी मैं गा दूंगी। दीदी का ऐसा प्यार था कि अपनी बहन को तकलीफ में नहीं देख सकती थीं।’

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