'क्वीन' फेम डायरेक्टर विकास बहल पर एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि फैंटम फिल्म्स को बंद करना पड़ा। अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी, मधु मंटेना और विकास बहल ने मिलकर फैंटम शुरू की थी। विकास पर दो साल पहले 2015 में महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था लेकिन उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं हुई। तनुश्री-नाना के बाद ये मामला फिर से उछला है।
अनुराग के बाद विकास बहल पर भड़के ये डायरेक्टर और राइटर, बोले- 'घिन आ रही है ऐसी जगह...'
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विकास बहल के बारे में महिला ने अनुराग कश्यप को पूरी बात बताई थी। जिसके बाद अब अनुराग कश्यप ने पूरे मामले में महिला से कुछ भी नहीं कर पाने की वजह से माफी मांगी है। बता दें कि महिला भी फैंटम फिल्म्स में काम करती थीं। अनुराग कश्यप के बाद अब लिरिक्स राइटर वरुण ग्रोवर और डायरेक्टर नीरज घेवन ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा की है। दोनों ही फैंटम फिल्म्स के कई प्रोजेक्ट में साथ काम करते रहे हैं।
'मसान' फेम डायरेक्टर नीरज घेवन ने ट्वीट कर लिखा कि 'विकास बहल पर लगे आरोप से घिन महसूस हो रही है। किसी कानूनी जटिलता को दिखाकर उसेे कंपनी से नहीं निकाला गया। यही वजह थी कि विकास बहल को दूसरी फिल्म बनाने का मौका मिल गया।'
My entire film career has shaped at Phantom Films. It has been a dream run. However, I have to share what I feel about the recent allegations that have come out. pic.twitter.com/QcNVoSggg3
नीरज घेवन ने आगे लिखा कि 'फिल्म के सदस्यों में महिलाओं की कमी की वजह से इस तरह के व्यवहार को मामूली बता दिया जाता है। मैं आगे से ऐसे किसी प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं करूंगा जहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न के अधिनियम के निर्देशोंं को लागू नहीं किया गया हो।'
वहीं लिरिसिस्ट और राइटर वरुण ग्रोवर ने ट्विटर पर लिखा कि 'मैं माफी मांगता हूं। बतौर राइटर और लिरिसिस्ट मैंने फैंटम के साथ कई प्रोजेक्ट में साथ काम किया है। मैं शर्मिंदा हूं कि वो महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल नहीं दे पाए। हम सब इसके लिए दोषी हैं कि वर्किंग प्लेस के लिए जो गाइडलाइन्स होते हैं उन्हें फॉलो नहीं किया गया। सभी पुरुषों की ये जिम्मेदारी है कि वो एक सुरक्षित माहौल बनाएं।'
It's a moral crime & I promise to introspect & learn from it, and will keep questioning the people in power and my friends (this time louder & clearer). What's the purpose of all the art we create if it's devoid of any moral centre. Sorry again.