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जब अमिताभ बच्चन ने एक ही रात में बदलवा दिया था राष्ट्रपति भवन का सालों पुराना नियम, जानें पूरा किस्सा

Sun, 28 Mar 2021 08:50 AM IST
शुभांगी गुप्ता एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभांगी गुप्ता Updated Sun, 28 Mar 2021 08:50 AM IST
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When Amitabh Bachchan Changed the Old Rule of Rashtrapati Bhawan Over a Night
अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके कार्यों की हमेशा ही सराहना की जाती है चाहे वह जनता के हित में हो या निजी स्तर पर किया गया हो। इसी बीच आइए हम आपको बताते हैं अमिताभ का वह कदम जिसने राष्ट्रपति भवन में सालों से चले आ रहे नियम को ही बदल दिया। न सिर्फ बदला बल्कि उसका जड़ से ही नामो-निशां मिटा दिया। दरअसल, यह बात साल 1983 की है जब अमिताभ  फिल्ममेकर टिनू आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं आजाद हूं’ की शूटिंग कर रहे थे। 

When Amitabh Bachchan Changed the Old Rule of Rashtrapati Bhawan Over a Night
अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया

‘मैं आज़ाद हूं’ में शबाना आजमी अमिताभ बच्चन के साथ मुख्य किरदार में नजर आई थीं। उससे कुछ समय पहले अमिताभ के राजनीति में आने को लेकर खूब चर्चे हुआ करते थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक दिन बात-बात में शबाना ने अमिताभ से एक सवाल पूछ डाला। शबाना पूछती हैं कि सांसद रहते हुए क्या आपने (अमिताभ) कोई बड़ा बदलाव किया है या कोई नया कानून बनाया हो। इसके जवाब में अमिताभ एक रोचक किस्सा सुनाना शुरू कर देते हैं।

When Amitabh Bachchan Changed the Old Rule of Rashtrapati Bhawan Over a Night
अमिताभ बच्चन - फोटो : instagram: amitabhbachchan

अमिताभ ने बताया कि एक बार उन्हें राष्ट्रपति भवन में डिनर के लिए आमंत्रित किया गया था। वो खाने की टेबल पर बैठे ही थे कि उनकी नजर सामने लगी प्लेट पर पड़ती है जिसे देखकर मन में थोड़ी निराशा होती है। सब लोग जिस प्लेट में खाना खा रहे थे या अब तक खाते आ रहे थे उस पर राष्ट्रीय प्रतीक यानी अशोक स्तंभ बना हुआ था। इसको देखकर उनके मन में कई सवाल उठे लेकिन उस दिन कुछ बोले नहीं। बाद में अमिताभ ने  संसद भवन में अपनी बात रखते हुए कहा कि खाने की प्लेट पर राष्ट्रीय प्रतीक का होना, उसका अपमान करना है। इसके कुछ ही दिन बाद एक कानून पारित हुआ, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि अब से खाने की प्लेट पर राष्ट्रीय प्रतीक नहीं होगा। 

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When Amitabh Bachchan Changed the Old Rule of Rashtrapati Bhawan Over a Night
शहंशाह में अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया

इसके तुरंत बाद अमिताभ शबाना से कहते हैं कि यह ख्याल उन्हें फिल्म ‘शहंशाह’ की शूटिंग के दौरान इंदर राज आनंद के साथ हुई बातचीत की वजह से आया था। अमिताभ और इंदर राज का यह किस्सा भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, शहंशाह फिल्म के निर्देशक भी इंजर राज के बेटे टिनू आनंद थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान एक दिन दोनों (अमिताभ और टिनू) में अनबन हो जाती है। सीन कुछ ऐसा था जिसमें अमिताभ को पुलिस की वर्दी पहनने के लिए कहा गया और वो वर्दी की जगह ब्लेजर पहनने की जिद्द पर अड़ जाते हैं। दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार ही नहीं था। इसके बाद अमिताभ ने कहा कि वो इंदर राज आनंद से बात करना चाहते हैं।

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When Amitabh Bachchan Changed the Old Rule of Rashtrapati Bhawan Over a Night
अमिताभ बच्चन - फोटो : Instagram/amitabhbachchan

बातचीत के दौरान इंदर राज और अमिताभ के सामने कचरे का डिब्बा रखा था। इंदर साहब ने उस कूड़ेदान की तरफ ईशारा किया और कहते हैं कि अमित तुम्हें ये डस्टबिन दिख रहा है? इसमें सफेद, केसरिया और हरे रंग के फटे-चिटे कपड़े पड़े हुए हैं। अगर इन कपड़ों को एक साथ सिल दिया जाए तो यह तिरंगा बन जाएगा और उस तिरंगे के लिए तुम अपनी जान भी देने को तैयार हो जाओगे। ठीक उसी तरह एक वर्दी को यदि कोई आम इंसान पहने तो यह एक मजबूत और ऐसा व्यक्ति के रूप में तब्दील कर देती है जिसके पास देशहित में कुछ कर दिखाने की ताकत हो। बस फिर क्या था अमिताभ पुलिस की वर्दी पहनकर बाहर आ जाते हैं। बाद में यही सीख राष्ट्रपति भवन के उस नियम को बदलने में कारगर साबित होती है।

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