तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे, जब कभी सुनोगे गीत मेरे...ये गाना मशहूर गायक मोहम्मद रफी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। दिग्गज गायक रफी साहब को कोई कभी नहीं भूला सकता। उनके गीत आज भी लोगों के जेहन में बसे हुए हैं। 'शहंशाह-ए-तरन्नुम' के नाम से मशहूर रफी साहब ने एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए। लेकिन आज हम आपको मोहम्मद रफी के एक गाने के पीछे की छिपी कहानी बताने जा रहे हैं। इस गाने को गाते हुए रफी साबह फूट-फूटकर रोने लगे थे। वहां मौजूद लोग भी हैरान कि उन्हें अचानक क्या हो गया, क्योंकि इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ था। तो आज हम आपको ये किस्सा बताने जा रहे हैं कि वो कौन सा गाना था जिसे गाते हुए दिग्गज गायक मोहम्मद रफी रोने लगे थे और ऐसा क्यों हुआ था। इसके अलावा भी रफी साहब से जुड़ी कुछ खास बातें हम आपको बताने जा रहे हैं।
'बाबुल की दुआएं' गाते हुए बच्चों की तरह रोने लगे थे मोहम्मद रफी, दो दिन बाद थी बेटी की विदाई
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लोगों के दिलों में अपनी कमाल की आवाज के दम पर जगह बनाने वाले मोहम्मद रफी ने कई हिट गाने दिए। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कॉन्सर्ट में गाने की अनुमति दी थी। साल 1948 में रफी साहब ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।
अगर रफी साहब की निजी जिंदगी की बात की जाए तो उन्होंने दो शादियां की थी। उन्होंने अपनी पहली शादी सबसे छिपा कर रखी थी। इस शादी के बारे में सिर्फ घरवाले ही जानते थे। यह बात शायद कभी सामने सामने नहीं आती अगर मोहम्मद रफी की बहू यास्मीन खालिद की एक किताब मार्केट में न आती। यास्मीन की प्रकाशित किताब 'मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में रफी की पहली शादी की बात का जिक्र किया गया होता।
इस किताब में यास्मीन ने लिखा है कि महज 13 साल की उम्र में मोहम्मह रफी ने पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से की थी। इस शादी से उनका बेटा सईद हुआ। लेकिन कुछ वक्त बाद दोनों अलग हो गए। इसके बास उन्होंने 20 साल की उम्र में दूसरी शादी बिलकिस के साथ की। रफी के घर में उनकी पहली पत्नी का जिक्र नहीं होता था क्योंकि उनकी दूसरी पत्नी बिलकिस बेगम उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। रफी की दूसरी शादी से उनके तीन बेटे खालिद, हामिद, शाहिद और तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद, यास्मीन अहमद हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है।
फिल्म 'नीलकमल' के सुपरहिट गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ को गाते समय रफी रो दिए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि गाने की रिकॉर्डिंग के ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने अपनी बेटी की सगाई की थी और दो दिन बाद उसकी शादी थी। बाद में इस गीत को नेशनल अवॉर्ड मिला था। अगर आपने इस गाने को ध्यान से सुना होगा तो आखिर में रफी साहब की आवाज में फर्क मालूम पड़ेगा और वो इसी वजह से हुआ था क्योंकि वो रोने लगे थे।

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