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मारधाड़ वाली वेब सीरीज़ के दीवानें क्यों हैं लोग, क्यों क्राइम में इतनी दिलचस्पी?
Mon, 07 Jan 2019 06:24 PM IST
विजय जैन
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 07 Jan 2019 06:24 PM IST
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web series 2018
- फोटो : amar ujala
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अपराध गुनाह है और इसकी सज़ा भी तय है। फिर भी इंसान गुनाह करता है। कई बार अपराध के बाद इंसान ख़ुद ही पशेमान हो जाता है और जुर्म क़ुबूल कर लेता है। लेकिन बहुत मर्तबा वो इतनी सफ़ाई से गुनाह करता है कि उसके निशान तक बाक़ी नहीं रहते। अपराध पर लगाम कसने वाली और अपराधी को पकड़ने वाली एजेंसियां भी घनचक्कर बनकर रह जाती हैं। मिसाल के लिए भारत की मशहूर मर्डर मिस्ट्री आरूषि के केस को ही लीजिए।
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- फोटो : netflix
इंसान की अपराध में दिलचस्पी शुरुआत से रही है। तभी तो साहित्य में भी इसे जगह मिली। अंग्रेजी में शरलॉक होम्स हों या उर्दू के इब्ने सफ़ी। इनकी लिखी कहानियों में ख़ालिस जुर्म का बखान होता था। लेकिन फिर भी लोग उसे ख़ूब चाव से पढ़ते थे। इनकी किताबों के मुख्य किरदार आम लोगों के लिए हीरो बन जाते थे। लोगों की इसी रुचि को बाज़ार ने भी ख़ूब भुनाया। यही वजह है कि आज एंटरटेनमेंट चैनल हों या न्यूज़ चैनल सभी जगह क्राइम का एक शो देखने को मिल ही जाता है।
यहां तक की एंटरटेनमेंट के नए प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो पर भी द सेक्रेड गेम्स और मिर्ज़ापुर या अपहरण जैसे सीरियल धूम मचाए हुए हैं। ये वही सीरियल हैं जो जुर्म की दुनिया को आम लोगों तक पहुंचाते हैं। दरअसल जुर्म पर आधारित साहित्य, फ़िल्म या सीरियल में दिखाई जाने वाली कहानियां कहीं ना कहीं असल ज़िंदगी में घटी घटनाओं से प्रभावित होती हैं।
दुनिया भर में ऐसी अनगिनत मर्डर मिस्ट्री, डकैती और अपहरण की घटनाएं हैं जो अनसुलझी हैं। आज जुर्म की ऐसी ही अनसुलझी पहेलियों की बात हम आपसे करेंगे। दुनिया की बड़ी मर्डर मिस्ट्री पर बीबीसी ने डेथ इन आइस वेली नाम का एक पॉडकास्ट किया था जिसमें द इस्डाल वुमेन की मर्डर मिस्ट्री सुलझाने की कोशिश की गई थी। ये घटना साल 1970 की थी।
यहां तक की एंटरटेनमेंट के नए प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो पर भी द सेक्रेड गेम्स और मिर्ज़ापुर या अपहरण जैसे सीरियल धूम मचाए हुए हैं। ये वही सीरियल हैं जो जुर्म की दुनिया को आम लोगों तक पहुंचाते हैं। दरअसल जुर्म पर आधारित साहित्य, फ़िल्म या सीरियल में दिखाई जाने वाली कहानियां कहीं ना कहीं असल ज़िंदगी में घटी घटनाओं से प्रभावित होती हैं।
दुनिया भर में ऐसी अनगिनत मर्डर मिस्ट्री, डकैती और अपहरण की घटनाएं हैं जो अनसुलझी हैं। आज जुर्म की ऐसी ही अनसुलझी पहेलियों की बात हम आपसे करेंगे। दुनिया की बड़ी मर्डर मिस्ट्री पर बीबीसी ने डेथ इन आइस वेली नाम का एक पॉडकास्ट किया था जिसमें द इस्डाल वुमेन की मर्डर मिस्ट्री सुलझाने की कोशिश की गई थी। ये घटना साल 1970 की थी।
mirzapur kaleen bhaiya
- फोटो : file photo
नॉर्वे में इस्डालिन वैली के पास एक महिला की जली हुई लाश मिली थी। उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे और अजीब सी चीजें उसके पास पड़ी थीं। बाद में पुलिस को एक जाली पासपोर्ट मिला लेकिन ये महिला कौन थी ये किसी को आज तक पता नहीं चल पाया। मीडिया ने इसे द इस्डाल वुमेन का नाम दिया। ये क़त्ल था या ख़ुदकुशी, ये भी आज तक पता नहीं चला।
2018 में नॉर्वे के खोजी पत्रकार मैरियट हिगराफ़ और डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म मेकर नाइल मैक्कार्थी ने भी इस केस को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसी तरह 2017 की ब्लॉकबस्टर पॉडकास्ट सीरीज़ है एस-टाउन। ये सीरीज़ जॉन बी।
मैक्लेमोर नाम के घड़ीसाज़ का दिलजस्प प्रोफ़ाइल है जिसका ताल्लुक़ अमरीका के अलाबामा से है। हालांकि इस सीरीज़ में मुख्य किरदार की बहुत सी निजी बातों को उसकी मर्ज़ी के बग़ैर लोगों तक पहुंचा दिया गया था।जिसके ख़िलाफ़ मैक्लेमोर ने कोर्ट में केस दाख़िल कर दिया था।
2018 में नॉर्वे के खोजी पत्रकार मैरियट हिगराफ़ और डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म मेकर नाइल मैक्कार्थी ने भी इस केस को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसी तरह 2017 की ब्लॉकबस्टर पॉडकास्ट सीरीज़ है एस-टाउन। ये सीरीज़ जॉन बी।
मैक्लेमोर नाम के घड़ीसाज़ का दिलजस्प प्रोफ़ाइल है जिसका ताल्लुक़ अमरीका के अलाबामा से है। हालांकि इस सीरीज़ में मुख्य किरदार की बहुत सी निजी बातों को उसकी मर्ज़ी के बग़ैर लोगों तक पहुंचा दिया गया था।जिसके ख़िलाफ़ मैक्लेमोर ने कोर्ट में केस दाख़िल कर दिया था।
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Sacred Games and Breathe
- फोटो : twitter
एस-टाउन ने एक कथित क़त्ल की छानबीन की थी और इस पॉडकास्ट की कामयाबी ने साबित कर दिया कि लोगों में जुर्म के क़िस्सों को सुनने की कितनी ललक है। इस पॉडकास्ट की कामयाबी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2017 से अब तक इसे 80 लाख बार डाउनलोड किया जा चुका है।
इसी तरह, इन द डार्क नाम के खोजी पत्रकारिता के पॉडकास्ट के पहले सीज़न में 11 साल के एक बच्चे के अपहरण की कहानी को बताया गया था जो मिनेसोटा में घर के बाहर साइकिल चलाते समय अग़वा कर लिया गया था।
दूसरे सीज़न में मिसिसिपी के कर्टिस फ्लावर्स नाम के एक शख़्स की कहानी बताई गई थी जिसने 1996 में एक फ़र्नीचर शॉप में चार मज़दूरों को मार डाला था। ये वही फ़र्नीचर शॉप थी जहां वो ख़ुद पहले काम कर चुका था। अमरीकी टेलीविज़न में द पीपल वी ओ।जे सिम्पसन नाम का क्राइम शो इतना पसंद किया गया कि वो प्राइम टाइम का सबसे ज़्यादा टीआरपी वाला शो बन गया।
नेटफ्लिक्स की मशहूर सीरीज़ मेकिंग अ मर्डरर का ज़िक्र हम कैसे भूल सकते हैं, जिसे क्राइम थ्रिलर का बेमिसाल शाहकार कहा जाता है। ये एक सच्ची घटना पर आधारित है जिसे फ़िल्म मेकर लॉरा रिकॉर्डी और मोइरा डेमोस ने बनाया था। कहानी में मुख्य किरदार स्टीवन अवेरी है जिसने एक ऐसे गुनाह के लिए 18 साल जेल में गुज़ारे जो उसने किया ही नहीं था।
इसी तरह, इन द डार्क नाम के खोजी पत्रकारिता के पॉडकास्ट के पहले सीज़न में 11 साल के एक बच्चे के अपहरण की कहानी को बताया गया था जो मिनेसोटा में घर के बाहर साइकिल चलाते समय अग़वा कर लिया गया था।
दूसरे सीज़न में मिसिसिपी के कर्टिस फ्लावर्स नाम के एक शख़्स की कहानी बताई गई थी जिसने 1996 में एक फ़र्नीचर शॉप में चार मज़दूरों को मार डाला था। ये वही फ़र्नीचर शॉप थी जहां वो ख़ुद पहले काम कर चुका था। अमरीकी टेलीविज़न में द पीपल वी ओ।जे सिम्पसन नाम का क्राइम शो इतना पसंद किया गया कि वो प्राइम टाइम का सबसे ज़्यादा टीआरपी वाला शो बन गया।
नेटफ्लिक्स की मशहूर सीरीज़ मेकिंग अ मर्डरर का ज़िक्र हम कैसे भूल सकते हैं, जिसे क्राइम थ्रिलर का बेमिसाल शाहकार कहा जाता है। ये एक सच्ची घटना पर आधारित है जिसे फ़िल्म मेकर लॉरा रिकॉर्डी और मोइरा डेमोस ने बनाया था। कहानी में मुख्य किरदार स्टीवन अवेरी है जिसने एक ऐसे गुनाह के लिए 18 साल जेल में गुज़ारे जो उसने किया ही नहीं था।
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Sacred Games
- फोटो : file photo
उस पर 25 साल की एक फ़ोटोग्राफ़र के क़त्ल का आरोप था। पहले सीज़न में अवेरी पर जुर्म साबित होने और डीएनए सबूतों की बुनियाद पर रिहा होने की कहानी है। अवेरी के साथ उसके भतीजे ब्रेंडन डेज़ी को भी सज़ा होती है जो कोर्ट में उसकी पैरवी कर रहा था।
जबकि दूसरे सीज़न में दोनों के परिवारों के उस दर्द को दिखाया गया है जिससे वो क़ानूनी प्रक्रिया के दौरान गुज़रे। टीवी समीक्षक जैक सील का कहना है कि जब हम सच्ची घटना पर आधारित कोई क्राइम डॉक्यूमेंट्री देखते हैं तो उसकी एक-एक डीटेल हमारे ज़हन में बैठती चली जाती है जो कि दिलचस्पी में इज़ाफ़ा करती है।
इसके अलावा टीवी में दिखाई जाने वाली कहानियों को अक्सर ऐसे मोड़ पर छोड़ा जाता है जहां से कहानी का कोई दूसरा और बहुत दिलचस्प पहलू आने वाला होता है। कहानी का यही मोड़ दर्शक में दिलचस्पी बनाए रहता है। इसके अलावा नई तकनीक ने भी इस तरह के कार्यक्रमों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने में मदद की है।
एमेज़न प्राइम वीडियो और नेटफ़्लिक्स जैसे ऑनलाइन माध्यमों की वजह से अब अगले एपिसोड के लिए हफ़्ते भर इंतज़ार नहीं करना पड़ता। अगर वक़्त हो तो पूरी सीरीज़ एक ही वक़्त में देखी जा सकती है। मेकिंग ऑफ़ मर्डरर की पहली पॉपुलर पॉडकास्ट सीरीज़ थी दिस अमेरिकन लाइफ़। 2014 में इस सीरीज़ को इतना डाउनलोड किया गया कि इसने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए। इस सीरीज़ में 1999 में बाल्टिमोर की एक छात्रा हे मीन ली के क़त्ल की कहानी को दिखा गया था। ली को उसके ही बॉयफ़्रेंड अदनान सैय्यद ने मौत के घाट उतारा था। इस सीरीज़ के बाद अदनान क़ानूनी शिकंजे में फंसा।
जबकि दूसरे सीज़न में दोनों के परिवारों के उस दर्द को दिखाया गया है जिससे वो क़ानूनी प्रक्रिया के दौरान गुज़रे। टीवी समीक्षक जैक सील का कहना है कि जब हम सच्ची घटना पर आधारित कोई क्राइम डॉक्यूमेंट्री देखते हैं तो उसकी एक-एक डीटेल हमारे ज़हन में बैठती चली जाती है जो कि दिलचस्पी में इज़ाफ़ा करती है।
इसके अलावा टीवी में दिखाई जाने वाली कहानियों को अक्सर ऐसे मोड़ पर छोड़ा जाता है जहां से कहानी का कोई दूसरा और बहुत दिलचस्प पहलू आने वाला होता है। कहानी का यही मोड़ दर्शक में दिलचस्पी बनाए रहता है। इसके अलावा नई तकनीक ने भी इस तरह के कार्यक्रमों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने में मदद की है।
एमेज़न प्राइम वीडियो और नेटफ़्लिक्स जैसे ऑनलाइन माध्यमों की वजह से अब अगले एपिसोड के लिए हफ़्ते भर इंतज़ार नहीं करना पड़ता। अगर वक़्त हो तो पूरी सीरीज़ एक ही वक़्त में देखी जा सकती है। मेकिंग ऑफ़ मर्डरर की पहली पॉपुलर पॉडकास्ट सीरीज़ थी दिस अमेरिकन लाइफ़। 2014 में इस सीरीज़ को इतना डाउनलोड किया गया कि इसने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए। इस सीरीज़ में 1999 में बाल्टिमोर की एक छात्रा हे मीन ली के क़त्ल की कहानी को दिखा गया था। ली को उसके ही बॉयफ़्रेंड अदनान सैय्यद ने मौत के घाट उतारा था। इस सीरीज़ के बाद अदनान क़ानूनी शिकंजे में फंसा।