एक सुंदर सा दिखने वाला युवक। किसी दूसरे के घर में रहने आया है। संगीत का पुजारी है। गाता अच्छा है। जिस घर में वह रहता है उसके मालिक की बेटी उस पर फिदा है। प्यार वह भी करता है। दोनों साथ जीने मरने की कसमें खाने का सपना पूरा कर पाएं उससे पहले घर के मालिक को इसका पता चल जाता है। सिंगर घर छोड़ने पर मजबूर होता है। बेटी की शादी उसकी मरजी के बगैर कहीं और हो जाती है। सुहागरात को प्रेम कहानी का खुलासा होता है तो पति अपनी ही पत्नी को उसके प्रेमी से मिलवाने की ठान लेता है। आप कहेंगे ये तो सलमान खान और ऐश्वर्या राय की फिल्म हम दिल दे चुके सनम की कहानी है, मैं कहूंगा ये 37 साल पहले रिलीज हुई फिल्म वो 7 दिन की भी कहानी है तो शायद आप हैरान रह जाएं। वो 7 दिन ही हमारे आज के बाइस्कोप की कहानी है।
बाइस्कोप: मिथुन ने कर दी होती हां तो अनिल कपूर कभी नहीं बन पाते प्रेम प्रताप पटियालेवाला और फिर...
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फिल्म वो 7 दिन की कहानी के इतने पेंच हैं कि आपको थोड़ा संक्षेप में समझाना जरूरी है। अनिल कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरे, नसीरूद्दीन शाह और मास्टर राजू स्टारर इस फिल्म की कथा सरिता और आगे जाकर जुड़ती है एक तेलुगू फिल्म से और उससे आगे जाकर एक तमिल फिल्म से। तमिल फिल्म को लिखा, बनाया और उसमें खुद अभिनय भी किया के भाग्यराज ने। इसे पहले तेलुगू और फिर हिंदी में बनाया प्रसिद्ध निर्देशक बापू ने। बापू की फिल्म निर्माता बोनी कपूर के साथ ये दूसरी फिल्म रही, इससे पहले बापू और बोनी कपूर ने बनाई थी हिट फिल्म हम पांच।
हम पांच हिट हुई तब तक ये कहानी बोनी कपूर के पास नहीं थी। बोनी और अनिल दोनों ने चेन्नई जाकर इस फिल्म का सौदा किया था। इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर की सुविधा तब होती नहीं थी और बताते हैं कि दोनों जितना पैसा साथ लेकर गए थे, वह फिल्म के रीमेक राइट्स खरीदने के लिए कम पड़ गया। गनीमत रही कि संजीव कुमार तब चेन्नई में ही अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे और उनके प्रोड्यूसर ने उनको उसी दिन भुगतान भी किया था। ये रकम बोनी कपूर के काम आई फिल्म वो 7 दिन की मूल तमिल फिल्म के रीमेक राइट्स खरीदने में। कहा ये भी जाता है कि शबाना आजमी ने भी बोनी कपूर की इस काम के लिए मदद की।
बोनी कपूर और अनिल कपूर फिल्म के राइट्स लेकर मुंबई तो आ गए और ये भी तय हो गया कि फिल्म को हिंदी में बनाना ही है। लेकिन, तब तक ये तय नहीं था कि फिल्म का हीरो कौन होगा। बोनी कपूर ऐसे फिल्म निर्माता रहे हैं जिन्होंने फिल्म मेकिंग अपने पिता सुरिंदर कपूर से सीखी है। लोग बताते हैं कि आज तक एक भी फिल्म ऐसी नहीं रही जिसमें बोनी का दिमाग लगा हो और फिल्म ने मुनाफा न कमाया हो। बोनी के इस गुणाभाग के चक्कर में ही फिल्म के हीरो अनिल कपूर बन गए हालांकि बोनी ने पहले तमाम कोशिशें की थीं इसे दूसरे अभिनेताओं के साथ बनाने की।
उस वक्त के लोग बताते हैं कि बोनी कपूर के पास हीरोइन पहले से साइन थी पद्मिनी कोल्हापुरे। ये फिल्म वह पद्मिनी कोल्हापुरे और मिथुन चक्रवर्ती के साथ बनाना चाहते थे। दोनों इसके पहले एक साथ स्वामी दादा में दिख तो चुके थे लेकिन किसी फिल्म के लीड पेयर में साथ आने का ये उनका पहला मौका होता। लेकिन मिथुन तब तक स्टार हो चुके थे और उनके पास फिल्म को इतनी लंबी लाइन लगी थी कि वह चाहकर भी बोनी को हां नहीं कह पाए। फिर संजीव कुमार का नाम भी सामने आया लेकिन उन पर सबकी सहमति नहीं बनी और इसके बाद जिस हीरो के नाम पर लंबा विचार चला वो थे रणधीर कपूर जिनकी फिल्म बीवी ओ बीवी उन दिनों खूब चर्चा में थी।
अनिल कपूर की हालत उन दिनों घर में छोरा गांव में ढिंढोरा वाली थी। वह चाहते थे ये रोल करना लेकिन बोनी से कह नहीं पा रहे थे। फिर फिल्म के डायरेक्टर बापू ने इसके लिए बात छेड़ी। रोल अनिल कपूर की उम्र और अनुभव के हिसाब से बड़ा था लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती समझा। खूब तैयारी की, खूब मेहनत की और बन गए प्रेम प्रताप पटियालेवाला। फिल्म में पहले प्रेम को यूपी के किसी शहर का होना था लेकिन अनिल को हरियाणवी बोलना ज्यादा आसान लगा हालांकि नाम के हिसाब से उनकी जुबान पंजाबी होनी चाहिए थी। लेकिन दिक्कतें अभी कहां खत्म होने वाली थी।
बोनी कपूर की पिछली फिल्म हम पांच की कमाई देखकर तमाम फाइनेंसर उनकी अगली फिल्म पर निगाहें जमाए बैठे थे। पद्मिनी कोल्हापुरे के बतौर हीरोइन साइन होने की खबरें भी उन तक पहुंच चुकी थी। सब इस गुंताड़े में थे कि प्रेमरोग और विधाता जैसी फिल्मों की हीरोइन की फिल्म में पैसा लगाकर उनके वारे न्यारे हो जाएंगे। लेकिन, जैसी ही बोनी ने ये एलान किया कि वो 7 दिन में पद्मिनी के साथ हीरो उनका छोटा भाई अनिल कपूर होगा, एक दो बड़े फाइनेंसर्स ने उनका फोन ही उठाना बंद कर दिया। लेकिन, बोनी ठहरे बोनी। भाई को हीरो बनाने के लिए कह दिया तो बस कह दिया। उन्होंने तमाम जुगाड़ लगाकर फिल्म का फोकस ठीक करने के लिए नसीरूद्दीन शाह से बात की।
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नसीर ठहरे उन दिनों के स्टार कलाकार। हम पांच वाले तो नसीर भी नहीं रहे थे। वह तब उमराव जान और बाजार जैसी फिल्मों में खेल रहे थे। शेखर कपूर की मासूम की भी शूटिंग शुरू हो चुकी थी। तो बोनी को नसीर ने पहली दफा तो मना ही कर दिया। लेकिन, बोनी ने समझा कि यहां माल लगाकर ही वह फिल्म से मुनाफा कमा सकते हैं तो उन्होंने नसीर से उनकी मंशा पूछ ली। नसीर को भी लगा कि इतनी फीस मांग लो जिसको सुनकर ये मना कर दें। पर बोनी ने नसीर के अपनी प्राइस बताते ही हां कर दी। अब नसीर मुकर नहीं सकते थे। और, बोनी ने फिल्म का जिओग्राफिया इसी के साथ सेट कर दिया। सुरिंदर कपूर प्रजेंट्स वो 7 दिन, स्टारिंग अनिल कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरे और नसीरुद्दीन शाह। साथ में निर्देशक बापू, गीतकार आनंद बक्षी, संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, सिनेमैटोग्राफी बाबा आजमी और एडीटर एन चंद्रा। एन चंद्रा ने आगे चलकर अनिल कपूर की एक और फिल्म मोहब्बत भी एडिट की और बाद में अनिल कपूर को सुपरस्टार बना देने वाली फिल्म तेजाब का निर्देशन भी किया।