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बिग बी बोले- हर बार मर्द गलत नहीं होता, कई बार औरतें भी फंसा देती हैं
अमित कर्ण, अमर उजाला, मुंबई
Updated Mon, 19 Sep 2016 08:43 PM IST
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अमिताभ बच्चन अपनी हालिया फिल्म पिंक को लेकर सुर्खियों में हैं। इस फिल्म में महिलाओं के अधिकारों की बात की गई है। अमिताभ फिल्म के जरिए महिलाओं के हक
अमिताभ बच्चन बोले, औरतें भी मर्दों को फंसाती हैं
मृत्युदंड बहस का मुद्दा है
अमिताभ बच्चन ने कहा कि मृत्युदंड पर बहस जारी है, उस पर कार्रवाई करना कानून का काम है। रेप की स्थिति दिखती है जबकि छेड़छाड़ तो इनविजिबिल सा होता है। उन्होंने कहा कि मृत्युदंड के मुद्दे पर दो-तीन तरह के विचार हैं। जब यह कहा जाता है कि किसी ने किसी का कत्ल कर दिया तो हत्यारे को फांसी पर लटका देना चाहिए।
''लिहाजा हत्यारे को गुनहगार साबित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। अदालत में तारीख पर तारीख मिलती रहती है। अपराधी के सिर पर मौत की तलवार झूलती रहती है। वह डर के साये में जीता रहता है कि कब उसकी फांसी की तारीख तय हो जाए?
कई बार केस दो-तीन साल लंबा खिंच जाता है। तब तक हर पल वह घुट-घुट कर मर रहा होता है। ऐसे में यह सजा क्या किसी हत्या से कम खतरनाक है? यह मेरी दलील नहीं है, पर एक तर्क अलग है। वह यह कहता है कि हत्यारे ने तो एक झटके में किसी को मार दिया। मरने वाले को मालूम पड़ने से पहले, लेकिन जब सिस्टम हत्यारे को सजा सुना चुका है। हत्यारे का मालूम है कि उसकी मौत तय है तो हममें और हत्यारे या बलात्कारी में फर्क क्या रहा? यह बहुत बड़ा सवाल है।''
अमिताभ बच्चन ने कहा कि मृत्युदंड पर बहस जारी है, उस पर कार्रवाई करना कानून का काम है। रेप की स्थिति दिखती है जबकि छेड़छाड़ तो इनविजिबिल सा होता है। उन्होंने कहा कि मृत्युदंड के मुद्दे पर दो-तीन तरह के विचार हैं। जब यह कहा जाता है कि किसी ने किसी का कत्ल कर दिया तो हत्यारे को फांसी पर लटका देना चाहिए।
''लिहाजा हत्यारे को गुनहगार साबित करने की प्रक्रिया शुरू होती है। अदालत में तारीख पर तारीख मिलती रहती है। अपराधी के सिर पर मौत की तलवार झूलती रहती है। वह डर के साये में जीता रहता है कि कब उसकी फांसी की तारीख तय हो जाए?
कई बार केस दो-तीन साल लंबा खिंच जाता है। तब तक हर पल वह घुट-घुट कर मर रहा होता है। ऐसे में यह सजा क्या किसी हत्या से कम खतरनाक है? यह मेरी दलील नहीं है, पर एक तर्क अलग है। वह यह कहता है कि हत्यारे ने तो एक झटके में किसी को मार दिया। मरने वाले को मालूम पड़ने से पहले, लेकिन जब सिस्टम हत्यारे को सजा सुना चुका है। हत्यारे का मालूम है कि उसकी मौत तय है तो हममें और हत्यारे या बलात्कारी में फर्क क्या रहा? यह बहुत बड़ा सवाल है।''
अमिताभ बच्चन बोले, औरतें भी मर्दों को फंसाती हैं
औरतें भी फंसाती हैं मर्दों को
'''कानून तो बन ही रहे हैं। ढेर सारे नियम भी हैं बलात्कारियों के खिलाफ। हालांकि कई जगह कानून का दुरुपयोग भी होता है। मर्दों की दलील है कि औरतों के लिए तो कानून हैं, मगर मर्दों की सुरक्षा के लिए कोई नियम नहीं। कई ऐसे मामले आए हैं, जहां औरतों ने मर्दों को झूठे आरोप में फंसाया है। आरोपी अंदर कर दिया।
जब तक आरोप साबित नहीं होते, तब तक वह जेल में सड़ चुका होता है। मेरे भी कुछ दोस्तों ने मुझसे कहा कि उनके दोस्तों को कुछ औरतों ने छेड़छाड़ के आरोप में झूठा अंदर करवाया। वे सालों जेल में पड़े रहे।''
'''कानून तो बन ही रहे हैं। ढेर सारे नियम भी हैं बलात्कारियों के खिलाफ। हालांकि कई जगह कानून का दुरुपयोग भी होता है। मर्दों की दलील है कि औरतों के लिए तो कानून हैं, मगर मर्दों की सुरक्षा के लिए कोई नियम नहीं। कई ऐसे मामले आए हैं, जहां औरतों ने मर्दों को झूठे आरोप में फंसाया है। आरोपी अंदर कर दिया।
जब तक आरोप साबित नहीं होते, तब तक वह जेल में सड़ चुका होता है। मेरे भी कुछ दोस्तों ने मुझसे कहा कि उनके दोस्तों को कुछ औरतों ने छेड़छाड़ के आरोप में झूठा अंदर करवाया। वे सालों जेल में पड़े रहे।''
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अमिताभ बच्चन बोले, औरतें भी मर्दों को फंसाती हैं
स्वीडन भी समस्या से जूझ रहा
''जिन शहरों में अचानक अमीरी आई, वहां कई किस्म के अपराध पनपे। औरतों पर यौन हमले भी बढ़े। खासकर दिल्ली और पश्चिमी यूपी, हरियाणा के इलाके। सिर्फ इस वजह से पिंक की कथाभूमि यानी लोकेल दिल्ली रखा गया?
बिग बी ने जवाब दिया, 'मैं इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हूं। कथाभूमि इरादतन दिल्ली में नहीं रखी गई। यह किसी के जहन में नहीं था कि दिल्ली में छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं, इसलिए हमारी कहानी दिल्ली में ही होगी। ऐसी घटनाएं हर कोने से सुनने को मिलती हैं। चाहे कलकत्ते में हो या उत्तर प्रदेश में। महाराष्ट्र से भी कभी-कभार सुनने को मिलती हैं। ऐसा पूरे देश में हो रहा है। यह चिंता का विषय है।
यह समस्या विदेशों में भी व्याप्त है। पिंक देखने के बाद शुजित सरकार को स्वीडन से कॉल आए कि ऐसी फिल्में वहां भी दिखाई जानी चाहिए। वहां भी लड़कियों पर यौन हमले बहुत ज्यादा होते हैं। बहरहाल, शुजित पहले इसे बंग्ला में ही बनाना चाहते थे, पर बाद में डिसाइड हुआ कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर बनाया जाए। समस्या को बड़े स्तर पर एड्रेस किया जाए।
फिर रितेश शाह फिल्म से जुड़े। वे कश्मीर से हैं, पर दिल्ली में थिएटर कर चुके हैं। शुजित 20 साल दिल्ली में रह चुके हैं। उनकी आंखों के सामने वैसी घटनाएं घटीं। शुजित ने दिल्ली, कोलकाता व अन्य इलाकों से ऐसी घटनाओं का पुलिंदा तैयार रखा था। नतीजतन, ऐसे मामलों को सिर्फ दिल्ली तक समेटना जायज नहीं।'
''जिन शहरों में अचानक अमीरी आई, वहां कई किस्म के अपराध पनपे। औरतों पर यौन हमले भी बढ़े। खासकर दिल्ली और पश्चिमी यूपी, हरियाणा के इलाके। सिर्फ इस वजह से पिंक की कथाभूमि यानी लोकेल दिल्ली रखा गया?
बिग बी ने जवाब दिया, 'मैं इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हूं। कथाभूमि इरादतन दिल्ली में नहीं रखी गई। यह किसी के जहन में नहीं था कि दिल्ली में छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं, इसलिए हमारी कहानी दिल्ली में ही होगी। ऐसी घटनाएं हर कोने से सुनने को मिलती हैं। चाहे कलकत्ते में हो या उत्तर प्रदेश में। महाराष्ट्र से भी कभी-कभार सुनने को मिलती हैं। ऐसा पूरे देश में हो रहा है। यह चिंता का विषय है।
यह समस्या विदेशों में भी व्याप्त है। पिंक देखने के बाद शुजित सरकार को स्वीडन से कॉल आए कि ऐसी फिल्में वहां भी दिखाई जानी चाहिए। वहां भी लड़कियों पर यौन हमले बहुत ज्यादा होते हैं। बहरहाल, शुजित पहले इसे बंग्ला में ही बनाना चाहते थे, पर बाद में डिसाइड हुआ कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर बनाया जाए। समस्या को बड़े स्तर पर एड्रेस किया जाए।
फिर रितेश शाह फिल्म से जुड़े। वे कश्मीर से हैं, पर दिल्ली में थिएटर कर चुके हैं। शुजित 20 साल दिल्ली में रह चुके हैं। उनकी आंखों के सामने वैसी घटनाएं घटीं। शुजित ने दिल्ली, कोलकाता व अन्य इलाकों से ऐसी घटनाओं का पुलिंदा तैयार रखा था। नतीजतन, ऐसे मामलों को सिर्फ दिल्ली तक समेटना जायज नहीं।'
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अमिताभ बच्चन बोले, औरतें भी मर्दों को फंसाती हैं
आंदोलन का हो चुका है आगाज
''इस फिल्म की वजह से लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाने वाले लोग की सोच बदल रही है। एक मूवमेंट सा हो रहा है। कई लड़कियों के फोन व संदेश हम लोगों को आए कि वे अन्याय के सामने झुकने वाली नहीं। कुछ ऐसी ही हवा बागबान के समय उठी थी। डायरेक्टर रवि चोपड़ा को रात दो बजे लंदन से किसी का फोन आया था। उसने रवि चोपड़ा से कहा कि उसके माता-पिता भी लंदन में ही रहते हैं, पर वह 25 सालों से उनसे मिलने नहीं गया। फिल्म देखने के बाद वह अपने माता-पिता से मिलने जा रहा है। पिंक ने भी राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ी है। उस पर हर उम्र वर्ग अपनी आवाज बुलंद कर रहा है।''
''इस फिल्म की वजह से लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाने वाले लोग की सोच बदल रही है। एक मूवमेंट सा हो रहा है। कई लड़कियों के फोन व संदेश हम लोगों को आए कि वे अन्याय के सामने झुकने वाली नहीं। कुछ ऐसी ही हवा बागबान के समय उठी थी। डायरेक्टर रवि चोपड़ा को रात दो बजे लंदन से किसी का फोन आया था। उसने रवि चोपड़ा से कहा कि उसके माता-पिता भी लंदन में ही रहते हैं, पर वह 25 सालों से उनसे मिलने नहीं गया। फिल्म देखने के बाद वह अपने माता-पिता से मिलने जा रहा है। पिंक ने भी राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ी है। उस पर हर उम्र वर्ग अपनी आवाज बुलंद कर रहा है।''