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यश चोपड़ाः रोमांस की नई इबारत लिखने वाला फिल्मकार, काफी बनाए सुपरस्टार, जब तक थी जान
Mon, 21 Oct 2019 11:57 AM IST
विजय जैन
इंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
इंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 21 Oct 2019 11:57 AM IST
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Yash Chopra
- फोटो : Social Media
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आज तक एक भी फिल्म फ्लॉप न देने वाले मशहूर निर्देशक-निर्माता यश चोपड़ा की 21 अक्तूबर को पुण्यतिथि होती है। यश राज को बॉलीवुड फिल्मों के निर्देशन के लिए सुपरहिट डायरेक्टर कहा जाता था। इतना ही नहीं मौजूदा पीढ़ी के साथ ही हमसे पहले की पीढ़ी भी यश चोपड़ा की फैन रही है।
यश चोपड़ा
- फोटो : SELF
सपनों की दुनिया का सौदागर
यश चोपड़ा ने सिनेमा के स्क्रीन पर एक सपनों की दुनिया खड़ी कर दी। उन्होंने सिनेमा के पर्दे पर ऐसे सपने रचे, जो हमारे-आप जैसे तमाम आम इनसान अपनी जिंदगी में देखते हैं। यह भले ही 'लार्जर दैन लाइफ' रोमांस हो मगर उनमें भावनाएं इतनी सच्ची होतीं थीं और उन उन फिल्मों में दर्शाए गए प्रेम में इतनी गहराई होती थी कि हर कोई उनके चरित्रों से खुद को जोड़ लेता था। यश ने कभी घिसी-पिटी स्टाइल में लव स्टोरी नहीं बनाई। कभी 'लम्हे' और 'दाग' जैसी बोल्ड थीम वाली फिल्मों के प्रयोग हों, 'डर' की उन्माद से भरी दीवानगी हो या 'वीर जारा' का सब्र और लंबे इंतजार से भरा प्रेम।
यश चोपड़ा ने सिनेमा के स्क्रीन पर एक सपनों की दुनिया खड़ी कर दी। उन्होंने सिनेमा के पर्दे पर ऐसे सपने रचे, जो हमारे-आप जैसे तमाम आम इनसान अपनी जिंदगी में देखते हैं। यह भले ही 'लार्जर दैन लाइफ' रोमांस हो मगर उनमें भावनाएं इतनी सच्ची होतीं थीं और उन उन फिल्मों में दर्शाए गए प्रेम में इतनी गहराई होती थी कि हर कोई उनके चरित्रों से खुद को जोड़ लेता था। यश ने कभी घिसी-पिटी स्टाइल में लव स्टोरी नहीं बनाई। कभी 'लम्हे' और 'दाग' जैसी बोल्ड थीम वाली फिल्मों के प्रयोग हों, 'डर' की उन्माद से भरी दीवानगी हो या 'वीर जारा' का सब्र और लंबे इंतजार से भरा प्रेम।
yash chopra and sridevi
साठ व सत्तर के दशक की यादगार फिल्में
यश चोपड़ा ने अपने दौर के सुपरस्टार रोमांटिक अभिनेता राजेश खन्ना को उनके कॅरियर की यादगार रोमांटिक फिल्म दी- 'दाग'। साठ के दशक को देखते हुए यह एक साहसिक प्रेम कहानी थी। रोमांटिक जॅनर के बादशाह समझे जाने वाले यश चोपड़ा के बारे में लोग भूल जाते हैं कि इन्होंने ही अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन कैरेक्टर को 'दीवार' फिल्म में विस्तार दिया था। आगे बतौर अभिनेता अमिताभ के छिपे हुए आयाम लाने में भी यश चोपड़ा का बड़ा योगदान रहा। फिल्म 'कभी-कभी' में "मैं पल दो पल का शायर हूं" गाते हुए अमिताभ एक रोमांटिक शायर के रूप में आए। 'सिलसिला' में वे एक बार फिर से और ज्यादा मैच्योर प्रेमी के रूप में सामने आए।
यश चोपड़ा ने अपने दौर के सुपरस्टार रोमांटिक अभिनेता राजेश खन्ना को उनके कॅरियर की यादगार रोमांटिक फिल्म दी- 'दाग'। साठ के दशक को देखते हुए यह एक साहसिक प्रेम कहानी थी। रोमांटिक जॅनर के बादशाह समझे जाने वाले यश चोपड़ा के बारे में लोग भूल जाते हैं कि इन्होंने ही अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन कैरेक्टर को 'दीवार' फिल्म में विस्तार दिया था। आगे बतौर अभिनेता अमिताभ के छिपे हुए आयाम लाने में भी यश चोपड़ा का बड़ा योगदान रहा। फिल्म 'कभी-कभी' में "मैं पल दो पल का शायर हूं" गाते हुए अमिताभ एक रोमांटिक शायर के रूप में आए। 'सिलसिला' में वे एक बार फिर से और ज्यादा मैच्योर प्रेमी के रूप में सामने आए।
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yash chopra
प्रयोग किए पर चले नहीं
फिल्म इंडस्ट्री में 'सिलसिला' के बाद का दौर ऐसा था कि यश चोपड़ा शायद खुद को मिलफिट महसूस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 'फासले', 'विजय' और 'मशाल' जैसी फिल्में बनाईं मगर ये फिल्में ज्यादा चलीं नहीं और न इन फिल्मों में यश चोपड़ा की शैली की छाप देखने को मिली। 'चांदनी' ने एक बार फिर यश चोपड़ा को बतौर निर्देशक ख्याति दिलाई। कई बार दुहराई गई प्रेम त्रिकोण की कहानी को उन्होंने ऐसे दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत किया कि उसके बाद न जाने कितनी फिल्मों में यह शैली दोहराई जाती रही। इस फिल्म ने पटकथा, तकनीकी, गीत-संगीत और अभिनय में ऐसे मानक प्रस्तुत किए, जो बाद में यशराज बैनर की अपनी स्टाइल बन गई। इसके बाद उन्होंने श्रीदेवी को लेकर एक और अद्भुत फिल्म बनाई 'लम्हे'। उम्र से परे अनोखे रिश्तों में उलझी यह प्रेमकहानी बॉक्स आफिस पर बहुत सफल नहीं हुई मगर इसे आलोचकों की सराहना मिली और 'लम्हे' को अपने समय से आगे की एक कल्ट फिल्म माना गया।
फिल्म इंडस्ट्री में 'सिलसिला' के बाद का दौर ऐसा था कि यश चोपड़ा शायद खुद को मिलफिट महसूस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 'फासले', 'विजय' और 'मशाल' जैसी फिल्में बनाईं मगर ये फिल्में ज्यादा चलीं नहीं और न इन फिल्मों में यश चोपड़ा की शैली की छाप देखने को मिली। 'चांदनी' ने एक बार फिर यश चोपड़ा को बतौर निर्देशक ख्याति दिलाई। कई बार दुहराई गई प्रेम त्रिकोण की कहानी को उन्होंने ऐसे दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत किया कि उसके बाद न जाने कितनी फिल्मों में यह शैली दोहराई जाती रही। इस फिल्म ने पटकथा, तकनीकी, गीत-संगीत और अभिनय में ऐसे मानक प्रस्तुत किए, जो बाद में यशराज बैनर की अपनी स्टाइल बन गई। इसके बाद उन्होंने श्रीदेवी को लेकर एक और अद्भुत फिल्म बनाई 'लम्हे'। उम्र से परे अनोखे रिश्तों में उलझी यह प्रेमकहानी बॉक्स आफिस पर बहुत सफल नहीं हुई मगर इसे आलोचकों की सराहना मिली और 'लम्हे' को अपने समय से आगे की एक कल्ट फिल्म माना गया।
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yash chopra
- फोटो : social media
हर दौर में युवाओं के करीब
नई सदी का आगाज हो रहा था। उदारीकरण के बाद भारत में तेजी से बदलाव हो रहे थे। उसी दौरान उन्होंने संगीत और नृत्य से भरी फिल्म 'दिल तो पागल है' लाकर नई जेनरेशन को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह फिल्म अपनी गहरी रूमानियत और कोरियोग्राफी के कारण आज भी याद की जाती है। इस फिल्म को देखकर यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि इसे किसी युवा निर्देशक ने नहीं बल्कि साठ का दशक पार कर चुके किसी निर्देशक ने बनाया है। इस फिल्म के बाद से यश अपने प्रोडक्शन हाउस को स्थापित करने में लग गए। यश राज बैनर से साल में कई फिल्में आती हैं और आम तौर पर सभी बॉक्स आफिस पर सफल रहती हैं।
नई सदी का आगाज हो रहा था। उदारीकरण के बाद भारत में तेजी से बदलाव हो रहे थे। उसी दौरान उन्होंने संगीत और नृत्य से भरी फिल्म 'दिल तो पागल है' लाकर नई जेनरेशन को झूमने पर मजबूर कर दिया। यह फिल्म अपनी गहरी रूमानियत और कोरियोग्राफी के कारण आज भी याद की जाती है। इस फिल्म को देखकर यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि इसे किसी युवा निर्देशक ने नहीं बल्कि साठ का दशक पार कर चुके किसी निर्देशक ने बनाया है। इस फिल्म के बाद से यश अपने प्रोडक्शन हाउस को स्थापित करने में लग गए। यश राज बैनर से साल में कई फिल्में आती हैं और आम तौर पर सभी बॉक्स आफिस पर सफल रहती हैं।