हिंदी फिल्मों का संगीत अब सब ऑनलाइन सुनते हैं। मोबाइल पर म्यूजिक एप हैं। घर में एलेक्सा है। न कहीं कैसेट की अलमारी है। न सीडी की कोई रैक। लेकिन, ये उन दिनों की बात है जब कैसेटों का दौर था और किसी भी हिंदी फिल्म का म्यूजिक अपने आप में फिल्म कारोबार में कमाई का बड़ा जरिया हुआ करता था। एक एक करोड़ कैसेटें फिल्मों की बिकती थीं और करोड़ों में ही फिल्मों के म्यूजिक के राइट्स बिका करते थे। लता मंगेशकर का गाना फिल्म में हो तो फिर तो कहने ही क्या। लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे कि जिस दौर में अलका याग्निक सिर्फ इस बात पर इतराती फिरती थीं कि वह दिन में तीन तीन गाने रिकॉर्ड कर रही हैं, उस दौर में एक दिन लता मंगेशकर ने भी एक दिन में चार गाने रिकॉर्ड कर दिए थे। और, वह भी लंच के बाद। ये लता मंगेशकर के जीवन का अनूठा रिकॉर्ड हैं। और, यही फिल्म है बाइस्कोप की हमारी आज की फिल्म, ये दिल्लगी। ये फिल्म रिलीज हुई थी 6 मई 1994 को।
बाइस्कोप: जब लता मंगेशकर ने रिकॉर्ड कर दिए एक दिन में चार गाने, ‘ओले ओले’ ने बदल दी सैफ की तकदीर
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6 मई को वैसे तो और भी तमाम अच्छी फिल्में मसलन पेंटर बाबू, वारिस आदि रिलीज हो चुकी हैं। लेकिन, ये दिल्लगी को चुनने की तमाम वजहों में से एक वजह इसका संगीत भी है। नवंबर 1993 से लेकर अक्टूबर 1994 के बीच हिंदी फिल्मों के जो कैसेट बिके उनमें ये दिल्लगी की गिनती तीसरे नंबर पर होती है। वेस्टन म्यूजिक कंपनी ने उस दरम्यान इस फिल्म के 45 लाख कैसेट बेचे थे। पहले और दूसरे नंबर पर जो फिल्में रहीं, वे थी बाजीगर और मोहरा। ये वो दौर था जब संगीतकार अनु मलिक एक साथ करीब 35 फिल्मों में काम कर रहे होते थे और गीतकार समीर के पास किसी भी समय कम से कम सौ फिल्मों के गीत लिखने का काम तो होता ही होता था। समीर ने ही फिल्म ये दिल्लगी में भी गीत लिखे और फिल्म का संगीत दिया था दिलीप सेन और समीर सेन की जोड़ी ने। इस जोड़ी के आगे उस साल हम आपके हैं कौन में राम लक्ष्मण का संगीत, डर में शिव हरि का संगीत और 1942 ए लव स्टोरी में आर डी बर्मन का संगीत भी पीछे छूट गया था।
ये दिल्लगी का बाइस्कोप लिखने से पहले जब मैंने इसके निर्देशक नरेश मल्होत्रा को फोन किया और इस बात की बधाई दी कि आज ही उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म ये दिल्लगी रिलीज हुई तो उनकी आवाज में एक खनक महसूस हुई। वह बताते हैं, 'वेस्टन म्यूजिक कंपनी के स्टूडियो में फिल्म के सारे गाने रिकॉर्ड हुए थे। संगीत हम बनाकर ले गए थे और लता जी का उस दिन एक गाना रिकॉर्ड होना था। यश जी आए हुए थे, भाभी जी (पामेला चोपड़ा) भी थीं। दोपहर तक खाना वगैरह खाकर लता जी ने गाने की सिचुएशन सुनी, म्यूजिक सुना और पहला गाना रिकॉर्ड कर दिया। फिर मैंने पूछा कि अगला गाना रिकॉर्ड करने की तारीख क्या रखी जाए तो उन्होंने पूछा कि गाना क्या है, मैंने उसका भी म्यूजिक सुनाया तो वह बोलीं, ये तो अच्छा है, इसे अभी रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर जब मैंने अगले गाने की डेट की बात की तो वह बोलीं, मेरे लिए एक चाय मंगा दो। तब तक मैं तुम्हारे इस गाने का म्यूजिक सुन लेती हूं। लता जी ने वह गाना भी रिकॉर्ड कर दिया और आश्चर्यजनक बात तब हुई जब उन्होंने उस दिन ही फिल्म का चौथा गाना भी रिकॉर्ड कर दिया।'
नरेश कहते हैं कि तब इतने टीवी चैनल या डिजिटल मीडिया होता नहीं था, नहीं तो लता जी का एक दिन में चार गाने रिकॉर्ड कर देना सूबे की नई सरकार बनने से कम बड़ी ब्रेकिंग न्यूज नहीं होती। ये है, ये दिल्लगी के गानों में से एक लता मंगेशकर का गाया वो गाना, जिसने साल 1994 में हंगामा मचा दिया था, होठों पे बस तेरा नाम हो..और काजोल की ऐसी मदहोश कर देने वाली अदाएं तो शायद ही आपने किसी दूसरी फिल्म में देखी हों।
नरेश मल्होत्रा ने इसके बाद बतौर निर्देशक तमाम और फिल्में भी बनाईं। लेकिन, उनके साथ काम करने वाले लोग बताते हैं कि फिल्म ये दिल्लगी में उन्होंने एक परिवार बनाया। इसके पहले वह युद्ध और त्रिदेव जैसी सुपरहिट फिल्में एडिट कर चुके थे और यश चोपड़ा के मुख्य सहायक निर्देशक हुआ करते थे। किसी फिल्म निर्देशक का अपने सहायक के लिए फिल्म प्रोड्यूस करना हिंदी सिनेमा में बहुत बड़ी बात है। यश चोपड़ा को हुनर की कद्र करने में महारत हासिल थी। ये बात जानकर शायद आप चौंक जाएं कि नरेश मल्होत्रा को निर्देशन की शुरुआत दरअसल फिल्म डर से करनी थी। फिल्म ये दिल्लगी से ही अपने सिनेमैटोग्राफी करियर की शुरूआत करने वाले राजू केजी बताते हैं, 'हम सब लोग नरेश जी के साथ एक परिवार की तरह ही काम करते थे। हनी ईरानी (जावेद अख्तर की पहली पत्नी), नरेश जी हम सबने मिलकर जिस कहानी पर काम किया और जिसका सीन डिवीजन वगैरह सब तैयार कर लिया, वह फिल्म थी, डर। इस फिल्म में हीरो का किरदार तब दीपक मल्होत्रा को करना था। लेकिन उनकी पहली फिल्म लम्हे के बाद कोई उनके खिलाफ विलेन नहीं बनना चाहता था। आमिर खान ने ये फिल्म सुनी। ऋषि कपूर ने सुनी। ऋषि कपूर ने ही यश जी को फोन करके कहा कि यश जी ये फिल्म तो आपको डायरेक्ट करनी चाहिए। फिर एक दिन यश जी आए और बोले कि तुम लोगों को बुरा न लगे तो ये स्क्रिप्ट मुझे दे दो। तुम लोग कुछ और बना सकते हो क्या?' यश चोपड़ा अपनी पिछली फिल्म लम्हे में दीपक मल्होत्रा के होने का नुकसान उठा चुके थे, उन्होंने उस किरदार में लिया सनी देओल को और जो रोल आमिर खान ने छोड़ा, वो मिला शाहरुख खान को, बाकी सब इतिहास है।