मिर्जापुर के ‘मुन्ना भैया’ के तौर पर पहचान बना चुके दिव्येंदु शर्मा इन दिनों एक दिलचस्प दौर में हैं। उनकी इस चर्चित वेब सीरीज को अब फिल्म के रूप में बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी हो रही है। ‘प्यार का पंचनामा’ से करियर की शुरुआत करने वाले दिव्येंदु ने अपने काम से अलग पहचान बनाई है।
Exclusive: 'स्क्रीन का साइज बदलने से कहानी हल्की नहीं होनी चाहिए', ‘मिर्जापुर’ फिल्म बनने पर बोले मुन्ना भैया
Divyenndu Sharma Interview: अपनी हालिया रिलीज वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ से तारीफें बटोरने वाले अभिनेता दिव्येंदु शर्मा ने अपने किरदार को लेकर बाक की। जानिए ‘मिर्जापुर द मूवी’ को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा…
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पहली फिल्म और मिर्जापुर मेरे लिए गेम चेंजर रहे
अपने करियर के अहम पड़ावों पर बात करते हुए दिव्येंदु कहते हैं, ‘सच कहूं तो मेरी पहली फिल्म प्यार का पंचनामा हमेशा मेरे लिए बहुत मायने रखेगी। उसी फिल्म ने मुझे पहचान दी। वह किरदार भी आसान नहीं था, खासकर पहली फिल्म के लिए उस तरह का रोल निभाना एक चुनौती थी। इसलिए वह हमेशा मेरे दिल में एक खास जगह रखेगी।
उसके बाद मैं ‘मिर्जापुर’ को गेम चेंजर मानूंगा। वहां मुझे अपने आप को एक अलग तरीके से दिखाने का मौका मिला। वहां से लोगों की मेरे प्रति सोच बदली और मुझे अलग तरह के काम मिलने शुरू हुए। उस प्रोजेक्ट के बाद मेरे लिए एक नया फेज शुरू हुआ। एक तरह से नया गेम शुरू हुआ।’
मिर्जापुर को फिल्म में लाना एक नया और दिलचस्प प्रयोग है
वेब सीरीज से ‘मिर्जापुर’ को फिल्म की ओर बढ़ते इस ट्रेंड पर दिव्येंदु अपनी राय रखते हुए कहते हैं, ‘यह जो हम कर रहे हैं, इंडिया में पहली बार हो रहा है। यह हमारे लिए भी और पूरी इंडस्ट्री के लिए काफी दिलचस्प चीज है। अगर यह एक्सपेरिमेंट अच्छा जाता है, मजा आता है इसमें, तो मुझे लगता है कि काफी और लोग हैं। जो शायद अभी तक देख रहे होंगे कि अगर यह सफल हुआ तो हम भी इसमें आएंगे। वेस्ट में यह पहले से होता आया है।
इसमें एक बात समझनी जरूरी है कि हर प्रोजेक्ट को आप बड़े पर्दे पर नहीं ला सकते। आपके पास कुछ खास होना चाहिए। जिससे आप ऑडियंस से कह सकें कि इसे बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव अलग होगा। स्क्रीन का आकार बदलने से कहानी का असर कम नहीं होना चाहिए। यह बहुत जरूरी है। यह इंडस्ट्री के लिए एक दिलचस्प बदलाव हो सकता है। अगर हम फाइनेंस और बिजनेस के नजरिए से देखें, तो यह मॉडल आगे चलकर एक बड़ी अपॉर्चुनिटी भी साबित हो सकता है।’
दस-पंद्रह मिनट में ही मैंने हां कर दी
अपनी हालिया वेब सीरीज ग्लोरी से जुड़ने के अनुभव को याद करते हुए दिव्येंदु ने बताया कि निर्देशक करण अंशुमन और मैं एक पार्टी में मिले थे। वहीं हमने सोचा था कि फिर से साथ काम करना चाहिए, क्योंकि हम पहले भी साथ काम कर चुके थे। करण ने मुझे बताया था कि वह कुछ लिख रहे हैं। जब थोड़ा तैयार हो जाएगा तो बताएंगे।
बाद में जब हमारी मीटिंग हुई और उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट के बारे में बताया। तो वह शायद दस-पंद्रह मिनट की ही मीटिंग रही होगी। उसी में मैंने हां कर दी। इसके पीछे एक वजह यह भी थी कि हमारे बीच पहले से एक कंफर्ट लेवल था। जिस पैशन के साथ वह कहानी सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बहुत खास है। उसे सुनकर ही जुड़ाव महसूस हुआ। किरदार, कहानी और उसका पूरा सेटअप सुनकर लगा कि इसमें काम करना मजेदार होगा।
यह किरदार मेरे लिए एक ज्वालामुखी की तरह था
अपने किरदार को लेकर एक्टर ने कहा कि यह किरदार मेरे लिए एक ज्वालामुखी की तरह था। जो अंदर ही अंदर दरक रहा होता है। मुझे पता था कि मुझे इस किरदार के साथ भीतर से जलना पड़ेगा। हालांकि, इसके साथ कई और दिलचस्प एलिमेंट्स भी थे। इतने डार्क किरदार के साथ ह्यूमर का होना एक अलग ही अनुभव था।
यह किरदार बहुत पर्सनल स्पेस से आता हुआ महसूस हुआ। एक ऐसा इंसान जो हर वक्त भीतर से फटने के कगार पर है। कई बार फटता है और कई बार खुद को रोक लेता है। लेकिन भीतर की आग लगातार जलती रहती है। यही बात मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करती थी।
अब मुझे पता है कि किरदार से बाहर वापस कैसे आना है
किरदार से बाहर निकलने की प्रक्रिया पर बात करते हुए दिव्येंदु कहते हैं कि पहले भी मैंने ऐसे किरदार निभाए हैं। जिनसे बाहर निकलने में मुझे काफी समय लगा था। उसी अनुभव से मैंने इस बार बहुत कुछ सीखा।
मुझे पहले से ही अंदाजा था कि यह किरदार उससे भी ज्यादा डार्क है। लेकिन इस बार मैं मानसिक रूप से तैयार था। मैंने यह तय किया था कि मैं खुद को इतना डूबने नहीं दूंगा। हालांकि, यह भी सच है कि इस किरदार में उतरना बहुत गहरा था। लेकिन इस बार मुझे यह पता था कि वहां से वापस कैसे आना है।