मराठी और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सोनाली कुलकर्णी नाम की दो अभिनेत्रियां हैं। अक्सर इनके नाम को लेकर सिर्फ दर्शकों को ही नहीं बल्कि पत्रकारों को भी भ्रम होता रहता है। 'नटरंग' जैसी मराठी फिल्म से चर्चित हुई अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को लोगों ने नाम बदलने की भी सलाह दी, लेकिन सोनाली ने अपना नाम नहीं बदला। सोनाली कुलकर्णी ने हिंदी में 'ग्रैंड मस्ती' और 'सिंघम रिटर्न्स' जैसी फिल्में की हैं। हाल ही में उनकी पहली मलयालम फिल्म 'मलाईकोट्टई वालिबन' रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने सुपरस्टार मोहनलाल के साथ काम किया। अपने अभिनय को मिल रहे विस्तार से सोनाली काफी खुश हैं, उनकी इस खुशी में अमर उजाला भी शामिल हुआ।
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'नटरंग' जैसी मराठी फिल्म से चर्चित हुई अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को लोगों ने नाम बदलने की भी सलाह दी, लेकिन सोनाली ने अपना नाम नहीं बदला।
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मेरी मराठी फिल्म 'नटरंग' के गाने 'अप्सरा आली' की वजह से ही मुझे ये मौका मिला। निर्देशक लिजो जोस पेलिसेरी ने मेरा वह गाना देखा था। इस फिल्म में मेरी भूमिका एक डांसर रंगपट्टिनम रंगरानी की है। लिजो जोस पेलिसेरी ने अपनी कास्टिंग टीम को मुझसे संपर्क करने को कहा था। मेरे पास फोन आए तो मुझे लगा कि ऐसे ही कोई मजाक कर रहा है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से मेरे एक दोस्त सिद्धार्थ मालिक हैं। वह मेरे साथ मराठी फिल्म 'पोस्टर बॉय' में काम कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि लोग तुम्हें ढूंढ रहे हैं, फोन आएगा तो मना मत करना। मराठी फिल्म 'ताराराणी' की शूटिंग की लोकेशन पर ये लोग मुझे मिलने ही पहुंच गए।
मोहनलाल के साथ कैसे अनुभव रहे?
मैंने उनकी मलयालम फिल्में 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' देखी हैं। इसके अलावा उनकी कोई भी मलयालम फिल्म नहीं देखी थी। फिल्म 'मलाईकोट्टई वालिबन' में वह 60 साल की उम्र में अपने सारे एक्शन सीन खुद कर रहे थे। वह प्रशिक्षित नर्तक और मार्शल आर्ट्स जानकार हैं। इस फिल्म की पूरी शूटिंग राजस्थान में हुई है। मलयालम सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म है। इस फिल्म में मेरा किरदार गांव गांव जाकर नृत्य करता है और मोहनलाल का किरदार गांव -गांव में पहलवानी। इसी यात्रा में हमारी मुलाकात होती है। मोहनलाल सर बहुत बड़े स्टार हैं, लेकिन वह कभी जाहिर नहीं करते हैं कि इतने बड़े स्टार हैं।
फिल्म में मोहन लाल के साथ पहला सीन क्या क्या था?
मैंने छह महीने से अपने इस सीन और इसके संवादों की तैयारी करके रखी थी। सीन ऐसा था कि मैं मोहनलाल जी को प्रपोज कर रही हूं। उस सीन में सिर्फ मैं ही बोले जा रही थी और मोहनलाल सर हां और न में जवाब दे रहे हैं। फाइनली जब सीन शूट हुआ तो एक ही शॉट में ओके हो गया। मोहनलाल सर बहुत खुश हुए थे उस दिन।
और, थोड़ा शुरू से समझें तो आपके अभिनय की शुरुआत कैसे हुई हुई?
मेरे पापा और मम्मी दोनों भारतीय सेना में रहे हैं। घर पर सब हिंदी में ही बात करते रहे हैं। 15 साल की उम्र से मैं पुणे में मॉडलिंग करती रही। एक मराठी सीरियल 'हा खेल संचिताचा' के ऑडिशन में मेरा चयन हो गया। मुझे तब मराठी नहीं आती थी। निर्देशक उषा देशपांडे ने मेरा हौसला बढ़ाया। मुझे नसीरुद्दीन शाह और विक्रम गोखले जैसे कलाकारों के साथ इस धारावाहिक काम करने का मौका मिला। मराठी फिल्मों में मेरी शुरुआत फिल्म 'बकुला नामदेव घोटले' से हुई। निर्देशक रवि जाधव की फिल्म 'नटरंग' से मराठी सिनेमा में मेरी एक अलग पहचान बन गई।