हॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों में शुमार जुरासिक पार्क, टर्मिनेटर 2, फॉरेस्ट गम्प, सेविंग प्राइवेट रेयान, पर्ल हार्बर, माइनॉरिटी रिपोर्ट के दौरान इंडस्ट्रियल लाइट एंड मैजिक कंपनी के सूत्रधार रहे मशहूर निर्माता जिम मॉरिस की बनाई फिल्म वॉल ई ने सर्वश्रेष्ठ एनीनेशन फिल्म का ऑस्कर पुरस्कार जीता। मॉरिस इन दिनों दुनिया की चर्चित एनीमेशन कंपनी पिक्सार एनीमेशन स्टूडियो के अध्यक्ष हैं। पिक्सार की नई फिल्म ऑनवर्ड भारत में 6 मार्च को रिलीज हो रही है। इसी सिलसिले में पिक्सार के कैलीफोर्निया स्थित स्टूडियो में जिम मॉरिस से ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की पंकज शुक्ल ने।
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आपकी नजर में पिक्सार की यात्रा के अहम पड़ाव अब तक क्या रहे हैं?
मुझे लगता है कि जब स्टीव जॉब्स ने जॉर्ज लुकास से पिक्सार कंपनी को खरीदा तो वह एक ऐतिहासिक लम्हा था। इसके बाद फिल्म टॉय स्टोरी एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म ने सिनेमा में एनीमेशन को नए तौर पर स्थापित किया। उसके पहले तक द्विआयामी एनीमेशन अपने चरम पर पहुंच चुका था लेकिन हमारी तकनीक ने एनीमेशन को टॉय स्टोरी में जो रूप प्रदान किया, वह इतिहास बन चुका है। मैं इस फिल्म के निर्माण में शामिल नहीं था लेकिन मैंने जॉर्ज के साथ यह फिल्म देखी। इस फिल्म ने एनीमेशन का पूरी दुनिया में रंग रूप बदल दिया।
पिक्सार की फिल्मों की कहानी कहने के तरीके में टॉय स्टोरी का कितना असर रहता है अब?
टॉय स्टोरी ने गुणवत्तापूर्ण फिल्मों की कहानियां कहने के लिए एक मंच तैयार किया। ये अब हमारे डीएनए का हिस्सा बन चुकी है। इसके बाद एनीमेशन फिल्मों में जो दूसरा बड़ा धमाका हुआ वह थी हमारी फिल्म मॉनस्टर्स इंक। फाइंडिग नेमो ने हमें बताया कि इंसानी भावनाएं कैसे विश्वव्यापी असर डालती हैं। अपने बेटे के लिए परेशान पिता की एक कहानी ने सबके दिलों को छुआ। इसने हमको ये भी बताया कि हमारी निजी कहानियां कैसे कभी कभी दर्शकों के लिए एक कालजयी फिल्म में तब्दील हो जाती हैं। इसके बाद जब डिज्नी ने पिक्सार का अधिग्रहण किया तो ये भी पिक्चार के इतिहास का एक नया अध्याय बना।
डिज्नी अब अपना ओटीटी ऐप डिज्नी प्लस लेकर आया है, आपको क्या लगता है कि डिजिटल माध्यम सिनेमा पर कितना असर डालेगा?
इसका असर देखना दिलचस्प होगा। हम डिज्नी प्लस के लिए कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। ओटीटी एक तरह से टेलीविजन का नया रूप है। इसकी अपनी ताकतें हैं। अपनी कमजोरियां हैं। इसकी अच्छाई ये है कि ये बहुत सारे लोगों तक आसानी से पहुंच सकता है। लेकिन, कभी कभी आपको ऐसा भी लग सकता है कि ये हमें कुछ दिखाने की बार बार कोशिश कर रहा है। फिर इसमें बजट की भी सीमाएं हैं। इसके बावजूद ये हमारी टीम को कुछ नया करने का मौका देता है। मुझे लगता है कि पिक्सार डिजिटल दुनिया के लिए भी कुछ ऐसा करना चाहेगा जैसा टॉय स्टोरी ने सिनेमा के लिए किया।
मनोरंजन उद्योग में लगातार हो रहे तकनीकी विकास सिनेमाघरों में फिल्म देखने के अनुभव को कितना प्रभावित कर सकते हैं?
मुझे लगता है कि ऐसा कोई प्रभाव होगा नहीं। सिनेमा में विकास की असीम संभावनाएं हैं। चीन की बात होती है तो हमें उनका विकास दिखता है लेकिन जापान भी सिनेमा के लिए अच्छा बाजार है। हमारे पास मौका है जब हम दुनिया भर को पसंद आने वाली फिल्में बना सकते हैं। ओटीटी पर फिल्में दिखाने का अर्थशास्त्र थोड़ा जटिल है। यहां कितने लोग क्या देख रहे हैं, इसका विश्लेषण करना आसान नहीं है। जब मैं इस कारोबार में आया तो हमारी फिल्मों की दो तिहाई कमाई अमेरिका से होती थी औऱ एक तिहाई दूसरे देशों में। लेकिन, पिछले 20 साल में हॉलीवुड फिल्मों का एक बड़ा और विस्तृत दर्शक वर्ग पूरी दुनिया में तैयार हो चुका है। हमें फिल्म दर्शकों की इज्जत करनी होगी और ऐसी फिल्में बनानी होंगी जिनकी कहानियां और विचार वैश्विक हैं।
एक नई फिल्म बनाने और पहले से हिट किसी फिल्म की अगली कड़ी (सीक्वेल) बनाने में से आप किसे बेहतर मानते हैं?
पिक्सार ने बहुत सारी सीक्वेल फिल्में बनाई हैं, ये मैं मानता हूं। लेकिन, जब हम सीक्वेल फिल्में बनाते हैं तो इसलिए बनाते हैं कि इन्हें बनाने वालों को कहानी की अगली कड़ी बनाने की इच्छा है। उनके पास कहानी को आगे ले जाने के लिए आश्चर्यजनक विचार होते हैं तभी हम सीक्वेल बनाते हैं। सिनेमा के इतिहास की कुछ कालजीय फिल्में जैसे गॉड फादर टू या रिटर्न ऑफ जेडाई या फिर टॉय स्टोरी दो, तीन और चार जब सीक्वेल फिल्में हैं। मेरे हिसाब से सीक्वेल के साथ दिक्कत तब होती है जब सीक्वेल सिर्फ इसलिए बनाई जाती है कि पहले वाली फिल्म हिट हो चुकी है और कोई निर्माता इस शोहरत का फायदा उठाना चाहता है। ये समझ में आया है लेकिन सिर्फ सीक्वेल बनाने के लिए सीक्वेल बनाना बहुत गलत वजह है।