अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘शोले’ कैसे मिली, इसके तमाम दावे किए जाते हैं। सलीम-जावेद वाले सलीम खान का कहना रहा है कि फिल्म ‘शोले’ के लिए इसके निर्देशक रमेश सिप्पी ने अमिताभ बच्चन का नाम तब फाइनल किया जब उन्होंने अपने पैसे से थिएटर बुक करके उन्हें फिल्म ‘शोले’ दिखाई थी। धर्मेंद्र का कहना रहा है कि इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के नाम की सिफारिश उन्होंने की। लेकिन, फिल्म ‘शोले’ की चर्चा यहां इसलिए कि जिस साल 1975 में यह फिल्म रिलीज हुई, वह साल परदे आम आदमी के सिस्टम के खिलाफ गुस्से को परदे पर दिखाने का साल रहा। इस साल की पांच सबसे कामयाब फिल्मों में से फिल्म ‘जय संतोषी मां’ को अगर अलग कर दें तो बाकी चारों फिल्मों ‘शोले’, ‘संन्यासी’, ‘दीवार’ और ‘प्रतिज्ञा’ नायक के सिस्टम से भरोसा उठने की कहानियां हैं। ‘जय संतोषी मां’ के हिट होने के पीछे भी एक बड़ा कारण उन दिनों लोगों के मन में हताशा के बसेरा कर लेना रहा, जिसमें उन्हें देवी संतोषी मां में उम्मीद की एक लौ दिखाई दी। इन फिल्मों में से हम आज के ‘बाइस्कोप’ में बात करेंगे फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ की। यही वह फिल्म है जिसने छैल छबीले धर्मेंद्र की माचो इमेज को परदे पर पुख्ता किया। और, यही वह फिल्म है जिसके गाने ‘मैं जट यमला पगला दीवाना’ पर किए गए धर्मेंद्र के फ्री स्टाइल डांस पर इसकी हीरोइन हेमा मालिनी मर मिटी थीं। धर्मेंद्र ने इस गाने के गायक मोहम्मद रफी से गाने रिकॉर्डिंग के दौरान जो वादा किया था वह तो पूरा न हो पाया लेकिन अपने निर्देशक से छूट पाकर धर्मेंद्र ने इस गाने के बजने और कैमरा चालू होने के बाद जो कुछ अपने मन से किया, वह धर्मेंद्र का हिंदी सिनेमा में एक अनोखा स्टाइल बन गया।
Bioscope S2: धर्मेंद्र का ये डांस देख फिदा हुई थीं हेमा मालिनी, शुरू हुई साथ निभाने की ‘प्रतिज्ञा’
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धर्मेंद्र के करियर व कारोबार का टर्निंग प्वाइंट
फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ धर्मेंद्र के निजी जीवन और करियर दोनों का टर्निंग प्वाइंट मानी जाती है। पहला टर्निंग प्वाइंट तो यही के तमाम बातों, मुलाकातों और आठ फिल्मों ‘तुम हसीं मैं जवां’, ‘शराफत’, ‘नया जमाना’, ‘सीता और गीता’, ‘राजा जानी’, ‘जुगनू’, ‘दोस्त’ व ‘पत्थर और पायल’ में साथ काम करने के बाद हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान पहली बार एक दूसरे के दिल की बात समझी। धर्मेंद्र के भोलेपन पर हेमा मालिनी ‘मैं जट यमला पगला दीवाना’ की शूटिंग वाले दिन ही फिदा हुईं। और गाने की शूटिंग पूरे करने के बाद हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के सामने पहली बार उनकी मोहब्बत को स्वीकार किया।, इस फिल्म के करीब पांच साल बाद दोनों ने शादी भी कर ली। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी इसके बाद 21 फिल्मों में और बनी। फिल्म का दूसरे टर्निंग प्वाइंट में धर्मेंद्र का निजी और व्यावसायिक जीवन दोनों शामिल है।
‘सत्यकाम’ का घाटा पूरा करने वाली फिल्म
धर्मेंद्र खुद बताते हैं, ‘हमने इससे पहले एक फिल्म बनाई थी ‘सत्यकाम’। ऋषि दा इसके निर्देशक हैं। ऋषि दा और मेरा रिश्ता बहुत करीब का रहा है। और, उनका मैं हमेशा शुक्रगुजार भी रहा कि उन्होंने मुझे वह सब करने की छूट कैमरे के सामने दी जो मैं करना चाहता था। मैंने कितने भी रीटेक लिए। वह कभी झल्लाए नहीं। गुस्सा नहीं हुए। हां, मैं उन पर जरूर एक बार गुस्सा हुआ जब उन्होंने फिल्म ‘आनंद’ का लीड रोल मुझे कहानी सुनाने के बाद राजेश खन्ना को दे दिया। ये सच है कि मैंने ये खबर मिलने के बाद पूरी रात ऋषिकेश मुखर्जी को दसियों फोन किए थे। फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ हमने फिल्म ‘सत्यकाम’ का घाटा पूरा करने के लिए बनाई थी। मेरा भाई अजीत फिल्म का प्रोड्यूसर था। फिल्म ने खूब कमाई की और हमारा पिछला सारा घाटा इस फिल्म से पूरा हो गया।’ अजीत सिंह देओल दरअसल धर्मेंद्र की तरह ही अभिनय में दिलचस्पी रखते थे और कुछ फिल्मों में उन्होंने अभिनय भी किया। बाद में निर्देशन में भी उन्होंने हाथ आजमाया पर मामला जमा नहीं। अभिनेता अभय देओल उन्हीं के बेटे हैं।
फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ का जिक्र चलने पर धर्मेंद्र अपनी मां का जिक्र भी जरूर करते हैं। वह कहते हैं, ‘मेरी मां उन दिनों मुझसे कहा करती थी कि बेटे तू दोहरी जिंदगी जी रहा है। परदे वाली दुनिया में तू कुछ और है। और, मेरी दुनिया में तू कुछ और। मेरा मानना है कि सिनेमा भ्रम का कारोबार है। और ये भ्रम हर कलाकार को बनाए ही रखना होता है। इसे बनाए रखने वाला ही यहां सफल भी होता है।’ फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ के निर्देशक हैं दुलाल गुहा। दुलाल गुहा इससे पहले राजेश खन्ना को लेकर सुपरहिट फिल्म ‘दुश्मन’ बना चुके थे। ‘दुश्मन’ के बाद उन्होंने धर्मेंद्र और हेमा मालिनी को लेकर बैक टू बैक दो फिल्में ‘दोस्त’ और ‘प्रतिज्ञा’ बनाईं। फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ धर्मेंद्र की पहली एक्शन कॉमेडी फिल्म मानी जाती है। तब धर्मेंद्र से इस तरह का रोल करवा लेने के लिए दुलाल गुहा की खूब तारीफें भी हुईं थीं। धर्मेंद्र खुद कहते हैं, ‘कॉमेडी कठिन काम है। लेकिन, उसकी मेरे साथ जमती खूब है।’ धर्मेंद्र ने एक्टिंग में हमेशा दिलीप कुमार को अपना आदर्श माना लेकिन दिलीप कुमार की मेथड एक्टिंग को उन्होंने कभी फॉलो नहीं किया। वह कहते हैं, ‘मेरा एक्टिंग का स्टाइल वही रहा जो मेरे डायरेक्टर ने मुझसे करवाया। इसके बाद भी मैं कैमरा ऑन होने के बाद तमाम मर्तबा अपने मन से भी कुछ न कुछ कर ही लेता था। ऋषि दा के अलावा उन दिनों के निर्देशकों बिमल रॉय, असित सेन, दुलाल गुहा, प्रमोद चक्रवर्ती और अर्जुन हिंगोरानी जैसे उन तमाम लोगों का शुक्रगुजार हमेशा रहूंगा जिन्होंने अपनी हर फिल्म में मुझे थोड़ा थोड़ा निखारा। मेरी गलतियां माफ की और मुझे कैमरे के सामने पूरी छूट दी।’
फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ की कहानी बदले की प्रतिज्ञा की कहानी है। फिल्म में दुलाल गुहा ने उस समय के दिग्गज हास्य कलाकार जैसे कि जगदीप, मुकरी, जॉनी वाकर, मेहर मित्तल और केश्टो मुखर्जी ले रखे थे। फिल्म में धर्मेंद्र के आसपास इन कलाकारों की फील्डिंग लगाने का मकसद ये था कि धर्मेंद्र इनके साथ रहकर स्वाभाविक हास्य अपने अंदाज में ले ही आएंगे। और, दुलाल गुहा का ये प्रयोग सफल भी रहा है। फिल्म की कहानी एक सीधे साधे इंसान अजीत की कहानी है जो अपने परिवार के साथ हुए अत्याचार का बदला लेने की प्रतिज्ञा करता है। और, उसके लिए अपनी पहचान से बड़ा काम करने का जोखिम उठा लेता है। वह बदला लेने के लिए अपने ट्रक से निकलता है तो रास्ते में उसे एक इंस्पेक्टर मिलता है जिसे डकैतों के प्रभाव वाले इलाके में थाना खोलने भेजा गया था। वह मरने से पहले अपने सारे हथियार और गोला बारूद अजीत के हवाले कर देता है। अजीत इन्हीं सब से गांव जाकर थाना खोलता है लेकिन चूंकि वह असली पुलिसवाला तो है नहीं तो मामला सुलझने की बजाय उलझने लगता है। उसके पीछे बदमाशों का एक जासूस लगा है और वह लगा है गांव की गोरी राधा के पीछे।