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Bioscope S2: राज कपूर ने इस लेखक से छीना ‘प्रेम रोग’ का निर्देशन, संतोष आनंद ने फिर जीता फिल्मफेयर

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 31 Jul 2021 07:05 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Prem Rog Raj Kapoor Rishi Kapoor Jainendra Jain Padmini Kolhapure Rajiv
प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

हिंदी सिनेमा में जितने भी महान निर्देशक हुए हैं सबने अपने लेखकों की खूब अच्छे से खातिरदारी की, उनका सम्मान किया और जब भी जरूरत पड़ी उनके काम आए। अपने नियमित लेखकों के पास जब उन्हें कुछ अपनी पसंद का नहीं मिलता तो वह नए लेखक तलाश भी लाते। टाइम्स ऑफ इंडिया में काम करने वाले जैनेंद्र जैन को हिंदी सिनेमा के शो मैन राज कपूर ऐसे ही अपने साथ ले आए थे। जैनेंद्र जैन बंबई में टाइम्स ऑफ इंडिया में नौकरी करते करते राज कपूर की संगत में आए और उन दिनों आए जब राज कपूर फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ बनाने के बाद कंगाल से हो गए थे। जैनेंद्र जैन के लिखे ‘बॉबी’ के संवादों को राज कपूर ने पसंद किया। इसी फिल्म से आर के स्टूडियो की किस्मत बदली। इस फिल्म के बाद जैनेंद्र जैन ने राज कपूर के साथ ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ में भी काम किया। साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रेम रोग’ के संवाद भी जैनेंद्र जैन ने ही लिखे। इस फिल्म की कहानी कामना चंद्रा की है, जी हां, निर्देशक तनूजा चंद्रा और फिल्म समीक्षक अनुपमा चंद्रा की मां कामना चंद्रा। उनके बेटे विक्रम चंद्रा के उपन्यास पर ही सीरीज ‘सैक्रेड गेम्स’ बनी।

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प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

जैनेंद्र जैन को निर्देशित करनी थी ‘प्रेम रोग’

कम लोगों को ही पता है कि राज कपूर अपने खास लोगों में जैनेंद्र जैन की गिनती करते थे और फिल्म ‘प्रेम रोग’ का निर्देशन भी वह जैनेंद्र जैन से ही करवाने वाले थे, लेकिन फिल्म की कथा, पटकथा और संवाद जब तीनों राज कपूर के सामने आए तो उन्होंने खुद ये फिल्म निर्देशित करने का फैसला कर लिया। हालांकि जैनेंद्र जैन ने इसके लिए कभी सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा और बाद में आर के स्टूडियो की फिल्मों ‘हिना’ और ‘प्रेम ग्रंथ’ के लिए भी काम किया लेकिन ‘प्रेम रोग’ का निर्देशन न मिलने से वह इतना व्यथित हुए कि उन्होंने इस फिल्म के रिलीज होते ही अपनी खुद की फिल्म शुरू कर दी। जैकी श्रॉफ, रति अग्निहोत्री और खुशबू स्टारर ये फिल्म थी ‘जानू’। ये फिल्म 1985 में रिलीज हुई। इस फिल्म के निर्देशक थे जैनेंद्र जैन और इसका निर्माण भी उन्होंने खुद ही किया।

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प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

देवदास’ की कहानी का रूपांतरण

कामना चंद्रा वैसे तो लेखन का बड़ा नाम रही हैं लेकिन फिल्म ‘प्रेम रोग’ की कहानी को अगर ध्यान से देखें तो शरत चंद्र के उपन्यास ‘देवदास’ की कहानी पर ही आधारित है। यहां भी कहानी का नायक देव ही है, देवधर है उसका पूरा नाम। ठाकुर की बेटी मनोरमा और देव दोनों साथ खेल कूद कर बड़े हुए। ठाकुर की मदद से ही वह शहर पढ़ने जाता है। लौटकर आता है तो रमा बड़ी हो चुकी है। घर की गरीबी आड़े आती है और वह अपने मन की बात कह नहीं पाता है। इसी बीच मनोरमा की शादी हो जाती है और अगले ही दिन वह विधवा भी हो जाती है। ‘अनुज वधू भगिनी सुत नारी, सुन सठ कन्या सम ए चारी’ पढ़ने व मानने वाले देश में जेठ रमा का बलात्कार करता है। वह वापस अपने मायके लौट आती है। देव एक बार फिर से मनोरमा के चेहरे पर वही मुस्कान देखना चाहता है। और, उसे बताता है कि वह उसे अब भी प्यार करता है।


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प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

गीतकारों की कलम के बेहतरीन कमाल

सोचता हूं कि मेरी आंखों ने
क्यों सजाए थे प्यार के सपने
तुझसे मांगी थी इक ख़ुशी मैंने
तूने ग़म भी नहीं दिए अपने
***
ज़िन्दगी बोझ बन गई अब तो
अब तो जीता हूं और न मरता हूं
मैं तुझे कल भी प्यार करता था
मैं तुझे अब भी प्यार करता हूं


इस गीत को लिखा दिल्ली के मशहूर शायर रहे अमीर कजलबाश ने। इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर के बेस्ट लिरिसिस्ट कैटेगरी में नॉमीनेशन भी हासिल हुआ। फिल्म का गाना ‘भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राज कंवर’, गाना लिखा था पंडित नरेंद्र शर्मा ने। वही नरेंद्र शर्मा जिन्हें बी आर चोपड़ा ने अपनी मेगा सीरीज महाभारत का सर्वे सर्वा बनाया था। ध्यान देकर देखेंगे तो ये गाना वहीं शूट हुआ है जहां यश चोपड़ा ने फिल्म सिलसिला का मशहूर गाना ‘देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए..’ शूट किया था।

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प्रेम रोग - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

संतोष आनंद को मिला फिल्मफेयर पुरस्कार

फिल्म ‘प्रेम रोग’ के गानों की धुन बनाने के लिए राज कपूर ने अपने फेवरिट संगीतकारों शंकर जयकिशन की बजाय लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को लिया और लक्ष्मी-प्यारे अपने साथ इस फिल्म में मनोज कुमार के फेवरिट गीतकार संतोष आनंद को ले आए। संतोष आनंद ने इस फिल्म के तीन सबसे सुपरहिट गाने लिखे। पहला तो लता मंगेशकर का कमाल का गाया गाना है, ‘ये गलियां ये चौबारा यहां आना ना दोबारा’, दूसरा गाना है लता मंगेशकर और सुरेश वाडेकर का गाया गाना ‘मोहब्बत है क्या चीज हमको बताओ’ और तीसरा गाना रहा सुधा मल्होत्रा और अनवर का गाया गीत ‘ये प्यार था या कुछ और था..’। फिल्म के गाने ‘मोहब्बत है क्या चीज हमको बताओ’ के लिए संतोष आनंद का नाम भी उस साल फिल्मफेयर पुरस्कारों में बेस्ट लिरिसिस्ट के तौर पर नॉमीनेट हुआ और ये पुरस्कार जीता भी संतोष आनंद ने ही। ये संतोष आनंद का दूसरा फिल्मफेयर पुरस्कार रहा, इसके पहले उन्होंने मनोज कुमार की फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के गाने ‘मैं ना भूलूंगा..’ के लिए ये पुरस्कार जीता था।


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