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रिलीज से पहले पढ़ लीजिए 'पद्मावत' का Review, विरोध क्यों हो रहा ये समझ से बाहर

Thu, 25 Jan 2018 10:05 AM IST
पूजा मेहरोत्रा
पूजा मेहरोत्रा Updated Thu, 25 Jan 2018 10:05 AM IST
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Padmavat REVIEW: Padmaavat Movie review of deepika padukone
पद्मावत

'पद्मावत' REVIEW: रिलीज से पहले प्रोड्यूसर-डायरेक्टर भंसाली ने प्रेस शो रखा जिसे देखने के बाद जर्नलिस्ट्स ने क्या रिव्यू दिया ‘पद्मावत’ पर। फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज होने तक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती से पद्मावत हो गई। लेकिन फिल्म का विवादों ने पीछा नहीं छोड़ा और न ही करणी सेना ने। भारी विवादों के बीच आखिरकार 25 जनवरी को फिल्म रिलीज होने को तैयार है। पूरी फिल्म में विवाद की वजह फिलहाल ढूंढे नहीं मिल रही है। लेकिन वाह-वाह करने और राजपूतों की आन-बान शान को देखकर तालियां बजाने और गर्व करने की वजहें फिल्म में कई जगह दिखाई दे रही हैं।



यही नहीं राजपूत अपनी  बुद्धिमत्ता और रण में पारंगत रानियों पर गर्व भी कर सकते हैं। कह सकते हैं कि भले ही रानियां पर्दे में रहा करती थीं लेकिन वक्त पड़ने पर दुश्मनों को अपनी अक्ल से बुद्धिमत्ता से दांत खट्टे करने में माहिर थीं। रानी पद्मावती के इस बेजोड़ नमूने को संजय लीला भंसाली ने बखूबी दिखाने की कोशिश की है। 

Padmavat REVIEW: Padmaavat Movie review of deepika padukone
पद्मावत

अब बात फिल्म की जिनसे राजपूत समुदायों को नाराजगी हो सकती थी। पहले ही बताया गया है कि फिल्म पूरी तरह से राजपूतों की आन बान शान के इर्द-गिर्द है लेकिन इस बात पर भी कोई शक नहीं है कि फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी के पराक्रम को खूब बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। यानि सुपर विलेन खिलजी। हां, फिल्म के विवाद की वजह राजपूतों की हार को दिखाया जाना हो सकता है, क्योंकि राजपूतों की डिक्शनरी में हार शब्द नहीं। ​जिज्ञासावश भले ही दर्शक फिल्म देख कर भंसाली की जेबें भर दें परंतु तात्कालिक सिनेमाई चमक-दमक की धूल जब समय के साथ बैठेगी और सब साफ-साफ दिखेगा तब इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा।

युद्ध के दौरान धोखे से मारे गए मेवाड़ के राजा महारावल रतन सिंह की हार और पद्मावती का जौहर भले ही साहसिक रहा हो लेकिन खिलजी से हुई हार को अपमान की वजह नहीं माना जा सकता है क्योंकि फिल्म में रतन सिंह को धोखे से मारा जाता है। फिल्म में सुल्तान ए हिन्द अलाउद्दीन खिलजी के सामने एक एक करके शहीद होते सैनिकों की कहानी कोई भी राजपूत याद नहीं करना चाहता है और इस फिल्म के विरोध की वजह भी यही हो सकती है। क्योंकि फिल्म में खिलजी का रानी पद्मावती के साथ कोई ऐसा सीन नहीं है जिसके चलते विरोध देशभर में चल रहा है। 

Padmavat REVIEW: Padmaavat Movie review of deepika padukone
पद्मावत

फिल्म की कहानी भी काफी सरल है। अलाउद्दीन खिलजी सल्तनत में अपने चाचा ससुर जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर गद्दी पर बैठता है। वहीं महारावल रतन सिंह सिंहल की राजकुमारी पद्मावती को अपनी 11 वीं रानी बना कर चित्तौड़ ले आते हैं। वैसे फिल्म में कहीं नहीं दिखाया गया है कि रतन सिंह की कितनी रानियां हैं। महारावल के गुरु का दिल पद्मावती की खूबसूरती और बुद्धिमत्ता पर आ जाता है जिसके चलते पद्मावती के सुझाव पर रतन सिंह उन्हें देश निकाला दे देते हैं।

अपमानित राजगुरु चित्तौड़ की बर्बादी की शपथ लेता है और सनकी सुल्तान अलाउद्दीन को पद्मावती के रूप के इतने किस्से सुनाता है कि वो उसे बिना देखे ही मोहित हो जाता है। इसके बाद शुरू होती है वो जंग जो जिसे देखने के लिए एकबार सिनेमाहॉल का रुख करना ही चाहिए। इस फिल्म में खिलजी-महारावल-पद्मावती के बीच की राजनीतिक खींचतान को जिस तरह दिखाया गया है वो कमाल है। रानी की अक्लमंदी का बेजोड़ नमूना तब दिखता है जब रानी अपने राजा को खिलजी की कैद से छुड़ाने के लिए कुछ शर्त रखती है और खिलजी उनकी सारी शर्तें मान लेता है। और वहीं पर आधी जंग पद्मावती जीत लेती हैं। 
 



 

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Padmavat REVIEW: Padmaavat Movie review of deepika padukone
पद्मावत

संजय लीला भंसाली पर इस फिल्म को लेकर भले ही राजपूतों और पद्मावती को लेकर कई आरोप लग रहे हों लेकिन उन्होंने राजपूतानियों को गर्व करने का मौका बार-बार दिया है। हां जहां तक फिल्म के निर्देशन की बात है तो भंसाली साहब कुछ-कुछ बाहुबली फिल्म से प्रभावित दिखे हैं। फिल्म में युद्ध के सीन को बखूबी फिल्माया है। 3डी फिल्म होने की वजह से दर्शक काफी जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। अगर इस फिल्म को राजपूतों के विवाद से उपर उठकर देखें तो यह एक जबरदस्त फिल्म है जबरदस्त निर्देशन और शानदार अभिनय लेकिन फिल्म के गाने कमाल नहीं कर पाए हैं। रणवीर सिंह ने सनकी सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के रोल में जान डाल दी है। उनका सनकीपन आकर्षित करता है।

दीपिका और शाहिद अपने किरदारों को बखूबी निभाते हैं। लेकिन शाहिद को थोड़ा और बलशाली दिखाए जाने की जरूरत थी क्योंकि उस समय के रजवाड़े करीब 7-8 फिट के अच्छे खासे डीलडौल वाले थे। एक मिस्र से आए गुलाम के किरदार में जिम स्राभ फिल्म में जान डालते हैं और दर्शकों के दिमाग पर अपनी छाप छोड़ने में सफल होंगे। वो समलैंगिक भी दिखते हैं, योद्धा भी दिखते हैं और हैरान भी करते हैं।

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दीपिका पादुकोण

फिल्म का एक दृश्य जो आपको ताली बजाने पर मजबूर कर सकता है, वो है महारावल के सेनापति गोरा सिंह की मौत का दृश्य। इस दृश्य के बाद आप बरबस वाह कहेंगे.. गोरा सिंह का सिर कट चुका होता है लेकिन उसका धड़ तलवार भांज रहा होता है। कुछ ऐसा ही राजा रतन सिंह के साथ भी दिखाया गया है। उनकी तलवार मरते-मरते भी खिलजी की गर्दन पर होती है और वो झुकता नहीं है।

हालांकि अब पद्मावत को करणी सेना की हरी झंडी मिल गई है लेकिन फिल्म में कई एडिट किए गए हैं जिनमें राजपूतों का महिमामंडन किया गया है और दिखाया गया है कि कैसे उसूलों के लिए लड़ते हुए राजपूत को धोखे से खिलजी ने हराया। लेकिन अफवाहों और विरोध प्रदर्शन को झेल रही फिल्म कई जगह ऐसी लगती है कि हां, फिल्म को काटा गया है। कई सीन हटाए गए हैं। राजपूतों को महान दिखाने की कोशिश की गई है। लेकिन अब विरोध क्यों हो रहा है जब फिल्म में सिर्फ राजपूतों का महिमामंडन हो रहा है।

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