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Movie Review: नई पीढ़ी की 'मनमर्जियां' है अनुराग कश्यप की फिल्म

Fri, 14 Sep 2018 04:48 PM IST
रवि बुले, अमर उजाला
रवि बुले, अमर उजाला Updated Fri, 14 Sep 2018 04:48 PM IST
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movie review of anurag kashyap film manmarziyaan
Manmarziyaan

-निर्माताः आनंद एल.राय

-निर्देशकः अनुराग कश्यप

-सितारेः तापसी पन्नू, विक्की कौशल, अभिषेक बच्चन

रेटिंग **


सरल शब्दों में मनमर्जियां अनुराग कश्यप की ‘हैप्पी भाग जाएगी’ है। भले हैप्पी का नाम यहां रूमी (तापसी) है परंतु वह लगातार भाग ही रही है। कभी बाइक पर, कभी जीप में, कभी रिक्शा में और कभी अपने दो पैरों पर। वह प्यार में कम, फ्यार में ज्यादा है। अंग्रेजी शब्दकोश को समृद्ध करते ‘फ्यार’ का मतलब लेखक-निर्देशक ने समझाया है, वह प्यार जिसमें प्रेम की कोमल भावनाएं जिस्म के कामुक रासायनों की फायर यानी अग्नि में धधकती रहती हैं। पहले रूमी उस मुंडे (विक्की) के साथ खेतों-खलिहानों-मोहल्ले की छतों से होकर दूसरे शहर को भागती है, जो फ्यार में पार्टनर है। परंतु रूमी का परिवार उसकी शादी कराना चाहता है।

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Manmarziyaan

मुंडा हां कहने से हिचकिचाता है तो नाराज रूमी फॉरेन रिटर्न बंदे (अभिषेक) से ब्याह कर लेती है। लेकिन फिर उससे दूर भागती है क्योंकि उसे फ्यार का बुखार है! विदेश से लौटा बंदा उसकी ब्यूटी पर इतना फिदा है कि इंतजार करता रहता है, रूमी कब कूल होगी! जब कूल होगी तो प्यार करेगा। क्या रूमी कूल होगी? क्या उसके फ्यार का बुखार ठंडा पड़ेगा? क्या कमिटमेंट से भागा मुंडा रूमी को जिंदगी में सैटल होने देगा? फॉरेन रिटर्न दूल्हा रूमी का कब तक इंतजार करेगा?

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Manmarziyaan

नए जमाने के प्यार के नाम पर फिल्म में नई पीढ़ी की मनमर्जियां हैं। फिल्म का एक गाना कहता है कि प्यार ग्रे है। काले और सफेद का मिक्स। अनुराग की फिल्में काले-सफेद से आगे नहीं बढ़तीं। मनमर्जियां में अनुराग ने यह बताने का मौका गंवा दिया कि उनके अंदाज-ए-बयां में विविधता है। ग्रे अनुराग को पसंद करने वाले ही उनकी यह फिल्म ओढ़-बिछा पाएंगे। फिल्म में रफ्तार है, भावनाओं की तीव्रता है, ऐक्टरों का काम अच्छा है लेकिन कहानी गढ़ी हुई है।

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इसमें सहजता और संतुलन गायब है। तीन मुख्य पात्रों के अलावा यहां बाकी सबका खून ठंडा है। वे कॉमिक-से हो जाते हैं। फ्यार की क्रांति करते निर्देशक अंत में घुटने टेक देते हैं। जब प्यार में हमेशा की तरह पति की जीत दिखाते हैं। मनमर्जियां के परिवेश, भाषा, गीत-संगीत पर पंजाबियत हावी है। मुख्य किरदारों के संवाद छोड़ें तो लगता है, पंजाबी फिल्म देख रहे हैं। तापसी पन्नू और विक्की कौशल का अभिनय बेहतरीन है। वह इसे अपनी यादगार फिल्मों में रख सकते हैं। तापसी नई पीढ़ी की प्रिटी जिंटा हो चली हैं।

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Manmarziyaan

तेज-तर्रार-चुलबुली-सी इमेज उन्होंने अपना ली है। परंतु लगातार एक-सी भूमिकाएं करते हुए उनके अभिनय की सीमाएं दिखने लगी हैं। हरे-नीले स्पाइक्स बालों वाली डिजाइनर कटिंग में विक्की कौशल यहां याद रह जाते हैं लेकिन अभिषेक बच्चन की एंट्री के बाद लेखक-निर्देशक ने उनके किरदार पर ध्यान नहीं दिया। अभिषेक को जमाने के लिए विक्की पटरी से उतार दिए गए। इससे कहानी का नुकसान हुआ। अभिषेक ऐक्टिंग में मेहनत करते हैं परंतु उनके चेहरे पर भावनाओं का उतार-चढ़ाव अब भी नहीं के बराबर दिखता है। चार साल बाद वह लौटे मगर तापसी-विक्की से पीछे ही गए।

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