एशिया महाद्वीप के सबसे चर्चित निर्देशक माजिद मजीदी द्वारा बॉलीवुड में फिल्म बनाना ऐतिहासिक घटना है। हिंदी सिनेमा की धड़कनों के बचे रहने के लिए ऐसे और निर्देशकों की सख्त जरूरत है। बियॉन्ड द क्लाउड्स अंग्रेजी शीर्षक वाली हिंदी फिल्म है। सिनेमा के छात्र माजिद की इस फिल्म से अपनी मिट्टी की कहानी कहने का अंदाज सीख सकते हैं और पॉपकॉर्न छाप फिल्में बनाने वाले देख सकते हैं कि वे कैसे अपने दर्शकों से छल करते हैं। इसे देख कर मजीदी अपने निर्देशकों से अधिक अपने लगते हैं। बियॉन्ड द क्लाउड्स संवेदना, मानवता, रिश्तों और उम्मीदों का सिनेमा है। यहां आपको कहानी शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ता क्योंकि वह पहले दृश्य से ही शुरू हो चुकी है और देखते-देखते रफ्तार पकड़ लेती है। हर अगला दृश्य कहानी को आगे बढ़ाता है और संवेदना की धार तेज होती जाती है। हिंदी सिनेमा में ऐसा अब दुर्लभ होता है।
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MOVIE REVIEW: 'बियॉन्ड द क्लाउड्स' के स्टार हैं ईशान खट्टर, पहली ही फिल्म में छू लिया सबका दिन
रवि बुले
Updated Fri, 20 Apr 2018 12:52 PM IST
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एशिया महाद्वीप के सबसे चर्चित निर्देशक माजिद मजीदी द्वारा बॉलीवुड में फिल्म बनाना ऐतिहासिक घटना है। हिंदी सिनेमा की धड़कनों के बचे रहने के लिए ऐसे और निर्देशकों की सख्त जरूरत है। बियॉन्ड द क्लाउड्स अंग्रेजी शीर्षक वाली हिंदी फिल्म है। सिनेमा के छात्र माजिद की इस फिल्म से अपनी मिट्टी की कहानी कहने का अंदाज सीख सकते हैं और पॉपकॉर्न छाप फिल्में बनाने वाले देख सकते हैं कि वे कैसे अपने दर्शकों से छल करते हैं। इसे देख कर मजीदी अपने निर्देशकों से अधिक अपने लगते हैं। बियॉन्ड द क्लाउड्स संवेदना, मानवता, रिश्तों और उम्मीदों का सिनेमा है। यहां आपको कहानी शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ता क्योंकि वह पहले दृश्य से ही शुरू हो चुकी है और देखते-देखते रफ्तार पकड़ लेती है। हर अगला दृश्य कहानी को आगे बढ़ाता है और संवेदना की धार तेज होती जाती है। हिंदी सिनेमा में ऐसा अब दुर्लभ होता है।
एशिया महाद्वीप के सबसे चर्चित निर्देशक माजिद मजीदी द्वारा बॉलीवुड में फिल्म बनाना ऐतिहासिक घटना है। हिंदी सिनेमा की धड़कनों के बचे रहने के लिए ऐसे और निर्देशकों की सख्त जरूरत है। बियॉन्ड द क्लाउड्स अंग्रेजी शीर्षक वाली हिंदी फिल्म है। सिनेमा के छात्र माजिद की इस फिल्म से अपनी मिट्टी की कहानी कहने का अंदाज सीख सकते हैं और पॉपकॉर्न छाप फिल्में बनाने वाले देख सकते हैं कि वे कैसे अपने दर्शकों से छल करते हैं। इसे देख कर मजीदी अपने निर्देशकों से अधिक अपने लगते हैं। बियॉन्ड द क्लाउड्स संवेदना, मानवता, रिश्तों और उम्मीदों का सिनेमा है। यहां आपको कहानी शुरू होने का इंतजार नहीं करना पड़ता क्योंकि वह पहले दृश्य से ही शुरू हो चुकी है और देखते-देखते रफ्तार पकड़ लेती है। हर अगला दृश्य कहानी को आगे बढ़ाता है और संवेदना की धार तेज होती जाती है। हिंदी सिनेमा में ऐसा अब दुर्लभ होता है।
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फिल्म मुंबई की गरीबी में पलने वाले भाई-बहन आमिर (ईशान खट्टर) और तारा (मालविका मोहनन) की है। आमिर ड्रग्स के धंधे में है और तारा धोबीघाट पर कपड़े धोती और इस्तरी करती है। उनके माता-पिता कार एक्सीडेंट में मारे गए थे और तारा ने आमिर का लालन-पालन किया मगर उसके शराबी पति की मार खा-खा कर नाराज आमिर एक दिन भाग गया। तारा ने भी पति को छोड़ दिया। ड्रग में धंधे में पुलिस से भागता आमिर अचानक तारा से मिलता है।वह उसे बचाती और अपने घर ठहराती है। उधर, धोबीघाट पर रहने वाला अक्षी (गौतम घोष) तारा से रेप की कोशिश करता है और बदले में वह जानलेवा प्रहार करती है। अब तारा पुलिस हिरासत में। अक्षी के बयान के बाद ही उसकी रिहाई संभव है। अक्षी अस्पताल में जीवन-मौत के
बीच संघर्ष कर रहा है। यहां से आमिर का अक्षी को जिंदा रखने तथा बहन को जेल से छुड़ाने का संघर्ष शुरू होता है। कहानी में नए किरदार भी जुड़ते हैं और थ्रिल के बीच संवेदनाओं की नई ऊंचाइयों को छूती है। छोटे-छोटे दृश्यों से मजीदी अपनी कहानी को रचते हैं और बगैर हड़बड़ी के ठहराव के साथ अपनी बात कहते हैं।
बीच संघर्ष कर रहा है। यहां से आमिर का अक्षी को जिंदा रखने तथा बहन को जेल से छुड़ाने का संघर्ष शुरू होता है। कहानी में नए किरदार भी जुड़ते हैं और थ्रिल के बीच संवेदनाओं की नई ऊंचाइयों को छूती है। छोटे-छोटे दृश्यों से मजीदी अपनी कहानी को रचते हैं और बगैर हड़बड़ी के ठहराव के साथ अपनी बात कहते हैं।
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माजिद ने अपनी ईरानी फिल्मों वाली सादगी को यहां बनाए रखा है। हर दृश्य में जिंदगी बयान होती है। इससे भी अधिक मजीदी सिनेमा में रीयलिटी के नाम पर स्वाहा होती कला को अपने यहां बचाए रखते हैं। फिल्म के दोनों मुख्य कलाकार बढ़िया हैं। ईशान के हिस्से में दृश्य अधिक हैं और उन्होंने जिम्मेदारी से काम किया है। यह उनकी पहली फिल्म है और वह भविष्य के लिए उम्मीदें जगाते हैं। वहीं साउथ से आईं मालविका मोहनन अपनी मौजूदगी को दर्ज कराने में कामयाब रहीं। हिंदी में यह उनकी पहली फिल्म है। एआर रहमान ने बैकग्राउंड म्यूजिक डिजाइन किया है और वह कहानी में गुंथा हुआ है। उसे भी आप महसूस कर सकते हैं। बियॉन्ड द क्लाउड्स में मुंबई किसी अंडरवर्ल्ड डॉन या शातिर राजनेता की नहीं दिखती। इसे इस तरह शूट किया गया है कि मुंबई साधारण लोगों का असाधारण शहर नजर आता है। माजिद मुंबई की अनदेखी तस्वीर और सिनेमा के एक जीवंत अनुभव से रू-ब- रू कराते हैं।