-निर्माता- निर्देशकः शुजित सरकार
Movie Review: अप्रैल में वरुण धवन लाए October का मौसम, देखने से पहले जान लें कैसी है फिल्म
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डैन क्यूट-सा बंदा है और मासूम बातें करता है। वह पांच सितारा माहौल में फिट नहीं हो पाता। जबकि शिउली संजीदा और बुद्धिमान है। एक रात शिउली पार्टी के दौरान होटल की तीसरी मंजिल से गिर कर कोमा में चली जाती है। इसके बाद डैन सिर्फ अस्पताल के चक्कर लगाता है। दिन, हफ्ते, महीने बीतते जाते हैं। उसे विश्वास है कि शिउली एक दिन जरूर कोमा से बाहर आएगी। वह उससे बिना इजहार वाला प्यार करता है। असल में, अक्टूबर प्रेम कहानी नहीं है बल्कि प्रेम के बारे में कहानी है। जिसमें कितना प्रेम देखना है, यह आप ही तय करें। वरुण धवन के करिअर की यह अब तक की सबसे ठंडी फिल्म है।
एक्सीडेंट के बाद प्रेमी/पार्टनर के कोमा में चले जाने और उसकी वापसी के इंतजार की खूबसूरत कहानी 2016 में आई निर्देशक अनु मेनन की नसीरूद्दीन शाह-कल्कि केकला स्टारर ‘वेटिंग’ थी। उसके किरदार ठोस और जिंदगी के नजदीक थे। कहानी यथार्थ के धरातल पर खड़ी थी, जिसमें जिंदगी-मौत के द्वंद्व से पैदा होने वाला अनजाना-अंधियारा डर था तो उम्मीद की किरण भी। प्रेम को लेकर दो नजरिये थे, एक भावुक और संवेदनशील। दूसरा, डरावना और यथार्थवादी। इन स्तरों पर शुजित की फिल्म कोई बात नहीं करती और खोखली साबित होती है। फिल्म में न दिल को छूने वाली बात है और न एंटरटेनमेंट।
शुजित और उनकी राइटर जूही चतुर्वेदी ने कहानी कम और दृश्य ज्यादा रचे। जिनकी रफ्तार बेहद धीमी और कहीं-कहीं उबाऊ है। तीन चौथाई फिल्म कृत्रिमता से भरे चमकीले होटल और ठंडी-बर्फीली संवेदनाओं वाले पांच सितारा अस्पताल में है। कई संवाद बनावटी हैं। वरुण धवन का किरदार ऐसा है कि उन्हें गोविंदा और सलमान का उत्तराधिकारी मानने वाले बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। अभिनय के स्तर पर भी वरुण के लिए यहां करने को कुछ विशेष नहीं था।
बनिता संधु ने फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा है। उनकी स्थिति काफी कमजोर है। वह आधे समय कोमा में होने का ही अभिनय करती रहीं। शिऊली बांग्ला भाषा में सुगंधित-सफेद हरसिंगार के फूल को कहते हैं, जो रात को खिलता और सुबह मुरझा जाता है। महानगरों को छोड़ कर अक्टूबर के बॉक्सऑफिस और बनिता के करिअर पर इसी फूल-सा खतरा दिख रहा है। शुजित निराश करते हैं। अक्टूबर उनकी यहां (2005), विक्की डोनर (2012) और पीकू (2015) के मुकाबले कमतर फिल्म है।