आंसू में बड़ी ताकत है। आज तक ये आंसू महिलाओं का हथियार माना जाता रहा है और महिलाओं की कमजोरी की निशानी भी। लेकिन जब ये आंसू किसी पुरुष की आंखों से निकले हैं तो अब उसे दर्द और दुख नहीं चालबाजी के रूप में देखा जाना चाहिए। दोस्त के सामने अगर आंसू निकाले तो दोस्त अपनी पूरी दुनिया छोड़ कर उसके साथ हो लेता है। हल्की-फुल्की लेकिन गहरी बात कह रही है 'सोनू के टीटू की स्वीटी'।
Movie Review: रोमांस और दोस्ती की परिभाषा बदल देगी 'सोनू के टीटू की स्वीटी'
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फिल्म एक बार फिर कई मिथक तोड़ती नजर आ रही है। फिल्म में कई सीनबोर करेंगे लेकिन रोमांच और संस्पेस भी बना रहेगा कि अब क्या होगा। एक कहावत चली आ रही है कि हर झगड़े की जड़ महिला होती है और जब दोस्तों के बीच महिला आ जाती है तो दोस्ती खत्म हो जाती है। लेकिन फिल्म ने इस मिथक को भी एक बार तोड़ा फिल्म के एक सीन में स्वीटी टीटू के दोस्त को चैलेंज करते हुए कहती है "रोमांस, दोस्ती और लड़की में हमेशा जीत लड़की की होती है।"
अब दर्शक पूरी फिल्म में यही सोचता है कि सदियों से कही जा रही कहावत है। लड़का लड़की के साथ जाएगा और दोस्ती को ठेंगा दिखा देगा। प्यार और दोस्ती के टकराव के लिए इस पंचलाइन पर लेखक-निर्देशक लव रंजन ने पूरी फिल्म का ताना बाना बुना है। प्यार का पंचनामा सिरीज के लिए मशहूर रहे लेखक-निर्देशक लव रंजन ने इस बार रोमांस और ब्रोमांस के बीच टक्कर को तरजीह दी है। सोनू की भूमिका निभा रहे कार्तिक आर्यन युवा लड़कियों का दिल जीतने में कामयाब होंगे वहीं टीटू सनी सिंह लल्लू लेकिन अच्छे लगे हैं।
कहानी थोड़ी इंट्रेस्टिंग है। आज का युवा कई कई बार प्यार में पड़ता है ऐसा ही है टीटू जो बार-बार प्यार में पड़ता है, लेकिन हर बार गलत लड़की के चक्कर में पड़कर उसका दिल टूट जाता है। दिल टूटने पर उसका बचपन का भाई सरीखा दोस्त सोनू न केवल उसे रोने के लिए कंधा देता है, बल्कि उसे गलत लड़की के चंगुल से बचाता भी है। 13 साल की उम्र में मां के गुजर जाने के बाद सोनू को टीटू के परिवार ने ही पाला है और वह उसी परिवार को अपना परिवार समझता है। इस परिवार में दादा घसीटा दादी, मम्मी, पापा और मामा हैं। ये सभी सदस्य सोनू को अपने बेटे और वारिस की तरह ही प्यार करते हैं। वह भी पूरे परिवार को अपना परिवार मानता है।
इस फिल्म में सेंसर बोर्ड की एक कार्रवाई पर आपको हंसी आ सकती है। कई सीन में एक प्रचलित गाली को बार-बार म्यूट किया गया है लेकिन शराब वाले एक गीत को धुआंधार डांसिग मोड में दिखाया गया है। जिसमें लड़की को न केवल व्हिसकी पसंद है बल्कि वह छोटे छोटे पैग भी पीती है।
लव और ब्रेकअप की झंझट से तंग टीटू शादी करने का फैसला करता है। अरेंज मैरिज के तहत उसे स्वीटी (नुसरत भरूचा) का रिश्ता आता है। टीटू और पूरे परिवार को स्वीटी शादी के लिए आदर्श और परफेक्ट लड़की लगती है, मगर बचपन से ही टीटू के संरक्षक का रोल निभानेवाले सोनू को लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है। स्वीटी एक परफेक्ट लड़की है। वह एक अच्छी बहू है, अच्छी बेटी है और परफेक्ट गर्लफ्रेंड है। वह इतनी अच्छी और परफेक्ट कैसे हो सकती है? अब वह नहीं चाहता कि टीटू स्वीटी से शादी करे। वह स्वीटी को गलत और झूठी साबित करने की तमाम तिकड़म लड़ाता है। स्वीटी भी सोनू को ईंट का जवाब पत्थर से देती है।