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Movie Review: किन वजहों से देखें या ना देखें 'जुड़वा 2'
Fri, 29 Sep 2017 06:47 PM IST
रवि बुले
रवि बुले
Updated Fri, 29 Sep 2017 06:47 PM IST
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जुड़वां 2 बॉलीवुड की पारंपरिक मसाला रोमांटिक कॉमेडी है। अगर आप वक्त काटने के इरादे से इसे देखते हैं तो सलमान खान स्टारर जुड़वा (1997) की यह रीमेक एक हद तक आपको एंटरटेन करती है। बीस साल में सिनेमा की दुनिया ने बहुत तरक्की की है, बेहतर होता कि कहानी के ढीले सिरे कसे जाते। स्क्रिप्ट को और मनोरंजक बनाया जाता। खास तौर पर दूसरे हिस्से में फिल्म ढलान पर है। हीरो और विलेन की दुश्मनी में कोई उफान ही नहीं आता। जिससे कहानी बनावटी हो जाती है।
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बेहतर है कि फिल्म को कहानी के लिए न देखा जाए, बल्कि वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग और जैकलीन फर्नांडिस के साथ उनके रोमांटिक रसायन का आनंद लिया जाए। दोनों की जोड़ी अच्छी लगी है। वहीं तापसी पन्नू को ऐसी मसाला फिल्मों में खुद को ढालने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। उन पर पिंक और नाम शबाना जैसी छवि जोरदार ढंग से चिपक चुकी हैं। जुड़वां 2 कमोबेश मूल फिल्म के रास्ते पर चली है। एक घर में जुड़वां बेटे होते हैं।
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जिनमें से एक (राजा) को विलेन उठा ले जाता है। दूसरा (प्रेम) लंदन में माता-पिता के साथ सुख-सुविधाओं में पलता है और संगीत की पढ़ाई के लिए अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमीशन लेता है। प्रेम सुंदर-सुशील-संस्कारी है। राजा मुंबई के वर्सोवा की गरीबी में बड़ा हुआ है। वह हट्टा कट्टा, टपोरी और लड़ाका है। हालात राजा को भी लंदन पहुंचाते हैं और वहां कहानी रफ्तार पकड़ती है। जिसमें रोमांस और कॉमेडी का ट्रेक मनोरंजनक है। इसे ही आप पैसा वसूल मान सकते हैं।
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आखिरी आधे घंटे में विलेन की एंट्री होती है और फिल्म कमजोर पड़ जाती है। 1990 के दशक के सिनेमा की एहसास पूरी फिल्म में बना रहता है। इसके संगीत में भी रीमेक गाने ‘चलती है क्या 9 से 12’ और ‘ऊंची है बिल्डिंग’ ही कानों को सुहाते हैं। नए वालों में दम नहीं है। जुड़वां 2 फिर साबित करती है कि वरुण धवन नई पीढ़ी के सबसे भरोसेमंद एंटरटेनर हैं। दोनों भूमिकाओं में उन्होंने अच्छा अभिनय किया और उनकी ही वजह से फिल्म की कई कमियां ढंक जाती है। जैकलीन के साथ जहां वरुण सहज हैं वहीं तापसी के साथ बात नहीं बनती।
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इसकी वजह तापसी स्वयं नजर आती हैं। राजपाल यादव और अनुपम खेर ने अपनी कॉमिक भूमिकाओं को बढ़िया ढंग से निभाया है। फिल्म पर डेविड धवन की पकड़ कॉमिक-रोमांटिक दृश्यों पर है। ऐक्शन दृश्य अच्छे नही हैं। किसी भी फिल्म में अच्छे क्लाइमेक्स की उम्मीद होती है परंतु यहां सलमान खान की डबल रोल में एंट्री के साथ जो क्लाइमेक्स दृश्य रचा गया, वह किसी टीवी शो जैसा आभास देता है। फिल्म को जहां सबसे ज्यादा उठना चाहिए, वहां वह सबसे नीचे नजर आती है।
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