फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Movie Review: वासन बाला के कमाल से अभिमन्यु ने तोड़ा बॉक्स ऑफिस का चक्रव्यूह

Tue, 19 Mar 2019 06:49 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Tue, 19 Mar 2019 06:49 PM IST
विज्ञापन
Movie Review of Vasan Bala film mard ko dard nahi hota
मर्द को दर्द नहीं होता
मूवी रिव्यू: मर्द को दर्द नहीं होता

कलाकार: अभिमन्यु दसानी, राधिका मदान, गुलशन देवैया, महेश मांजरेकर। 
निर्देशक: वासन बाला
बैनर: आरएसवीपी मूवीज
रेटिंग: ***1/2
पहले पहल जब इस फिल्म का नाम लोगों ने सुना तो लगा कि भला, ये क्या फिल्म है? अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म मर्द के संवाद से निकाले गए एक नए कलाकार की फिल्म के नाम को लेकर बनी ये उत्सुकता ही इस फिल्म की असली यूएसपी है। कंगना रनौत जैसे लोगों के निशाने पर ये फिल्म वंशवाद के मुद्दे को लेकर आ सकती है, लेकिन दर्शकों के निशाने पर ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इसलिए रहेगी कि आखिरकार हिंदी सिनेमा के निर्देशक भी रूटीन कहानियों से निकलकर डेडपूल वाले माहौल की फिल्में बनाने लगे हैं। वासन बाला की ये फिल्म होली के त्योहार पर युवाओं के लिए बिल्कुल सटीक तोहफा है।
Movie Review of Vasan Bala film mard ko dard nahi hota
सात साल पहले कान फिल्म फेस्टिवल में अपनी पहली ही फिल्म पेडलर्स से सुर्खियों में आए वासन बाला को अनुराग कश्यप जैसे बरगद की छाया से बाहर आने में बहुत वक्त लगा है। और, इस लंबे वक्त में उनकी सीजनिंग जितनी सही हुई है, मसान के निर्देशक नीरज घेवन को उससे ईर्ष्या हो सकती है। 

कहानी है सूर्या और सुपरी की। सूर्या को बीमारी है किसी तरह को चोट लगने पर दर्द न होने की। लेकिन, घाव तो उसके भी रिसते ही हैं। और, फिल्म में सिर्फ घाव ही नहीं रिसते। सपने रिसते हैं। एहसास रिसते हैं। इन रिसावों में किरदारों के भराव की ही कहानी है, मर्द को दर्द नहीं होता।

गुलशन देवैया के साथ वासन बाला ने पेडलर्स में काम किया था। यहां गुलशन की मौजूदगी ने फिल्म में दो फूल खिलाए हैं। दो फूल एक माली के चक्कर में फिल्म में तमाशा खूब होता है। और तमाशे की डोरियां जिसके हाथ में है, उस अभिमन्यु दसानी ने करियर की पहली फिल्म से जता दिया कि स्टार किड होना उनके लिए कोई तश्तरी में मिला प्रसाद नहीं है। अपना जन्म वह चुन नहीं सकते थे। लेकिन अपना कर्म उन्होंने बखूबी चुना है। ब्रूस ली और जैकी चैक के इस भक्त का जै बजरंग बली टाइप अंदाज हिट है। 
Movie Review of Vasan Bala film mard ko dard nahi hota
राधिका मदान के लिए वासन बाला ने ट्रेलर में री इंट्रोड्यूसिंग क्यों लिखा था, ये फिल्म देखने के बाद साबित होता है। टीवी से बड़े परदे की छलांग में जो पटाखा बीच में फुस्स हो गया था, उसने धमाका इस फिल्म ने किया है। वासन बाला ने अनुराग कश्यप स्कूल में सिनेमा पढ़ा है। इस स्कूल में अभिनेता हो या तकनीशियन घिसाई इतनी होती है इंसान हीरा जैसा दमक कर निकलता है। वासन का नंबर अब नगीना बनने का है। मर्द को दर्द नहीं होता उनके संघर्ष का इनाम है। 

वासन को फिल्म को अपने हिसाब से बनाने में जय पटेल के कैमरे की बहुत मदद मिली है। जय का कैमरा फिल्म में किसी किरदार की तरह घूमता है और जहां वह अटकता भी है, वहां प्रेमा सहगल की एडिटिंग मामला संभाल लेती है। फिल्म में म्यूजिक का स्कोप ज्यादा है नहीं, म्यूजिक अच्छा होता भी तो फिल्म देख रहे दर्शकों का फोकस खिसका सकता था। 

होली की मस्ती में फिल्म बिल्कुल आलू के करारे पापड़ों जैसी लगती है। अदाकारी और निर्देशक के रंग-गुलाल भी बिल्कुल सही बिखरे हैं। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता है को मिलते हैं साढ़े तीन स्टार।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed