बोल सियावर रामचन्द्र की जय
पवनसुत हनुमान की जय
हर हर महादेव की जय
पार्वती के पति भगवती पांडेजी की जय
जी हां, आज के बाइस्कोप में आपकी मुलाकात भगवती पांडे जी से ही होनी है। रिश्ते में ये चुलबुल पांडे के कुछ लगते तो नहीं लेकिन उनकी तरह रहते गंगाघाट पर ही हैं। बनारसी पान खाने वाला छोरा गंगा किनारे वाला अभी परदे पर उतरा नहीं था और न ही इसने अभी गंगा की सौगंध ही खाई थी। ये उन दिनों की बात है जब जमाना था गंगा घाट के रहने वाले भगवती पांडे का और वह खुल्लमखुल्ला लोगों को ये कहकर समझाते थे कि,
गंगा घाट का पानी पिया है
सबको मैं पानी पिला दूंगा
मुझको भला समझते हो क्या
तुम्हें हरिद्वार पहुंचा दूंगा
गंगा घाट का पानी पिया है....
तो सबको हरिद्वार पहुंचा देने का भौकाल बनाए भगवती पांडे की कहानी ये है कि ये रूप धरा था कपूर खानदान की राजकपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर के बाद आई पीढ़ी के युवराज रणधीर कपूर ने। रणधीर कपूर ने बड़े परदे पर अपना डेब्यू बतौर डायरेक्टर और बतौर एक्टर एक ही साथ किया फिल्म ‘कल आज और कल’ में। लेकिन उनको जल्द समझ आ गया कि सिर्फ डायरेक्टर बनकर उनकी गाड़ी सिनेमा में चलने नहीं वाली क्योंकि अभी उनके पिताजी की शौमैनी कायम थी। रणधीर कपूर को मनमोहन देसाई ने री-लांच किया फिल्म ‘रामपुर का लक्ष्मण’ में, फिल्म सुपरहिट रही। गाने लोकप्रिय हुए और रणधीर कपूर की गाड़ी चल निकली। आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘पोंगा पंडित’ के हीरो भी रणधीर कपूर ही हैं। 1 अगस्त 1975 को रिलीज हुई फिल्म ‘पोंगा पंडित’ लोगों को इसके गानों की वजह से ही याद रह गई। फिल्म के गीत लिखे राजेंद्र कृष्ण ने और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का है।
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पोंगा पंडित
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हिंदी फिल्मों में कभी रिश्तों पर गाने खूब बनते थे। मां-बेटे के गाने तो आपने दर्जनों देखें होंगे, भाई-भाई और बाप-बेटे का भी प्यार खूब दिखा। लेकिन, इन रिश्तों में जो रिश्ते चुहल और हंसी मजाक के होते हैं, उन पर गाने बहुत बाद में ‘नदिया के पार’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी फिल्मों के ही लोगों को याद रहे। ‘हम आपके हैं कौन’ में अपनी बड़ी बहन के घर आई छोटी बहन और बड़ी बहन के देवर के बीच फिल्माया गया गाना ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ तो कालजयी गीत बन चुका है। फिल्म ‘करण अर्जुन’ का गाना ‘छत पर सोया था बहनोई, मैं तने समझ कर सो गई..’ भी खूब हिट रहा। लेकिन, आपने कभी जीजा और साली के बीच छेड़छाड़ का कोई गीत ए ग्रेड हिंदी फिल्म में देखा है? थोड़ा और जोर डालेंगे दिमाग पर तो याद आएगा गाना ‘जीजा जी जीजा जी मेरी दीदी है अनाड़ी, इसे प्यार सिखलइयो....’। बाद में फिल्म ‘साजन बिना सुहागन’ और ‘सनम बेवफा’ में भी जीजा साली के गीत आए लेकिन फिल्म ‘पोंगा पंडित’ के इस गाने का लेवल ही अलग है।
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पोंगा पंडित
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हरिद्वार की हर की पैड़ी पर ऐसा कोई गीत आज के समय में तो नहीं ही फिल्माया जा सकता है। ये गाना पिछली सदी के आठवें दशक की शुरूआत में बिना किसी विघ्न बाधा के हरिद्वार और ऋषिकेष में गंगा के किनारे फिल्माया गया है और ऐसा कारनामा कर ले जाने वाले निर्देशक का नाम आपने मनमोहन देसाई की फिल्मों की ओपन क्रेडिट्स में खूब पढ़ा होगा, प्रयागराज। जी हां, मशहूर राइटर प्रयागराज ही फिल्म ‘पोंगा पंडित’ के डायरेक्टर थे। पिछली स्लाइड में जो गाना आपने देखा तो साली का रोल करने वाली सेकेंड हीरोइन प्रेमा नारायण को तो आप तुरंत पहचान गए होंगे, लेकिन लीड हीरोइन को आप पहचान पाए क्या? नहीं! तो चलिए मैं आपकी मदद कर देता हूं। ये मोहतरमा हैं, नीता मेहता और ये इनकी पहली हिंदी फिल्म है।
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पोंगा पंडित
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नीता मेहता को वैसे हिंदी फिल्में नियमित देखने वालों ने फिल्म ‘जानी दुश्मन’ में डोली में बैठने वाली दुल्हन के रूप में देखा है। फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में भी वह दिखी और भी दर्जन भर से ऊपर फिल्में उन्होंने की लेकिन सबसे प्रभावी किरदार उनको निर्माता सुरिंदर कपूर की इस फिल्म ‘पोंगा पंडित’ में ही मिला।
अगर आपको किस्मत में यकीन होता है तो फिल्म ‘पोंगा पंडित’ इसकी हीरोइन नीता मेहता को किस्मत से ही मिली फिल्म है। इस फिल्म के लिए सुरिंदर कपूर ने डिंपल कपाड़िया को साइन किया था। डिंपल ने सारी कागजी कार्यवाही पूरी करके साइनिंग अमाउंट भी ले लिया था लेकिन फिर राजेश खन्ना से उनकी शादी का एलान हो गया। डिंपल ने शादी करने से पहले अपनी उन सारी फिल्मों के साइनिंग अमाउंट लौटा दिए जो उन्होंने ‘बॉबी’ के दौरान इन सबसे लिए थे। डिंपल फिल्म से चली गईं तो सुरिंदर कपूर फिल्म की कहानी लेकर परवीन बाबी से मिले। परवीन बाबा को भी ये रोल बहुत पसंद आया और उन्होंने हां भी कर दी, लेकिन फिर एकाएक उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को ही अलविदा कह दिया। फिल्म की सारी बुकिंग और डेट्स लॉक हो चुकी थीं और आनन फानन में सुरिंदर कपूर व प्रयाग राज जो हीरोइन ढूंढ सके, वह थीं नीता मेहता।
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निर्माता सुरिंदर कपूर से हिंदी सिनेमा की कपूर फैमिली नंबर दो शुरू होती है। राज कपूर तो पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे और वह अपने परिवार को राजसी परिवार जैसा ही मानते थे और सुरिंदर कपूर की शुरूआत हिंदी फिल्मों में हुई गीता बाली के सेक्रेट्री का काम करके। तमाम मेहनत और मशक्कत करते सुरिंदर कपूर ने अपना प्रोडक्शन हाउस खोला और राजेश खन्ना के पास चले गए अपनी पहली फिल्म ‘शहजादा’ का प्रस्ताव लेकर। राजेश खन्ना कमाल के इंसान थे। सुरिंदर कपूर शायद अपनी रिक्वेस्ट ठीक से उनके सामने रख भी नहीं पाए थे और उन्होंने अपने सेक्रेट्री को बुलाकर बोल दिया कि सुरिंदर जी को जो जो भी डेट्स चाहिए हों, सब मेरी डायरी में तुरंत नोट कर दो। पैसे की तो बात तक नहीं की। राजेश खन्ना नए लोगों को बढ़ावा देने में हमेशा आगे रहते थे और एक सुपरस्टार का सेक्रेट्री फिल्म प्रोड्यूसर बनने जा रहा है, इस सोच ने ही उन्हें खुश कर दिया। सुरिंदर कुमार पूछते रहे कि रियायत के बाद वह कितनी फीस उनसे लेंगे, लेकिन राजेश खन्ना ने हर बार बस यही कहा, ‘हिसाब फिल्म शूट हो जाने के बाद होगा।’
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