{"_id":"6049e2f6436d00773a70acfd","slug":"roohi-review-by-pankaj-shukla-rajkumar-rao-janhvi-kapoor-varun-sharma-hardik-mehta-dinesh-vijan-jio","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Roohi Review: राजकुमार के नाम ने ‘रूही’ को पार कराई वैतरणी, जान्हवी और वरुण शर्मा की बढ़िया कलाकारी","category":{"title":"Reviews","title_hn":"रिव्यूज","slug":"movie-review"}}
Roohi Review: राजकुमार के नाम ने ‘रूही’ को पार कराई वैतरणी, जान्हवी और वरुण शर्मा की बढ़िया कलाकारी
कलाकार: राजकुमार राव, वरुण शर्मा, जान्हवी कपूर, मानव विज, एलेक्स ओ नील, सरिता जोशी, राजेश जैस, गौतम मेहरा, आदेश भारद्वाज और अनुराग अरोड़ा आदि।
लेखक: गौतम मेहरा, मृगदीप सिंह लांबा
निर्देशक: हार्दिक मेहता
निर्माता: दिनेश विजन
रेटिंग: ***
सिनेमा संभावनाओं का तमाशा है। तमाशा ऐसा जिसको आखिरी सीन तक सुलझाए रखना बहुत जरूरी है। निर्माता दिनेश विजन की इस मामले में तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने हिंदी सिनेमा के दर्शकों को अलग तरह की फिल्मों का स्वाद चखाया है। ‘बीईंग साइरस’ से शुरू हुआ उनका सफर ‘लव आजकल’, ‘कॉकटेल’, ‘गो गोवा गॉन’, ‘बदलापुर’ , ‘हिंदी मीडियम’ और ‘स्त्री’ से होता हुआ ‘रूही’ तक पहुंचा है। वह जोखिम उठाने वाले फिल्म निर्माता है। पटकथाओं का आखिरी सीन तक लिटमस टेस्ट कर सकने वाली एक अनुभवी टीम उनके पास हो तो वह हॉलीवुड के बड़े से बड़े प्रोडक्शन स्टूडियो को मात दे सकते हैं। ‘रूही’ में उन्हें एक जबर्दस्त विजुअल इफेक्ट्स टीम मिली है। कलाकार तो उनके तीनों दमदार हैं ही।
2 of 6
रूही फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘रूही’ तीन वजहों से देखी जाने लायक फिल्म है। पहली तो ये कि जब अक्षय कुमार, रोहित शेट्टी और कटरीना कैफ जैसे दिग्गजों की फिल्म छोटे अंबानी की कंपनी रिलीज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही तो बड़े अंबानी की कंपनी ने नए साल की पहली बड़े सितारों वाली फिल्म सिनेमाघरों में उतारने का फैसला कर लिया। ‘स्त्री’ की ब्रांडिंग का भी इस फिल्म को फायदा है। फिल्म ‘रूही’ की कहानी बुंदेलखंड में बसे काल्पनिक शहर की कहानी है जहां साल 2021 में भी पकड़ुआ विवाह होता है। बिहार वाले पकड़ुआ विवाह से ये ठीक उलट है। यहां लड़कियों की जबरिया शादी होती है। इन्हीं लड़कियों में से एक मुड़ियापैरी भी है। मुड़ियापैरी यानी वो चुड़ैल जिसके पैर उलटे होते हैं। भौरा पांडे लोकल अखबार का रिपोर्टर है और अपने साथी कटन्नी के साथ मिलकर लड़कियां उठाने का पार्टटाइम धंधा भी करता है। लेकिन, इस बार जो लड़की दोनों ने उठाई है, वह इनका चाल, चरित्र और चेहरा सब बदल देने वाली है।
3 of 6
रूही फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म को देखने की दूसरी अच्छी वजह है, इसके कलाकारों की मेहनत। फिल्म में मानव विज की ओवरएक्टिंग छोड़ दी जाए तो छोटे से छोटे रोल में भी कलाकारों ने अच्छा काम किया है। ‘स्त्री’ के विकी से ‘रुही’ के भौरा को अलग रखने के लिए राजकुमार राव ने अपने गेटअप, अपने चलने के अंदाज और अपने बोलने के तरीके में बढ़िया बदलाव किया है। राजकुमार राव के साथ प्लस प्वाइंट ये है कि उनका एक फैन बेस पूरे देश में बन चुका है जो उनकी फिल्म देखता ही देखता है। औसत यही रहा है कि राजकुमार राव की फिल्मों की कहानी अच्छी होती है। और, जिम्मेदारी अकेले उनके कंधे पर ही हो तो वह फिल्म को आखिरी सीन तक जमा भी ले जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
रूही फिल्म के एक दृश्य में वरुण
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनय के मामले में फिल्म ‘रूही’ वरुण शर्मा और जान्हवी कपूर के करियर का भी अहम पड़ाव है। जान्हवी कपूर के अभिनय में फिल्म दर फिल्म गजब का निखार आता दिख रहा है। बड़े परदे पर वह आने वाले दिनों में तमाम दिग्गज अभिनेत्रियों के लिए चुनौती बनती दिख रही हैं। फिल्म में वह एक ही किरदार कर रही हैं, जो सामान्य हालत में कुछ और होता है और चुड़ैल का साया आ जाने के बाद कुछ और। वरुण शर्मा फिल्म ‘रूही’ का एक्स फैक्टर हैं। ये कलाकार अगर इसी तरह कॉमेडी को सिद्ध करता रहा तो आने वाले दिनों में वरुण के नाम से ही वितरक फिल्म उठाने लगेंगे। अगर ऐसा हुआ तो जॉनी वाकर, महमूद जैसे कलाकारों की फेहरिस्त में उनके नाम की चिप्पी भी चिपक सकती है। बस सोलो हीरो बनने के मोह से उन्हें दूर रहना है।
विज्ञापन
5 of 6
रूही फिल्म का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तीसरी अच्छी वजह फिल्म को देखने की है इसकी तकनीकी टीम की शानदार कीमियागिरी। अमलेंदु चौधरी की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के किरदार की तरह कहानी को आगे बढ़ाती है। फिल्म की शुरूआत से ही उनका कैमरा दर्शक को सिनेमा के साथ लेने में कामयाब रहता है। जंगल वाले दृश्यों में उनकी लाइटिंग भी काबिलेतारीफ है। हुफेजा लोखंडवाला ने फिल्म की लंबाई बिल्कुल सटीक रखी है। दो घंटे 14 मिनट की इस फिल्म में उन्होंने गाने भी कतरे हैं और अनावश्यक भागदौड़ भी। सचिन जिगर ने ओरीजनल गाने जो भी बनाए हैं, अच्छे हैं। खासतौर से जुबिन नौटियाल का गाया ‘किस्तों में..’ कमाल गाना है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।