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Mukesh Chand Mathur Birth Anniversary 22 july 1923 was a great Indian playback singer of Hindi film industry
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Mukesh Birth Anniversary: आत्मकथा लिखना चाहते थे मुकेश, गीत की रिकॉर्डिंग के दिन रखते थे उपवास
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंजू बाजपेई
Updated Mon, 22 Jul 2024 07:11 AM IST
सार
एक ऐसी जादुई भरी आवाज, जिसने हर दिल को छुआ। उनके गाने आज भी सदाबहार हैं। हिंदी सिनेमा को जिसने अपनी अद्भुत आवाज में कई बेहतरीन गाने दिए, वह कोई और नहीं, बल्कि मुकेश हैं। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए गीत लोगों आज भी गुनगुनाते हैं। यूं तो मुकेश ने अपने जमाने के सभी लीड एक्टर्स के लिए गाने गाए, लेकिन सबसे ज्यादा उन्होंने शोमैन राज कपूर के लिए गाए हैं। इनमें 'दोस्त-दोस्त ना रहा', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' सहित कई शानदार गाने शामिल हैं। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
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दिवंगत गायक मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
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एक ऐसी जादुई भरी आवाज, जिसने हर दिल को छुआ। उनके गाने आज भी सदाबहार हैं। हिंदी सिनेमा को जिसने अपनी अद्भुत आवाज में कई बेहतरीन गाने दिए, वह कोई और नहीं, बल्कि मुकेश हैं। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए गीत लोगों आज भी गुनगुनाते हैं। यूं तो मुकेश ने अपने जमाने के सभी लीड एक्टर्स के लिए गाने गाए, लेकिन सबसे ज्यादा उन्होंने शोमैन राज कपूर के लिए गाए हैं। इनमें 'दोस्त-दोस्त ना रहा', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' सहित कई शानदार गाने शामिल हैं। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।
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दिवंगत गायक मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश ने अपने सिंगिंग करियर में 1300 से भी ज्यादा गाने गाए थे। मुकेश कभी राज कपूर की आवाज माने जाते थे। 40 के दशक से अपनी गायकी का सफर शुरू करने वाले मुकेश का जन्म दिल्ली के एक माथुर परिवार में 22 जुलाई 1923 को हुआ था। मुकेश फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गायक थे, लेकिन क्या आपको पता है कि वह कभी सिंगर नहीं बनना चाहते थे, बल्कि वह तो हीरो बनना चाहते थे।
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दिवंगत गायक मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मुकेश ने हिंदी फिल्म में जो पहला गाना गाया, वह था 'दिल जलता है तो जलने दे' जिसमें अभिनय मोतीलाल ने किया था। मुकेश को 1959 में 'अनाड़ी' फिल्म के 'सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी' गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायन का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस दिन मुकेश के गीतों की रिकॉर्डिंग होती थी, उस दिन वह उपवास जैसा रखते थे। मुकेश अपने काम के प्रति इतने समर्पित थे कि जब तक उनकी रिकॉर्डिंग नहीं हो जाती थी तब तक वह सिर्फ पानी और गरम दूध ही पीते थे, जिससे उनका गला बिलकुल ठीक रहे और उनके सुरों में कमी न आए।
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दिवंगत गायक मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश का एक सपना अधूरा रह गया था। वह सपना था अपनी आत्म कथा लिखने का। मुकेश डायरी लिखा करते थे। मुकेश ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, "मैं अपनी जिंदगी की यादों को संजोना चाहता हूं, खुशियों को, दुखों को, संघर्षों को, मेरी इच्छा है कि एक दिन मैं अपनी आत्मकथा लिखूं।'' लेकिन अफसोस की बात उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। मुकेश ने 'क्या खूब लगती हो' और 'धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले' जैसे शरारती गीत गाए। तो वहीं 'जाने कहां गए वो दिन' और 'जीना यहां, मरना यहां' जैसे संदेश वाले गाने भी गाए। मुकेश ने कुछ सदाबहार संदेश वाले गीत भी गाए, जो आज भी काफी लोकप्रिय हैं, जैसे- 'सजन रे झूठ मत बोलो' और 'इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल'। यह मुकेश ही थे जो एक तरफ 'ईचक दाना, बीचक दाना, दाने ऊपर दाना' गा सके तो दूसरी ओर 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए' जैसा बेहद संजीदा गीत गाए।
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दिवंगत गायक मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता राज कपूर ने कहा था, ''अगर मैं जिस्म हूं तो मुकेश मेरी आत्मा।' बेशक मुकेश ने हर संगीतकार के साथ काम किया, जिनमें नौशाद, कल्याण जी-आनंद जी, खय्याम, लक्ष्मीकांत-प्यारे लाल हैं, लेकिन शंकर-जय किशन के साथ उन्होंने बेहद शानदार गाने गाए। 'रमैया वस्तावैय्या', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे गीत लोग आज भी सुनना पसंद करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश की मृत्यु 27 अगस्त 1976 को डेट्रॉयट, मिशिगन, अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी, जहां वे एक संगीत कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। उस सुबह, वे जल्दी उठे और नहाने चले गए। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और सीने में दर्द की शिकायत हुई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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