फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Roti Kapada Aur Makaan: ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के 50 साल पूरे, आम आदमी के संघर्ष और मार्मिकता से भरी है फिल्म

Thu, 17 Oct 2024 10:55 PM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Thu, 17 Oct 2024 10:55 PM IST
विज्ञापन
Roti Kapada Aur Makaan golden jubilee movie completes 50 years know its unknown facts and story
रोटी कपड़ा और मकान - फोटो : अमर उजाला

आजादी के बाद देश अपनी मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा था। विभाजन के बाद हुई क्षतिपूर्ति में समाज लगा हुआ था। तब देश के नेता भी अपने चुनावी मुद्दों में जीने के लिए जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराने का वादा किया करते थे। उस दौर में रोटी, कपड़ा और मकान तीन ऐसी चीजें थी, जो हर किसी के लिए बहुत आवश्यक थी। इन सुविधाओं के साथ-साथ बेरोजगारी भी एक महत्वपूर्ण समस्या थी। इन्हीं समस्याओं को फिल्म जगत ने बड़े पर्दे पर उतारा और आम आदमी के संघर्षों को उजागर किया। फिल्मों में सामाजिक समस्याओं को दिखाने का चलन शुरू से ही रहा है। उस दौर में देशभक्ति और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी फिल्मों को बनाने में सबसे आगे मनोज कुमार रहा करते थे और उन्होंने एक फिल्म का निर्माण किया जिसका नाम था, ‘रोटी कपड़ा और मकान।’ यह फिल्म आज अपनी गोल्डन जुबली मना रही है। कल 18 अक्टूबर को इस फिल्म के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। आइए इस मौके पर इससे जुड़ी कुछ बाते जानते हैं।


 

Roti Kapada Aur Makaan golden jubilee movie completes 50 years know its unknown facts and story
रोटी कपड़ा और मकान - फोटो : यूट्यूब

70 के दशक में अभिनेता मनोज कुमार ने फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ का लेखन, निर्देशन और निर्माण किया । फिल्म में उनके अलावा शशि कपूर, जीनत अमान और मौसमी चटर्जी मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, अमिताभ बच्चन, प्रेमनाथ, धीरज कुमार और मदन पुरी ने सहायक भूमिका निभाई है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने संगीत दिया है।

Salman Khan: खेसारी लाल यादव ने किया सलमान खान का समर्थन, अभिनेता को मिल रही धमकियों पर कही ये बात
 

Roti Kapada Aur Makaan golden jubilee movie completes 50 years know its unknown facts and story
रोटी कपड़ा और मकान - फोटो : यूट्यूब

सितारों से सजी फिल्म रोटी, ‘कपड़ा और मकान’ प्रेम, विश्वासघात और बेरोजगारी की भावुकता से भरी हुई कहानी थी। आम लोगों की सबसे बड़ी समस्या से जुड़ी हुई होने के कारण इस फिल्म ने आम जनमानस के दिल को छुआ और सबकी पसंदीदा फिल्म बन गई। यह कहानी एक साधारण से परिवार के युवा की है, जो अपनी और अपने परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है। फिल्म को छह फिल्मफेयर पुरस्कारों का नामांकन मिला था, जिसमें इसने तीन पुरस्कार जीते थे। फिल्म ने ‘सर्वश्रेष्ठ निर्देशक’, ‘सर्वश्रेष्ठ गीतकार’ और और ‘सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड सिंगर’ का फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम किया था।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
Roti Kapada Aur Makaan golden jubilee movie completes 50 years know its unknown facts and story
रोटी कपड़ा और मकान - फोटो : यूट्यूब

आइए इसकी कहानी को थोड़ा विस्तार से जानते हैं….अपने पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद, भारत (मनोज कुमार) पर अपने परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी आती है। उसके दो छोटे भाई हैं, विजय (अमिताभ बच्चन) और दीपक (धीरज कुमार)। भारत की एक बहन, चंपा भी है, जो शादी करने लायक हो गई है। भारत कॉलेज से ग्रेजुएट है, लेकिन उसके पास ढंग की नौकरी नहीं है। वह एक गायक है, लेकिन इससे उसकी बहुत कम आमदनी होती है, जिससे उसकी प्रेमिका शीतल (जीनत अमान) हताश रहती है। इन सब जद्दोजहद के बीच भारत का छोटा भाई विजय परिवार के लिए अपराध की दुनिया में चला जाता है, लेकिन भारत के साथ बहस होने के बाद, वह सेना में शामिल होने के लिए घर छोड़ देता है।


 
विज्ञापन
Roti Kapada Aur Makaan golden jubilee movie completes 50 years know its unknown facts and story
रोटी कपड़ा और मकान - फोटो : यूट्यूब

भारत की जिंदगी में मुश्किलें यहीं कम नहीं होती, उसकी प्रेमिका शीतल अमीर व्यवसायी मोहन बाबू (शशि कपूर) के लिए सचिव के रूप में काम करना शुरू कर देती है। मोहन उसे पसंद करने लगता है। मोहन के पास पैसा और दौलत होने के कारण वह उससे शादी करने के लिए राजी हो जाती है। इस बीच भारत को एक नौकरी तो मिलती है, लेकिन जल्दी ही वह इससे भी हाथ धो बैठता है। शीतल की बेवफाई और नौकरी जाने से उसका दिल टूट कर चूर-चूर हो जाता है। भारत अपने पिता को भी को देता है, जिसके बाद वह अपनी डिग्रियों को भी जला देता है…. आगे की कहानी में भारत के सामने सही और गलत दो रास्ते खुलते है और कई मोड़ भी आते हैं, जो आप इस फिल्म को देखकर पता लगा सकते हैं। हालांकि, इस फिल्म का उद्देश्य मौजूदा समय के हालात और जीवन के जद्दोजहद को दर्शाना था।


 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc. Stay updated with us for all breaking news from Entertainment and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed