बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के घर के बाहर हुई गोलीबारी के मामले में एक आरोपी की हिरासत में मौत हो गई थी, जिसके बाद मृत आरोपी की मां ने सीबीआई जांच करवाने को लेकर याचिका दायर की थी, जिसमें सलमान खान का भी नाम था। अभिनेता की ओर से याचिका से उनका नाम हटाने की मांग की थी। वहीं अब इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने आज सोमवार, 10 जून को सलमान खान का नाम सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका में प्रतिवादी के रूप में हटाने का आदेश दिया। आरोपी अनुज थापन एक मई को यहां अपराध शाखा पुलिस हवालात के शौचालय में मृत पाया गया था।
Salman Khan Firing Case: आरोपी की मौत से जुड़ी याचिका से हटाया जाएगा सलमान खान का नाम, हाईकोर्ट का आदेश
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न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने अनुज थापन की मां और याचिकाकर्ता रीता देवी को निर्देश दिया कि वे याचिका से सलमान खान का नाम हटा दें। अदालत ने कहा, 'उनका नाम हटा दिया जाए। याचिकाकर्ता प्रतिवादी चार का नाम हटाने के लिए याचिका में संशोधन करने की अनुमति चाहता है, क्योंकि उनके खिलाफ कोई दलील नहीं है और उसके खिलाफ कोई राहत नहीं मांगी गई है।' 14 अप्रैल को यहां बांद्रा इलाके में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने गोलीबारी की थी। कथित शूटरों विक्की गुप्ता और सागर पाल को बाद में गुजरात से गिरफ्तार कर लिया गया।
अनुज थापन को सलमान खान के आवास पर गोलीबारी करने के लिए शूटरों को हथियार मुहैया कराने के आरोप में एक अन्य व्यक्ति के साथ 26 अप्रैल को पंजाब से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि थापन ने खुद को मार डाला, जबकि रीता देवी ने 3 मई को हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में गड़बड़ी का आरोप लगाया और दावा किया कि उसकी हत्या की गई है। इस बीच न्यायमूर्ति एनआर बोरकर और न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने अनुज थापन की अधूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर नाराजगी व्यक्त की और अभियोजन पक्ष से सवाल किए।
अपनी याचिका में रीता देवी ने उच्च न्यायालय से अपने बेटे की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को करने का निर्देश देने की मांग की। याचिका में कहा गया है कि हिरासत में पुलिस ने अनुज थापन पर शारीरिक हमला किया और उसे प्रताड़ित किया। रीता देवी ने अपनी याचिका में सलमान खान को प्रतिवादी बनाया था। उच्च न्यायालय ने आज सोमवार को कहा कि याचिका में सलमान खान के खिलाफ कोई आरोप या राहत नहीं मांगी गई है, इसलिए अभिनेता को याचिका में शामिल रखने का कोई मतलब नहीं है।
पीठ ने कहा, 'एक ऐसे व्यक्ति को प्रतिवादी बनाने का क्या मतलब है, जिसे पीड़ित माना जाता है? हमें कोई कारण नहीं दिखता कि प्रतिवादी चार को इस याचिका में क्यों बने रहना चाहिए। वह एक आवश्यक पक्ष नहीं है। याचिकाकर्ता की चिंता उसके बेटे की मौत को लेकर थी, लेकिन याचिका में सलमान खान को प्रतिवादी बनाने का कोई मतलब नहीं था। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सलमान को राज्य अपराध जांच विभाग द्वारा थापन की मौत की जांच का हिस्सा होना चाहिए। अदालत ने कहा कि इसका निर्णय सीआईडी को करना है। याचिका में सलमान को प्रतिवादी बनाकर याचिकाकर्ता अपना ध्यान मुख्य मुद्दे के बजाय किसी और चीज पर केंद्रित कर रही है। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।