शुरुआत से ही टीआरपी में नंबर एक रहने वाला सीरियल अनुपमा का दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज है। हालांकि कई बार दर्शक इसे उबाऊ भी कह चुके हैं लेकिन फिर भी इसकी टीआरपी कभी गिरती नहीं है। सीरियल में ऐसे-ऐसे ड्रामे दिखाए जाते हैं कि आदमी अपना सिर पकड़ ले। सीरियल में सामाजिक मुद्दे, घरेलू हिंसा, महिलाओं के प्रति हिंसा समेत कई मुद्दे बखूबी उठाए गए हैं। लेकिन दर्शकों का कहना है कि थोड़ा बहुत मसाला ठीक है लेकिन एंटरटेनमेंट के नाम पर कुछ भी परोस देना ठीक नहीं है। आज हम आपको अनुपमा शो की पांच ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिसे देखने के बाद आप इस इसपर विचार जरूर करेंगे।
Anupama: आंख बंद करते ही बदल जाता है अनुपमा का ट्रैक, सीरियल में दिखाए जा रहे ट्विस्ट का आम जिंदगी से नहीं है कोई वास्ता
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वनराज का हृदय परिवर्तन
शो में वनराज का जितनी जल्दी हृदय परिवर्तन होता है उतनी जल्दी तो लोग सोच भी नहीं पाते... एक समय में अच्छा बनने वाले वनराज को अब फिर से बुरा इंसान बनने का सुरूर चढ़ा है। कभी वनराज को एहसास होता है कि अनुपमा ने उसके और उसके परिवार के लिए क्या किया है तो कभी वो अनुपमा से बदला लेने की तरकीबें सोचता है।
दिल तोड़ने में एक्सपर्ट है वनराज
वनराज ने पहले तो अनुपमां का दिल तोड़ा फिर उसे प्यार हुआ काव्या शाह से, दोनों ने शादी भी की। सौतन बनकर काव्या अनुपमा के साथ रहने भी आई लेकिन अब वनराज का दिल काव्या से भी भर चुका है, वो अब मालविका के पीछे पड़ा है। ये सब देखकर दर्शकों को लग रहा है कि वनराज जब दिल तोड़ने में एक्सपर्ट है ही तो आखिर लड़कियां अपना दिल तुड़वाने उसके पास क्यों जाती हैं। दर्शकों का कहना है कि वनराज मालविका के साथ भी वैसा ही करेगा जैसा उसने अनुपमा और काव्या के साथ किया है।
पति और सौतन के साथ एक घर में रहना
माना कि अनुपमा की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है लेकिन शो में पति वनराज से तलाक के बाद उसका सौतन के साथ एक घर में रहने का लॉजिक किसी को समझ नहीं आया। ये तो जख्मों को कुरेदने वाली बात हुई ना... क्या असल जिंदगी में ऐसा कभी होता है? कौन सी औरत अपने गम को कुरेदने में भरोसा करेगी भला।
ट्विस्ट से परेशान हैं दर्शक
अनुपमा देखने वाले दर्शकों का कहना है कि ये शो अब अब्बास मस्तान की फिल्म लगने लगी है। जहां हर एपिसोड में टविस्ट है। हर किरदार का अपना पास्ट है। दर्शकों का कहना है कि अनुपमा का चरित्र पूरी तरह से पटरी से उतर रहा है। समझ सकते हैं कि अनुपमा के किरदार को महत्व चाहिए तो इसे मजबूत दिखाने के अन्य तरीके भी हैं लेकिन प्रोग्रसिव सोच के नाम पर सौतन और अपने पति की शादी बचाने का आइडिया कुछ जमा नहीं है।