फिल्मों की तरह ही भारत में स्पोर्ट्स की एक अलग ही मान्यता है। कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर क्रिकेट के मैच तक हर चीज का लोग पूरा-पूरा आनंद लेते हैं। फिल्म जगत भी हमारे खिलाड़ियों से बहुत ही प्रेरित हैं। भाग मिल्खा भाग से लेकर मेरी कॉम सहित कई फिल्में अब तक खिलाड़ियों की जिंदगी पर बन चुकी हैं। लेकिन इन्ही में से कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिन्होने खेलकूद के बाद अगर किसी और चीज को अपने प्रोफेशन के रूप में चुना तो वो है अभिनय क्षेत्र। कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होने बॉलीवुड और टेलीविजन में अपनी अभिनय कला भी दिखाई। इन्ही कलाकारों में से एक हैं प्रवीण कुमार सोबती।
महाभारत: भारत के लिए पदक जीतने वाले प्रवीण कुमार ऐसे बने ‘गदाधारी’ भीम, BSF में थे कमांडेंट
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भीम के किरदार को प्रवीण ने किया जीवंत
प्रवीण कुमार ने ‘भीम’ के किरदार को इतनी बखूबी निभाया कि आज भी जब महाभारत की बात की जाती है तो भीम के रूप में हमेशा प्रवीण कुमार को याद किया जाता है। प्रवीण कुमार कितने बेहतरीन कलाकार थे इसका सुबूत उन्होने अपने इस किरदार से दिया। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अपने किरदार में इस कदर जान डालने वाले प्रवीण कुमार सोबती का अभिनय कि दुनिया से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
कॉमनवेल्थ गेम में जीता भारत के लिए पदक
बता दें कि बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में भीम की भूमिका निभाने वाले प्रवीण खुमार अंतराष्ट्रीय खेल में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह डिस्कस थ्रोअर और हैमर थे। प्रवीण कुमार सोबती ने एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स में जाकर इंडिया के लिये पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होने दो बार ओलांपिक में देश का प्रतिनिधित्व भी किया है।
खेलकूद में लोकप्रियता की हासिल
छोटे पर्दे पर भीम की भूमिका निभाने वाले प्रवीण कुमार ने 1960 और 70 के दौरान एथलेटिक्स में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। उन्होने हॉन्ग कॉन्ग में हुए एशियाई खेलों में हिस्सा लिया। उन्हें हैमर और डिस्कस थ्रोअर बनने का मौका मिला। अपनी कला का जादू दिखाकर उन्होने स्वर्ण पदक जीत लिया। प्रवीण किंग्स्टन में कॉमनवेल्थ गेम्स (1966) और तेहरान में एशियाई खेलों (1974) में रजत मेडल विजेता भी बने।
अचानक हुई पीठ दर्द की शिकायत
कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर कई और गेमों में जीत हासिल करने वाले प्रवीण कुमार सोबती की पीठ में अचानक दर्द होने लगा जिसकी वजह से उन्हें स्पोर्ट्स करने में दिक्कत होने लगी। खेल की दुनिया में उन्होने एक सफल पारी खेली और खूब नाम कमाया। लेकिन साल 1980 में उन्होने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।