वो साल 1988 के गर्मी और उमस भरे दिन थे। पूरे देश पर रामायण का खुमार देखने को मिलता था। उस वक्त रामायण देश का सबसे चर्चित टीवी सीरियल बन चुका था। लोग राम, सीता और लक्ष्मण को देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते थे। एक बार फिर रामायण के लिए दर्शकों का वही प्यार देखने को मिल रहा है। रामायण की दोबारा शुरुआत के साथ ही अमर उजाला आपको शो से जुड़े किस्से बता रहा है। ऐसे में इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हैं और आपको बताते हैं रामायण से जुड़े कुछ और किस्से।
दीपिका ने एक इंटरव्यू में उस वक्त बताया था, 'शुरू-शुरू में हमें यह अंदाजा नहीं था कि यह धारावाहिक इतना मशहूर हो जाएगा। तब लोग टीवी को इडियट बॉक्स कहते थे। टीवी मीडियम को खास दर्जा हासिल नहीं था। 'रामायण' में सीता की भूमिका को कलाकार ज्यादा अहमियत नहीं दे रहे थे, लेकिन मैंने यह भूमिका यह सोचकर की कि दर्शकों के मन में सीता की एक लुभावनी छवि है।'
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रामायण
- फोटो : सागर आर्ट्स
दीपिका ने आगे बताया था कि किरदारों का मेकअप, कॉस्ट्यूम और बॉडी लैंग्वेज सब हटकर थे। भाषा भी आम बोलचाल वाली हिंदी से अलग, एकदम शुद्ध हिंदी थी। दीपिका ने बताया था कि सीता के रोल के लिए उनका चुना जाना इतना आसान भी नहीं था। करीब 30-35 लड़कियां सीता के रोल के लिए स्क्रीन टेस्ट देने आईं थीं। दीपिका ने कहा था, "सीता के किरदार के लिए आईं अभिनेत्रियां काफी खूबसूरत, टैलेंटेड और ग्लैमरस थीं, मगर चुना मुझे गया। शायद मैं 'रामायण' की सीता की छवि के अनुकूल थी।निर्देशक रामानंद सागर ऐसे कलाकार चाहते थे, जो भूमिका में समा जाएं।"
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रामायण
- फोटो : सागर आर्ट्स
दीपिका ने आगे बताया था कि, 'रामानंद सागर को बड़े और मशहूर कलाकार नहीं चाहिए थे, बल्कि वे चाहते थे कि उनके सीरियल में वे काम करें, जो बहुत व्यस्त न हों और एपिसोड के पूरे होने तक आसानी से उपलब्ध भी रहें। दीपिका ने बताया था, ''हम कलाकार काफी दिनों तक एक दूसरे को 'स्क्रीन नेम' से ही बुलाते थे। रामानंद जी भी हमें स्क्रीन नेम से ही बुलाते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से कलाकारों को अपनी भूमिका की गहराई में उतरने में सुविधा होती है।"
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गौरतलब है कि 'रामायण' की अधिकांश शूटिंग मुंबई से चार घंटे की दूरी पर स्थित उमरगांव में हुई थी। एक बहुत छोटा सा गांव, जहां ब्रेड जैसी आम चीज भी नहीं मिलती थी। दीपिका ने कहा था, 'हम सब कलाकार स्टूडियो में ही रहते थे, मानो एक लंबी पिकनिक पर आए हों।' बता दें कि 25 जनवरी 1987 को रविवार की सुबह दूरदर्शन पर सबसे पहली बार रामायण का प्रसारण हुआ था।