43 साल की हो गई शिल्पा शिंदे राजनीति में हाथ आजमाने के बाद वापस बुद्धू बक्से पर लौट आई हैं। शिल्पा ने बताया कि वह राजनीति से समाज सेवा करने के लिए जुड़ना चाहती थीं। हालांकि जैसा वह चाहती थीं, वैसा नहीं हो पाया। इसलिए उन्होंने फिलहाल के लिए राजनीति को छोड़ दिया है।
सियासत से इसलिए टूटा शिल्पा शिंदे का दिल, अमर उजाला से खास बातचीत में किया सनसनीखेज खुलासा
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शिल्पा कहती हैं, 'राजनीति से जुड़ने का मेरा मकसद कुछ और था। मैं चाहती थी कि मुझे अगर वहां पर कोई ओहदा मिल जाता है तो मैं समाज सेवा करना शुरू कर दूं। मैं चाहती थी कि जो चीजें मेरे लिए कोई नहीं कर पाया, वह चीजें राजनीति का हाथ थामकर मैं करूं। मुझे नहीं पता कि राजनीति में रहकर समाज सेवा पर कितना काम होता है लेकिन मेरा वही करने का उद्देश्य था। अभी तो वह संभव नहीं हो सका लेकिन हो सकता है कि भविष्य में मैं फिर से कोशिश करूं या खुद अपनी पार्टी बना लूं।'
इस समय तो शिल्पा राजनीति में सक्रिय नहीं हैं लेकिन वह भविष्य में एक बार फिर से कोशिश करने की संभावनाएं जताती हैं। वह कहती हैं, 'अब तो मैं राजनीति में बिल्कुल सक्रिय नहीं हूं। अब तो मुझे डर लगने लगा है। दरअसल, अगर आपको कोई पद दिया गया है और आप उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, फिर तो ठीक है। अगर आपको पद भी मिला है लेकिन आप उसका इस्तेमाल करके लोगों का भला नहीं कर सकते तो उस पद का क्या फायदा? इससे अच्छा तो करो ही मत। कुछ चीजें ऐसी हुई थीं जिनको मैं अभी विस्तार से नहीं बता सकती।'
लंबे समय के बाद अब शिल्पा टीवी के एक कॉमेडी शो 'गैंग्स ऑफ फिल्मिस्तान' का हिस्सा बनी हैं। शिल्पा बताती हैं, 'इस कठिन समय में हम लोगों को हंसाने में कामयाब रहे तो यह हमारे लिए बहुत अच्छी बात होगी। हमारी कोशिश है कि लोग इस शो को अपना मूड हल्का करने के लिए देखें और हंसी खुशी नींद लें। हम किसी से कोई प्रतियोगिता नहीं कर रहे हैं। तीन महीने तक चलने वाला शो है और किसी अकेले का नहीं है। सुनील (ग्रोवर) जी भी हैं। लॉकडाउन के बाद सब खाली ही थे तो निर्माताओं ने सोचा कि बस कुछ कर लेते हैं। ऐसे ही यह शुरू हुआ है।'
वैसे तो लॉकडाउन का पूरा समय शिल्पा ने घर पर ही बिताया। लेकिन, जब उनकी मां घर में चोटिल हो गई थीं तब उन्हें जरूर अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। तब के अनुभव के बारे में उन्होंने कहा, 'थोड़ी परेशानी तब हुई थी जब मेरी मां की तबियत खराब हुई थी। वह गिर गई थीं तो उनको चोट लग गई थी। ऐसे समय में हॉस्पिटल के चक्कर काटने में काफी दिक्कतें हैं। बाकी सब तो ठीक था लेकिन इस बंदी ने लोगों की अहमियत बता दी। जब खुद खाना बनाओ तो रसोइए की याद आए और सफाई करो तो सफाई करने वाले की।'