सीरियल अनुपमा इन दिनों टीवी की टीआरपी की लिस्ट में नंबर वन पर बरकरार है। इस शो में आए दिन कोई ना कोई टि्वस्ट दर्शकों को देखने के लिए मिलता है। इस बार शो में अनुपमा के स्कूल के दिनों के प्यार को दिखाया जा रहा है। शो में अब अभिनेता अनुज कपाड़िया ने एंट्री ले ली है। सीरियल में इस भूमिका को अभिनेता गौरव खन्ना निभा रहे हैं। वो शो को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वो लंबे समय से वह शो में काम करना चाहते थे। अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान गौरव ने शो और अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्सों को शेयर किया है। चलिए जानते हैं गौरव ने क्यों चुना अनुपमा शो में काम करना और खुद को कैसे बनाया शो के लायक?
Anupamaa: गौरव खन्ना को ऐसे मिला अनुपमा सीरियल, शो के लिए खुद को बदला
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शो के लिए खुद को बदला
रूपाली गांगुली के स्कूल के दोस्त की भूमिका गौरव खन्ना निभा रहे हैं। इस भूमिका में फिट होने के लिए उन्हें अपने लुक पर भी काफी काम करना पड़ा। गौरव खन्ना बताते हैं कि मुझे इस भूमिका के लिए वजन बढ़ाना पड़ रहा है ताकि चेहरे से मैच्योर दिखाई दूं। इससे पहले मैं अपनी फिटनेस पर खासा ध्यान देता था। लेकिन शो की डिमांड कि वजह से मैं इस वक्त थोड़ा वजन बढ़ा रहा हूं।
मां कि वजह से किया शो
गौरव कहते हैं 'जब मेरे पास इस शो का ऑफर आया तो सबसे पहले ये बात मैने अपनी मां को बताई थी। दरअसल, मेरी मां को अनुपमा शो बहुत पसंद है। जैसे ही उन्हें ये बात पता चली तो उन्होंने तुरंत ये शो करने के लिए कहा और मैं अपनी मां की बात टाल नहीं पाया।'
सिर्फ 22 मिनट का एपिसोड नहीं
एक एपिसोड को तैयार करने में 2 से 3 दिन का समय तक लग जाता है। गौरव अमर उजाला से बात करते हुए बताते हैं कि कई बार उन्हें 18 से 29 घंटे तक का समय लग जाता है। आप जिस एक सीन को देख रहे होते हैं वह दस अलग-अलग एंगल से शूट होता है। तब जाकर एक एपिसोड तैयार होता है। अनुपमा टीवी का नंबर वन शो है। ऐसे में सभी कलाकार अपना 100 % देने की कोशिश करते हैं।
कानपुर के रहने वाले गौरव काम के सिलसिले में मुंबई में बस गए हैं। उनके माता पिता और परिवार आज भी कानपुर में ही रहता है। ऐसे में लॉकडाउन की वजह से वह अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता पाए। गौरव बताते हैं कि मैं लॉकडाउन के समय अपने घर कानपुर चला गया था। वहां मैंने अपनी मां के हाथ का बना खाना खाया। उन्होंने बताया कि मैंने अपने पिता से खूब बातें की और बाकि रिश्तेदारों से भी मिला। इस लॉकडाउन ने लोगों को अपने परिवार की अहमियत समझाई है। मैंने 12-13 साल बाद एक नॉर्मल जिंदगी जी, क्योंकि मैं लंबे समय से बिना ब्रेक के काम कर रहा था। इसके साथ कोरोना ने लोगों से उनके अपनों को भी दूर कर कर दिया है। इसलिए हर दिन और एक एक पल को जीना चाहिए। जो टाइम आपके पास है उसे खुलकर जी लीजिए।